सुल्तानपुर में ए.के. शर्मा का अखिलेश पर तीखा प्रहार: राम-संस्कृति न मानने वालों को इटली भेज दें, दीपक परम ब्रह्म का प्रतीक।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में एक कार्यक्रम के दौरान नगर विकास मंत्री असीम कुमार शर्मा ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के दीपोत्सव पर उठाए सवालों
सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में एक कार्यक्रम के दौरान नगर विकास मंत्री असीम कुमार शर्मा ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के दीपोत्सव पर उठाए सवालों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जो लोग राम, भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म को नहीं मानते, उन्हें इटली एक्सपोर्ट कर देना चाहिए। शर्मा ने दीपक को मात्र प्रकाश का स्रोत नहीं बल्कि परम ब्रह्म का प्रतीक बताया और ऐसे लोगों का भारत की राजनीति में होना दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। यह बयान अखिलेश के दीपोत्सव को बर्बादी बताने वाले टिप्पणियों के बाद आया, जिसने राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा दिया। भाजपा नेता का यह कटाक्ष विपक्ष पर हमले का हिस्सा बन गया, जबकि समाजवादी पार्टी ने इसे सांप्रदायिक बताकर निशाना साधा।
घटना 25 अक्टूबर 2025 को सुल्तानपुर के एक विकास कार्य उद्घाटन कार्यक्रम में हुई। मंत्री ए.के. शर्मा स्थानीय निवासियों को संबोधित कर रहे थे, जब अचानक अखिलेश यादव के हालिया बयानों का जिक्र आ गया। अखिलेश ने 18 अक्टूबर को लखनऊ में धनतेरस के अवसर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अयोध्या में दीपोत्सव पर दीये जलाने का खर्च बेकार है। उन्होंने क्रिसमस के दौरान विदेशों में महीनों तक जलने वाली लाइट्स का उदाहरण देते हुए सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार को इससे सीख लेनी चाहिए। अखिलेश ने ट्वीट किया, भगवान राम के नाम पर सुझाव देता हूं कि दुनिया भर के शहर क्रिसमस पर महीनों तक जगमगाते रहते हैं। दीये और मोमबत्तियों पर बार-बार खर्च क्यों? ऐसी सरकार को हटाना होगा। हम तो और सुंदर रोशनी करेंगे।
इस बयान ने भाजपा में रोष भर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 19 अक्टूबर को अयोध्या के दीपोत्सव उद्घाटन के दौरान जवाब दिया। उन्होंने कहा, जहां कभी गोलियां चलाई गईं, वहां अब दीये जल रहे हैं। हम दीपक जलाते हैं, वे गोलियां चलाते थे। योगी ने अखिलेश को राम विरोधी करार दिया और दीपोत्सव को सांस्कृतिक धरोहर बताया। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर लिखा, अखिलेश का बयान हिंदू परंपराओं के प्रति असंवेदनशील है। दीया जलाना अपमान क्यों? यह वोट बैंक की राजनीति है। विहिप ने भी अखिलेश की आलोचना की और कहा कि दीपोत्सव हिंदू आस्था का प्रतीक है, इसे बर्बादी कहना घोर अन्याय है।
20 अक्टूबर को अखिलेश ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें अयोध्या के सरयू घाट पर दीपोत्सव के बाद लोग बुझे दीयों से तेल इकट्ठा करते दिखे। कैप्शन में लिखा, रोशनी के बाद यह अंधेरा...। यह वीडियो वायरल हो गया और महंगाई व गरीबी पर सवाल उठे। आम आदमी पार्टी ने भी इसे शेयर कर भाजपा पर निशाना साधा। लेकिन भाजपा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि दीपोत्सव पर्यटन बढ़ाने और स्थानीय कुम्हारों की आय का स्रोत है। इस साल के दीपोत्सव में 26 लाख दीये, 2100 वैदिक विद्वान, 1100 ड्रोन और 33000 स्वयंसेवक शामिल हुए। दो विश्व रिकॉर्ड बने—सबसे बड़ा दीया प्रदर्शन और सबसे ज्यादा लोग एक साथ आरती करने का। आयोजन 17 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को चरम पर पहुंचा।
