Uttarakhand Madarsa Board Modernization: उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा का कायाकल्प, कुरान के साथ अब कंप्यूटर की पढ़ाई अनिवार्य
उत्तराखंड की धामी सरकार ने मदरसा शिक्षा प्रणाली के पुराने ढर्रे को बदलते हुए आधुनिकीकरण का फैसला किया है। अब मदरसों में पारंपरिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर भी सिखाया जाएगा।
- धामी सरकार का बड़ा फैसला: उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पुराने ढर्रे का 'शटर डाउन', अब हाईटेक होंगे छात्र
- उत्तराखंड में मदरसों के पुराने ढर्रे पर लगा ताला! सीएम धामी का ऐतिहासिक फैसला, धार्मिक शिक्षा के साथ अब कंप्यूटर भी सीखेंगे बच्चे
- बड़ी खबर: उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव, पारंपरिक ढर्रे को बदल कंप्यूटर शिक्षा को धामी सरकार ने किया अनिवार्य
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर अल्पसंख्यक शिक्षा ढांचे में एक युगांतकारी और बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पारंपरिक और पुराने ढर्रे को पूरी तरह बदलते हुए नए युग के अनुरूप ढांचागत आधुनिकीकरण की शुरुआत कर दी है। इस ऐतिहासिक सुधार के तहत अब राज्य भर के मान्यता प्राप्त मदरसों में पारंपरिक धार्मिक शिक्षा जैसे कुरान के अध्ययन के साथ-साथ आधुनिक कंप्यूटर और विज्ञान की शिक्षा को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस कड़े रुख के बाद पुराने नियमों के तहत चल रही अपंजीकृत और अपारदर्शी व्यवस्था पर पूरी तरह से शिकंजा कस गया है। इस नीति का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के पिछड़े और वंचित बच्चों को मुख्यधारा की आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है ताकि वे तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बन सकें। इस नीतिगत बदलाव के बाद पूरे प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है।
उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड के पुराने तौर-तरीकों और अव्यवस्थित ढंग से चल रहे अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों पर धामी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार के नए आदेश के अनुसार, राज्य में केवल उन्हीं मदरसों को संचालित होने की अनुमति दी जाएगी जो शिक्षा के आधुनिक मानकों को पूरा करेंगे। इसे प्रशासनिक भाषा में पुराने ढर्रे का 'शटर डाउन' माना जा रहा है। सरकार ने साफ कर दिया है कि मदरसों का इस्तेमाल केवल पारंपरिक या धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रह सकता। अब अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के माध्यम से एक नया पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है, जिसमें डिजिटल साक्षरता, कंप्यूटर विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे विषयों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।
यह नीतिगत बदलाव रातों-रात नहीं हुआ है, बल्कि इसके पीछे पिछले कुछ महीनों से चल रही गहन प्रशासनिक समीक्षा और जांच है। उत्तराखंड शासन ने पूर्व में राज्य के सभी मदरसों का एक व्यापक सर्वे कराया था। इस सर्वे की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि कई मदरसों में बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर है और वहां पढ़ रहे बच्चों को आधुनिक रोजगारपरक शिक्षा नहीं मिल पा रही है। इसके साथ ही कई संस्थानों के पंजीकरण और फंडिंग में भी विसंगतियां पाई गई थीं।
इस स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें उत्तराखंड मदरसा बोर्ड के पुनर्गठन और इसके पाठ्यक्रम में सुधार का खाका तैयार किया गया। नए दिशा-निर्देशों के तहत, बोर्ड के पुराने शिथिल नियमों को समाप्त कर दिया गया है। अब राज्य के सभी मदरसों के लिए एनसीईआरटी (NCERT) के पैटर्न को अपनाना और बच्चों के लिए कंप्यूटर लैब स्थापित करना अनिवार्य कर दिया गया है। जो संस्थान इन मानकों को पूरा करने में विफल रहेंगे या जिनका पंजीकरण अवैध पाया जाएगा, उन्हें राज्य में संचालित होने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस बड़े फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर संतुलित और व्यापक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। भारतीय जनता पार्टी और सरकार के समर्थकों का तर्क है कि यह अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों के भविष्य को संवारने वाला एक क्रांतिकारी कदम है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बयान में कहा है कि सरकार "सबका साथ, सबका विकास" के सिद्धांत पर काम कर रही है और हमारा लक्ष्य है कि मदरसे में पढ़ने वाले बच्चे के एक हाथ में कुरान हो तो दूसरे हाथ में कंप्यूटर भी होना चाहिए ताकि वे डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस बन सकें।
दूसरी ओर, कुछ मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इस पर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि वे आधुनिक शिक्षा और कंप्यूटर के विरोधी नहीं हैं और बच्चों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने आशंका जताई है कि इस नियम की आड़ में किसी भी वैध मदरसे को अनावश्यक रूप से परेशान नहीं किया जाना चाहिए और सरकार को मदरसों में कंप्यूटर लैब और नए शिक्षक रखने के लिए पर्याप्त बजट भी जारी करना चाहिए।
धामी सरकार के इस कड़े और सुधारात्मक कदम का उत्तराखंड की पूरी शिक्षा प्रणाली पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। सबसे बड़ा असर उन हजारों छात्रों पर पड़ेगा जो अब तक केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित थे; अब वे डिजिटल दुनिया से जुड़ सकेंगे। इस फैसले से उन फर्जी और अपंजीकृत मदरसों पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी जो बिना किसी पारदर्शिता के चल रहे थे। प्रशासनिक रूप से अब मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा के स्कूली शिक्षा विभाग के समकक्ष लाने की कवायद तेज हो गई है, जिससे डिग्रियों की मान्यता और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
उत्तराखंड सरकार अब चरणबद्ध तरीके से सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को आधुनिक उपकरणों और कंप्यूटर प्रणालियों से लैस करने की योजना पर काम कर रही है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे मदरसों में आधुनिक विषय पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करें। इसके साथ ही, जिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध रूप से चल रहे शिक्षण संस्थानों पर नजर रखने और नियमों का पालन न करने वाले मदरसों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पूरी छूट दी गई है। आने वाले महीनों में इस नए हाइब्रिड शिक्षा मॉडल (धार्मिक + आधुनिक) के परिणाम सामने आने लगेंगे, जिस पर पूरे देश की नजर रहेगी।
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