UP News: अनुराग ठाकुर बोले- ये हिंदुस्तान है ना कि पाकिस्तान और तालिबान, यहां कोई भी मुगलिया फरमान नहीं चलेगा।
लोकसभा में बुधवार को पेश हुए वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर तीखा...
वक्फ संशोधन बिल पर संसद में हुई बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ये हिंदुस्तान है ना कि पाकिस्तान और तालिबान। यहां मुगलिया फरमान बिल्कुल नहीं चलेगा।
- यह हिंदुस्तान है, यहां मुगलिया फरमान नहीं चलेगा
लोकसभा में बुधवार को पेश हुए वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने विपक्षी दलों पर वोट बैंक की राजनीति करने और वक्फ बोर्ड पर जमीनों पर कब्जा करने का आरोप लगाया। अनुराग ठाकुर ने साफ तौर पर कहा, "यह हिंदुस्तान है, कोई पाकिस्तान या तालिबान नहीं। यहां मुगलिया फरमान नहीं चलेगा।" उनके इस बयान का मतलब था कि देश में कोई भी कानून या आदेश संविधान के अनुरूप होना चाहिए, और यह वक्त की जरूरत है कि वक्फ बोर्ड से संबंधित समस्याओं का समाधान किया जाए।
अनुराग ठाकुर ने इस विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का उचित तरीके से प्रबंधन करना और उनसे होने वाली आय का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल, विशेष रूप से कुछ मुस्लिम संगठनों और उनके नेताओं, वक्फ बोर्ड की जमीनों पर अवैध कब्जे को बढ़ावा दे रहे हैं और उनका उद्देश्य सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करना है, न कि वक्फ संपत्तियों के वास्तविक सुधार के लिए काम करना।
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- इस बिल को हिंदू बना मुस्लिम की नजर से ना देखें
अनुराग ठाकुर ने वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा करते हुए एक बार फिर सरकार की स्थिति को स्पष्ट किया और विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "जब तक नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, तब तक तुष्टिकरण बंद रहेगा।" ठाकुर ने इस बिल को हिंदू बनाम मुस्लिम का मुद्दा नहीं मानते हुए इसे "संविधान बनाम भ्रष्टाचार" और "भारत बनाम आंतरिक विभाजन" बताया। उनका यह बयान देश में किसी भी प्रकार के आंतरिक बंटवारे की पुनरावृत्ति को रोकने का संकल्प दर्शाता है।
अनुराग ठाकुर ने उदाहरण देते हुए कहा कि तुर्की में 1924 में वक्फ मंत्रालय को समाप्त कर दिया गया और उसकी जगह "जनरल डायरेक्टरेट ऑफ फाउंडेशन" स्थापित किया गया, जो लोगों की भलाई के लिए धन का सही इस्तेमाल करता है। इसी तरह कुवैत और लेबनॉन जैसे देशों में भी वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन किया गया। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में यह स्थिति अलग है, जहां वक्फ बोर्ड की जिम्मेदारी महज 200 लोगों के हाथ में दी गई है, जबकि देश की लाखों करोड़ रुपये की संपत्ति उन लोगों के नियंत्रण में है।
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