इस पृष्ठभूमि में सुल्तानपुर पहुंचे मंत्री ए.के. शर्मा ने बात को और तीखा कर दिया। उन्होंने कहा, दीपक सिर्फ रोशनी नहीं, परम ब्रह्म का प्रतीक है। सनातन धर्म में दीया अज्ञान के अंधकार को दूर करने का संदेश देता है। जो लोग राम को नहीं मानते, भारतीय संस्कृति को ठुकराते हैं, उन्हें इटली भेज देना चाहिए। यहां उनकी राजनीति का कोई स्थान नहीं। शर्मा का इशारा अखिलेश के परिवार के इटली कनेक्शन पर था, क्योंकि अखिलेश की पत्नी डिंपल के परिवार का इतालवी मूल से जुड़ाव माना जाता है। यह बयान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा। भाजपा समर्थकों ने इसे सराहा, जबकि समाजवादी कार्यकर्ताओं ने इसे सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया।
ए.के. शर्मा का पूरा नाम असीम कुमार शर्मा है। वे भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और 2022 से उत्तर प्रदेश सरकार में नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री हैं। उनका जन्म 1960 में लखनऊ में हुआ। इंजीनियरिंग की डिग्री के बाद वे राजनीति में आए। 2017 में वे विधानसभा चुनाव जीते और अब सुल्तानपुर से विधायक हैं। शर्मा को विकास कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्होंने लखनऊ में मेट्रो व स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स पर काम किया। ऊर्जा विभाग में बिजली सुधार लाए। लेकिन वे आलोचना से भी परिचित हैं। विपक्ष उन्हें सांप्रदायिक बयानों का दोषी ठहराता है। इस बार का बयान भी उसी कड़ी का हिस्सा लगता है।
अखिलेश यादव का जन्म 1 जुलाई 1973 को आजमगढ़ में हुआ। मुलायम सिंह यादव के बेटे हैं। 2007 में वे कानपुर से सांसद बने। 2012 में उत्तर प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। समाजवादी पार्टी को नई दिशा दी। डिजिटल मार्केटिंग और लैपटॉप वितरण जैसी योजनाएं शुरू कीं। लेकिन राम मंदिर आंदोलन पर उनकी पार्टी की भूमिका विवादास्पद रही। 2019 में वे आजमगढ़ से हारे, लेकिन 2024 में फिर जीते। अखिलेश को सोशल मीडिया का कुशल उपयोगकर्ता माना जाता है। उनके ट्वीट्स अक्सर वायरल होते हैं। इस बार दीपोत्सव पर टिप्पणी ने उन्हें हिंदू विरोधी का लेबल दिला दिया।
उत्तर प्रदेश में दीपोत्सव की परंपरा पुरानी है। अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के बाद यह और भव्य हुआ। योगी सरकार ने 2017 से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाकर पर्यटन बढ़ाया। 2025 में बजट 50 करोड़ रुपये का था। लेकिन अखिलेश का सवाल खर्च पर था। उन्होंने कहा कि गरीबों के घर रोशनी की जरूरत है, न कि दिखावे की। भाजपा ने जवाब दिया कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है। कुम्हार परिवारों को लाखों दीये बनाने का ऑर्डर मिला। पर्यटकों की संख्या दोगुनी हुई। अयोध्या में नया एयरपोर्ट और रेल कनेक्टिविटी ने इसे आसान बनाया।
यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा इसे हिंदू वोट एकजुट करने के लिए इस्तेमाल कर रही है। समाजवादी पार्टी ने शर्मा के बयान को असंवैधानिक बताया। अखिलेश ने ट्वीट कर कहा, भाजपा वाले राम के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन गरीबी पर चुप रहते हैं। आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि दीपोत्सव अच्छा है, लेकिन प्रचार पर खर्च कम हो। विहिप के नेता ने अखिलेश को माफ न करने की बात कही। सोशल मीडिया पर #AkhileshAntiRam और #DeepotsavPride ट्रेंड कर रहे हैं। नेटिजन्स ने मीम्स बनाए, जहां अखिलेश को क्रिसमस ट्री के साथ दिखाया गया।
सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण जिला है। यहां स्वतंत्रता संग्राम की यादें जुड़ी हैं। विकास के मामले में पीछे है, लेकिन भाजपा का गढ़ माना जाता है। शर्मा का यह बयान स्थानीय चुनावों को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष ने चुनाव आयोग से शिकायत की। लेकिन शर्मा ने कहा कि उनका बयान सनातन रक्षा के लिए था। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि यह ध्रुवीकरण की रणनीति है। बिहार चुनावों से पहले यूपी में माहौल गरमाना भाजपा का तीर है।
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