पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक घमासान तेज, भवानीपुर सीट पर मिली ऐतिहासिक शिकस्त के बाद ममता बनर्जी पर बरसे विरोधी।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जिसने

May 19, 2026 - 13:16
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पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक घमासान तेज, भवानीपुर सीट पर मिली ऐतिहासिक शिकस्त के बाद ममता बनर्जी पर बरसे विरोधी।
पश्चिम बंगाल चुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक घमासान तेज, भवानीपुर सीट पर मिली ऐतिहासिक शिकस्त के बाद ममता बनर्जी पर बरसे विरोधी।
  • विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में बड़ी सेंधमारी, 15 हजार से अधिक मतों के अंतर से मिली करारी हार पर मचा बवाल
  • अपने ही मतदान केंद्र पर पिछड़ने के बाद मुख्यमंत्री के राजनीतिक सफर पर उठे सवाल, प्रतिद्वंद्वी ने तीखा तंज कसते हुए कहा- 'टाटा, बाय-बाय'

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के बाद एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है, जिसने राज्य से लेकर देश भर के सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी को उनके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले भवानीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में एक बेहद करारी और अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा है। इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें 15 हजार से अधिक मतों के बड़े अंतर से पराजित कर इतिहास रच दिया है। इस बड़ी चुनावी सफलता के बाद राज्य की राजनीतिक हवा पूरी तरह से बदल चुकी है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनावों के परिणाम सामने आने के बाद सोमवार को शुभेंदु अधिकारी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए अपनी इस जीत को राज्य की जनता की सामूहिक इच्छा का परिणाम बताया।

शुभेंदु अधिकारी ने इस राजनीतिक पराजय को केवल एक सीट की हार मानने से साफ इनकार करते हुए इसे तृणमूल कांग्रेस के पूरे शासन मॉडल की विफलता करार दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष ध्यान आकर्षित किया कि ममता बनर्जी न केवल समग्र रूप से पिछड़ीं, बल्कि वह उस विशिष्ट मतदान केंद्र यानी पोलिंग बूथ पर भी बढ़त हासिल करने में पूरी तरह नाकाम रहीं, जहां उन्होंने स्वयं लोकतंत्र के इस महापर्व में भाग लेते हुए अपना बहुमूल्य वोट डाला था। एक राजनीतिक रणनीतिकार और पूर्व सहयोगी के रूप में शुभेंदु अधिकारी ने इस बिंदु को सबसे बड़ा प्रमाण माना कि अब पार्टी के भीतर और उनके अपने गढ़ के मतदाताओं में उनके प्रति विश्वास पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि जब एक बड़ा नेता अपने ही बूथ को सुरक्षित रखने में अक्षम साबित हो जाता है, तो उसे समझ लेना चाहिए कि जनता ने बदलाव का मन बना लिया है।

चुनावी नतीजों की इस समीक्षा के दौरान शुभेंदु अधिकारी का रुख बेहद आक्रामक और तीखा नजर आया, जिसने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के मनोबल पर गहरा आघात किया है। उन्होंने अपनी प्रतिद्वंद्वी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बंगाल की प्रबुद्ध जनता ने लंबे समय तक उनके शासन को झेला है, लेकिन इस बार लोकतांत्रिक तरीके से ईवीएम के माध्यम से उन्हें हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने व्यंग्यात्मक शैली का उपयोग करते हुए यह घोषणा कर दी कि ममता बनर्जी का राजनीतिक करियर अब पूरी तरह से अवसान की ओर है और अब उनके लिए राजनीति में वापसी के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं। इस पूरे परिदृश्य को उन्होंने बहुत ही संक्षिप्त मगर कड़े शब्दों में समेटते हुए कहा कि अब विदाई का समय आ गया है, टाटा, बाय-बाय।

भवानीपुर चुनाव परिणाम के प्रमुख आंकड़े

पश्चिम बंगाल की 159-भवानीपुर विधानसभा सीट पर हुए इस बेहद कड़े मुकाबले में कुल बीस चरणों की मतगणना के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारी को कुल 73,917 मत प्राप्त हुए, जो कुल मतदान का लगभग 53.02 प्रतिशत था। इसके विपरीत निवर्तमान मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी ममता बनर्जी को केवल 58,812 मतों से संतोष करना पड़ा, जिसके कारण उन्हें 15,105 मतों के अंतर से पराजय का स्वाद चखना पड़ा।

इस ऐतिहासिक मुकाबले की पृष्ठभूमि को देखें तो भवानीपुर दक्षिण कोलकाता का एक ऐसा इलाका रहा है जिसे पारंपरिक रूप से तृणमूल कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता था। ममता बनर्जी ने वर्ष 2011 से लेकर अब तक कई चुनावों में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया था और यहां की विविध जनसांख्यिकी पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी। हालांकि इस बार चुनावी बिसात पर शुभेंदु अधिकारी ने बेहद आक्रामक प्रचार और स्थानीय मुद्दों को उठाकर इस किले की दीवारों को पूरी तरह से ढहा दिया। मतगणना के शुरुआती दौर में यद्यपि तृणमूल कांग्रेस की प्रत्याशी ने कुछ हजार मतों की मामूली बढ़त बनाई थी, लेकिन जैसे-जैसे डाक मतपत्रों के बाद शहरी और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बक्से खुले, वैसे-वैसे भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में मतों का ध्रुवीकरण साफ दिखने लगा और चौदहवें दौर के बाद यह बढ़त पूरी तरह से जीत में बदल गई।

इस करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के खेमे में सन्नाटा पसरा हुआ है और पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार भीतर ही भीतर इस बात का आत्ममंथन करने में जुटे हैं कि आखिर चूक कहां हुई। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी चिंता है कि भवानीपुर जैसी प्रतिष्ठित सीट पर हारने से न केवल कोलकाता बल्कि पूरे दक्षिण बंगाल में सांगठनिक स्तर पर पार्टी को बड़ा धक्का लगेगा। हार के कारणों में स्थानीय स्तर पर एंटी-इंकंबेंसी, भ्रष्टाचार के संगीन आरोप और अल्पसंख्यक एवं बहुसंख्यक मतों के बीच हुआ तीव्र विभाजन माना जा रहा है। दूसरी ओर पराजित प्रत्याशी ने मतगणना केंद्र से बाहर निकलने के बाद इस पूरे चुनावी परिणाम को अनैतिक बताते हुए चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने की बात कही है, जिसे जीतने वाले दल ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच का यह राजनीतिक द्वंद्व नया नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें वर्ष 2021 के उस नंदीग्राम चुनाव से जुड़ी हैं जहां पहली बार शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पूर्व नेता को एक बहुत ही कड़े और विवादित मुकाबले में दो हजार से कम मतों से शिकस्त दी थी। उस समय ममता बनर्जी ने भवानीपुर में उपचुनाव जीतकर अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी को सुरक्षित रखा था, लेकिन इस बार दोनों नेता एक बार फिर आमने-सामने थे और परिणाम ने इतिहास को और बड़े अंतर के साथ दोहरा दिया है। नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री ने इस जीत को केवल अपनी व्यक्तिगत जीत न मानकर इसे राज्य में भयमुक्त वातावरण और विकास की राजनीति की शुरुआत बताया है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में यह परिणाम राज्य के प्रशासनिक ढांचे में बड़े सुधारों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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