पश्चिम बंगाल विधानसभा हस्ताक्षर जालसाजी मामले में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी से CID की पूछताछ पूरी
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे भारी उथल-पुथल के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। राज्य अपराध अनुसंधान
- कलकत्ता उच्च न्यायालय से अंतरिम राहत मिलने के तुरंत बाद भवानी भवन स्थित मुख्यालय पहुंचे सांसद, करीब छह घंटे तक चला सवालों का सिलसिला
- CID ने चौदह जून को दोबारा पेश होने का जारी किया नया समन, मूल प्रस्ताव पुस्तिका और अटेंडेंस रजिस्टर की तलाश में जांच तेज
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे भारी उथल-पुथल के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। राज्य अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र से सांसद अभिषेक बनर्जी से की जा रही मैराथन पूछताछ आखिरकार देर रात समाप्त हो गई है। यह हाई-प्रोफाइल पूछताछ कोलकाता के भवानी भवन स्थित CID मुख्यालय में पूरी हुई, जहाँ सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतजाम किए गए थे। विधानसभा के भीतर विपक्षी दल के नेता और अन्य महत्वपूर्ण पदों के चयन के लिए विधायकों के हस्ताक्षरों में की गई कथित हेराफेरी और जालसाजी के मामले में यह पूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस जांच प्रक्रिया का सामना करने के लिए सांसद तय समय सीमा से कुछ देर पहले ही मुख्यालय परिसर के भीतर दाखिल हो गए थे, जिसके बाद विभिन्न स्तर के जांच अधिकारियों की एक विशेष टीम ने उनसे पूछताछ की शुरुआत की।
इस पूरी पूछताछ प्रक्रिया की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब कलकत्ता उच्च न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ ने इस मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए सांसद को एक बड़ी राहत प्रदान की। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जांच में सहयोग करने की स्थिति में राज्य की जांच एजेंसी अगले तीन हफ्तों तक उनके खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी का कदम नहीं उठा सकेगी। इसके साथ ही अदालत ने उन्हें उसी दिन शाम छह बजे तक CID के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का कड़ा निर्देश भी जारी किया था। कानूनी संरक्षण प्राप्त होने के तुरंत बाद, दिल्ली से कोलकाता वापस लौटे सांसद हवाई अड्डे से सीधे अपने कालीघाट स्थित आवास पहुंचे और वहां से बिना कोई समय गंवाए ठीक शाम पांच बजकर पचास मिनट पर भवानी भवन पहुंच गए। इस दौरान मुख्यालय के बाहर भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे ताकि किसी भी संभावित राजनीतिक टकराव या हंगामे की स्थिति से पूरी तरह निपटा जा सके।
भवानी भवन के भीतर चली लगभग छह घंटे लंबी इस गहन पूछताछ के दौरान CID के वरिष्ठ अधिकारियों और आर्थिक अपराध शाखा के विशेषज्ञों की टीम ने विधानसभा दस्तावेज से जुड़े कई पेचीदा सवाल दागे। यह मामला मुख्य रूप से छह मई को आयोजित एक सांगठनिक बैठक के उस प्रस्ताव पत्र और उपस्थिति पंजी (अटेंडेंस रजिस्टर) से जुड़ा हुआ है, जिसके आधार पर विधानसभा अध्यक्ष को एक सूची प्रेषित की गई थी। इस सूची में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष, आशिमा पात्रा और नैना बंद्योपाध्याय को उपनेता और फिरहाद हाकिम को मुख्य सचेतक नामित करने का दावा किया गया था। जांच अधिकारियों ने सांसद से इस बात का पूरा ब्योरा मांगा कि यह प्रस्ताव पत्र किस प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया था और इस पर सत्तर विधायकों के हस्ताक्षर किस प्रकार और कब लिए गए थे। देर रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे जब वे मुख्यालय से बाहर निकले, तो वे सीधे मुख्यमंत्री आवास की ओर रवाना हो गए।
नए समन की तामील: CID के जांच अधिकारी इस पूछताछ के दौरान दिए गए कई जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आए, जिसके कारण उन्होंने सांसद को आगामी चौदह जून को दोपहर बारह बजे दोबारा भवानी भवन मुख्यालय में पेश होने का एक नया आधिकारिक समन थमा दिया है।
इस पूरे राजनीतिक और कानूनी विवाद की शुरुआत तब हुई जब सत्ताधारी दल से निष्कासित दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष एक बेहद गंभीर लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में दावा किया गया कि छह मई को ऐसी किसी भी बैठक में नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर कोई सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। दोनों विधायकों का आरोप है कि उन्होंने उन्नीस मई को केवल एक सामान्य उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए थे, जिसे बाद में धोखाधड़ी के जरिए छह मई के आधिकारिक प्रस्ताव पत्र के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने सूची में शामिल कई हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा है कि कुल सत्तर हस्ताक्षरों में से कम से कम चौदह हस्ताक्षर सामान्य रूप से ब्लॉक अक्षरों में लिखे गए हैं, जो कि वास्तविक हस्ताक्षरों से पूरी तरह मेल नहीं खाते हैं।
इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोलकाता पुलिस ने शुरुआत में हरे स्ट्रीट थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की विभिन्न धाराओं के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसे बाद में अट्ठाईस मई को राज्य सरकार के आदेश पर CID को सौंप दिया गया। इस जांच को आगे बढ़ाते हुए CID की एक विशेष टीम ने इस सप्ताह के शुरुआती दिनों में कालीघाट स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय और साल्ट लेक व कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालयों में एक व्यापक तलाशी अभियान भी चलाया था। जांच एजेंसी का मुख्य उद्देश्य उस मूल प्रस्ताव पुस्तिका और उपस्थिति रजिस्टर को अपने कब्जे में लेना है, ताकि उसे वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच के लिए सरकारी प्रयोगशाला भेजा जा सके। हालांकि, अब तक की तलाशी में वे मूल दस्तावेज बरामद नहीं हो सके हैं, जिसके संबंध में भी जांच टीम ने कड़े सवाल पूछे हैं।
इस घटनाक्रम के कारण पश्चिम बंगाल की समूची राजनीति में एक अभूतपूर्व कूटनीतिक और सांगठनिक संकट भी गहराता जा रहा है। विधायकों के इस हस्ताक्षर विवाद के कारण पार्टी के भीतर एक आंतरिक असंतोष की स्थिति भी पैदा हो गई है, जिसके चलते अट्ठावन विधायकों के एक बड़े गुट ने अपनी अलग रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, कानूनी मोर्चे पर भी सांसद को अपने ही वरिष्ठ सहयोगियों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जहां पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद और अनुभवी अधिवक्ता ने अदालत में उनका पक्ष रखने से पूरी तरह इनकार कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य की सत्ता संरचना में आए बड़े बदलावों के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी वरिष्ठ नेता को राज्य की ही अपनी जांच एजेंसी के कड़े सवालों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे आगामी सांगठनिक चुनावों पर गहरा असर पड़ सकता है।
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