पटना के गांधी मैदान में नीतीश कुमार की दसवीं ताजपोशी: पीएम मोदी का गमछा लहराकर देसी अभिवादन।
बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा गया जब जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह ऐतिहासिक
पटना। बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय लिखा गया जब जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह ऐतिहासिक क्षण पटना के प्रसिद्ध गांधी मैदान में हुआ, जहां एनडीए की अपार भीड़ ने उत्सव का माहौल बना दिया। शपथ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी देसी शैली में गमछा लहराकर जनता का अभिवादन किया, जो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो गया। यह नजारा न केवल राजनीतिक एकता का प्रतीक बना, बल्कि बिहार की जनता और केंद्र सरकार के बीच मजबूत रिश्ते को भी दर्शाता है।
गांधी मैदान, जो स्वतंत्रता संग्राम और जयप्रकाश नारायण की संपूर्ण क्रांति का साक्षी रहा है, आज फिर इतिहास रचने को तैयार था। सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने नीतीश कुमार को पहले शपथ दिलाई। इसके बाद सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कुल 26 नेताओं ने मंत्रिपद की शपथ ग्रहण की, जिसमें भाजपा को सबसे ज्यादा पद मिले। जदयू को आठ, जबकि भाजपा को चौदह मंत्री पद आवंटित हुए। इनमें तीन महिलाएं, एक मुस्लिम प्रतिनिधि और कई नए विधायक शामिल हैं। शपथ समारोह करीब आधे घंटे चला, लेकिन मैदान में लाखों लोगों की उपस्थिति ने इसे यादगार बना दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आगमन इस समारोह की सबसे बड़ी हाइलाइट रहा। वे हेलीकॉप्टर से सीधे गांधी मैदान पहुंचे, जहां एसपीजी की कड़ी सुरक्षा थी। शपथ के बाद जब नीतीश कुमार मंच पर आए, तो मोदी ने पहले उनका हाथ थामकर बधाई दी। दोनों नेता करीब एक मिनट तक हाथ मिलाए हुए रहे, जो एनडीए की मजबूत साझेदारी का संदेश दे रहा था। फिर मोदी ने मंच से गमछा लहराना शुरू किया। करीब 30 सेकंड तक यह सिलसिला चला। जनता ने भी अपना गमछा, साफा या जो हाथ में आया, उसे लहराकर जवाब दिया। मैदान में जोश का ठिकाना न रहा। लोग चिल्ला रहे थे, 'मोदी जी जिंदाबाद, नीतीश कुमार जिंदाबाद।' यह दृश्य बिहार की देसी संस्कृति को जीवंत कर गया।
यह पहली बार नहीं है जब मोदी ने बिहार में गमछा लहराया। पहले भी रैलियों और चुनावी सभाओं में उन्होंने यह अंदाज अपनाया, जो बिहारी जनता को खूब भाता है। गमछा यहां सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि सम्मान और उत्साह का प्रतीक है। समारोह के दौरान मंच पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कई राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद थे। उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ, असम के हिमंत बिस्वा सरमा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, छत्तीसगढ़ के विष्णु देव साईं और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस जैसे नेता भी शिरकत करने पहुंचे। लोक जनशक्ति पार्टी के चिराग पासवान और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के जीतन राम मांझी जैसे सहयोगी दलों के नेता भी मंच पर थे।
शपथ से पहले की तैयारियां जोरों पर थीं। बुधवार को नीतीश कुमार ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा और नई सरकार बनाने का दावा पेश किया। एनडीए विधायक दल की बैठक में उन्हें नेता चुना गया। जदयू की बैठक श्रवण कुमार के घर पर हुई, जबकि भाजपा ने सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को उपमुख्यमंत्री बनाया। चुनाव परिणामों के अनुसार एनडीए ने 243 सीटों में से 202 जीतीं। भाजपा को 89, जदयू को 85, लोजपा को 23 और हम को पांच सीटें मिलीं। विपक्षी महागठबंधन को सिर्फ 41 सीटें ही हासिल हुईं। यह जीत एनडीए के लिए ऐतिहासिक रही, जो विकास और सुशासन पर केंद्रित थी।
गांधी मैदान में सुरक्षा व्यवस्था अचूक थी। त्रिस्तरीय घेराबंदी, ड्रोन निगरानी और हजारों पुलिसकर्मी तैनात थे। सुबह छह बजे से दोपहर तीन बजे तक ट्रैफिक डायवर्ट किया गया। स्कूल-कॉलेज बंद रहे, और वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था की गई। एनडीए ने तीन लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा था, जो पूरा भी हो गया। मैदान में झिझिया नृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने माहौल को उत्सवी बना दिया। एक युवक हनुमान जी के भेष में पहुंचा, तो कुछ महिलाएं पारंपरिक साड़ी में। भाजपा की नई विधायक मैथिली ठाकुर कमल के प्रतीक वाली साड़ी पहनकर आईं।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर लंबा और रोमांचक रहा है। 1951 में बकरीपुर में जन्मे नीतीश ने 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से राजनीति में कदम रखा। 1990 में वे पहली बार सांसद बने। 2000 में उपमुख्यमंत्री और 2005 से मुख्यमंत्री बने। बीच में कुछ उतार-चढ़ाव आए, लेकिन उन्होंने बिहार को पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई। सड़कें, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार उनकी उपलब्धियां हैं। दसवीं शपथ के साथ वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल हो गए। पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी और ओडिशा के नवीन पटनायक जैसे नेताओं के साथ उनका नाम जुड़ गया।
एनडीए की इस जीत के पीछे कई कारण हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में विकास के मुद्दे हावी रहे। एनडीए ने 'विकास के साथ संस्कार' का नारा दिया, जो जनता को भाया। विपक्ष के आंतरिक कलह और नीतीश की साफ-सुथरी छवि ने फायदा पहुंचाया। चुनाव से पहले नीतीश ने अमित शाह से होटल मौर्या में बैठक की, जहां रणनीति तय हुई। शपथ के बाद विभागों का बंटवारा होगा, जिसमें भाजपा को वित्त, गृह जैसे बड़े विभाग मिल सकते हैं। जदयू को ग्रामीण विकास और शिक्षा संभालने को कहा जा रहा है।
समारोह के दौरान कुछ दिलचस्प पल भी हुए। नीतीश कुमार शपथ लेते समय थोड़े भावुक नजर आए। उन्होंने कहा, 'बिहार की जनता का आशीर्वाद ही मेरी ताकत है।' मोदी ने नीतीश को बधाई देते हुए कहा, 'बिहार का विकास भारत का विकास है।' मैदान में लोग मोदी के गमछा लहराने पर तालियां बजा रहे थे। एक बुजुर्ग ने कहा, 'यह गमछा सिर्फ कपड़ा नहीं, बिहार का सम्मान है।' सोशल मीडिया पर #ModiGamchha ट्रेंड कर रहा था। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इसे 'राजनीतिक नाटक' कहा, लेकिन एनडीए समर्थक इसे ऐतिहासिक जीत बता रहे हैं।
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