NEET परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, देशव्यापी नेटवर्क से जुड़े दस आरोपी गिरफ्तार।
देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा यानी NEET-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले ने पूरे देश में तहलका
- 'एम' सर की सीक्रेट क्लास ने खोला धांधली का सबसे बड़ा राज, पुणे से लेकर दिल्ली तक फैली साजिश की परतें
- मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सेंधमारी के मास्टरमाइंड्स का पर्दाफाश, लाखों रुपये लेकर चुनिंदा छात्रों को रटवाए गए थे उत्तर
देश की सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा यानी NEET-यूजी 2026 के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले ने पूरे देश में तहलका मचा रखा है। इस महाघोटाले की परतें खोलने में जुटी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अब तक दस शातिर गुनहगारों को गिरफ्तार कर लिया है, जो देश के अलग-अलग राज्यों से इस काले कारोबार को संचालित कर रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जांच एजेंसी ने 'एम' सर यानी मनीषा नाम की एक महिला शिक्षिका के गुप्त ठिकानों पर दबिश दी। इस महिला शिक्षिका पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा परीक्षा प्रक्रिया में विशेषज्ञ के तौर पर शामिल होने का फायदा उठाकर प्रश्नपत्र को लीक करने का संगीन आरोप है। इस गिरफ्तारी के बाद चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश पाने की उम्मीद लगाए बैठे लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं और इस अंतरराज्यीय गिरोह के नेटवर्क का फैलाव देश के कई प्रमुख राज्यों में पाया गया है।
जांच में यह बात सामने आई है कि पुणे में आयोजित होने वाली 'एम' सर की स्पेशल क्लास ही इस पूरे प्रश्नपत्र लीक कांड का मुख्य केंद्र बिंदु थी। आरोपी महिला शिक्षिका को वनस्पति विज्ञान और प्राणि विज्ञान के प्रश्नपत्रों तक पूरी पहुंच हासिल थी, जिसका फायदा उठाकर उसने परीक्षा से ठीक पहले अप्रैल महीने में एक सुनियोजित साजिश रची। इस साजिश के तहत एक अन्य महिला सहयोगी के माध्यम से ऐसे धनाढ्य अभ्यर्थियों को एकजुट किया गया जो परीक्षा पास करने के लिए लाखों रुपये देने को तैयार थे। इन चुनिंदा छात्र-छात्राओं को शिक्षिका के पुणे स्थित निजी आवास पर बुलाया जाता था और वहां बेहद गोपनीय तरीके से विशेष कक्षाएं लगाई जाती थीं। इन कक्षाओं में छात्रों को मोबाइल फोन या किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को ले जाने की सख्त मनाही थी ताकि कोई भी सबूत बाहर न जा सके।
इस सीक्रेट क्लास के भीतर का जो राज खुला है, उसने सुरक्षा और चयन व्यवस्था की रीढ़ को हिलाकर रख दिया है। इन कक्षाओं के दौरान शिक्षिका खुद लीक किए गए प्रश्नपत्रों के सवालों और उनके सटीक उत्तरों को बोलकर छात्रों को लिखवाती थी। छात्रों को इन प्रश्नों को न केवल अपनी कॉपियों में नोट करने को कहा जाता था, बल्कि उनकी पाठ्यपुस्तकों में भी उन हिस्सों पर निशान लगवाए जाते थे ताकि वे उन्हें अच्छी तरह से रट सकें। इस काम के बदले प्रत्येक अभ्यर्थी के परिवार से लाखों रुपये की मोटी रकम वसूली गई थी। जब तीन मई को देश भर में परीक्षा आयोजित की गई, तो इस स्पेशल क्लास में लिखवाए गए प्रश्नपत्र के अधिकांश सवाल वास्तविक परीक्षा के प्रश्नपत्र से पूरी तरह मेल खा रहे थे, जिससे यह साफ हो गया कि परीक्षा से हफ्तों पहले ही पूरी गोपनीयता भंग की जा चुकी थी। केंद्रीय जांच एजेंसी ने अब तक की तफ्तीश में पाया है कि लीक हुए प्रश्नपत्रों को केवल डिजिटल माध्यमों से ही नहीं फैलाया गया था, बल्कि बकायदा ऑफलाइन कोचिंग सेंटरों और निजी आवासों पर गुप्त पाठशालाएं चलाकर व्यावसायिक रूप से बेचा गया था। पुणे, लातूर, नासिक, जयपुर और गुरुग्राम जैसे शहरों में फैले इस नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन के पुख्ता सबूत मिले हैं।
इस मामले में अब तक हुई गिरफ्तारियों के आंकड़े को देखें तो दिल्ली की अदालत ने इस मुख्य महिला आरोपी को चौदह दिनों की कस्टडी में भेज दिया है, जिससे गहन पूछताछ जारी है। इस मामले में कुल दस लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है, जिनमें लातूर से रसायन विज्ञान के एक विशेषज्ञ, नासिक से एक डॉक्टर, पुणे से एक ब्यूटी सैलून की मालकिन, अहिल्यानगर से एक आयुर्वेद चिकित्सक, जयपुर से तीन सगे भाई और गुरुग्राम से एक युवक शामिल है। यह पूरी चेन एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी, जहां दिल्ली और महाराष्ट्र से लीक हुआ प्रश्नपत्र राजस्थान और हरियाणा के कोचिंग हब तक पहुंचाया जा रहा था। जांच दल ने विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी करके कई डिजिटल उपकरण, लैपटॉप, संदिग्ध बैंक खातों के विवरण और मोबाइल फोन जब्त किए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।
इस बड़े घोटाले के सामने आने के बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए तीन मई को आयोजित हुई इस परीक्षा को पूरी तरह से रद्द करने का फैसला किया था, जिसके कारण लगभग तेईस लाख छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय संस्था के महानिदेशक ने इस विफलता की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया था कि यदि एक भी प्रश्न का मिलान परीक्षा से पहले वायरल हुई पीडीएफ से होता है, तो पूरी चयन प्रक्रिया की शुचिता समाप्त हो जाती है। इस प्रशासनिक विफलता को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने संस्था के भीतर बड़े बदलाव करते हुए कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और संयुक्त निदेशकों की नई नियुक्तियां की हैं ताकि आगामी परीक्षाओं को पूरी तरह से पारदर्शी और फुलप्रूफ बनाया जा सके।
इस पूरे नेटवर्क में शामिल अपराधियों की कार्यप्रणाली बेहद शातिर किस्म की थी, जिसमें वे परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े आंतरिक लूपहोल्स का फायदा उठाते थे। लातूर के एक कोचिंग संस्थान के संचालक ने भी ठीक इसी तर्ज पर अपने घर में छात्रों को बुलाकर रसायन विज्ञान के प्रश्नों को हल करवाया था, जिससे यह साबित होता है कि यह किसी एक व्यक्ति की करतूत नहीं बल्कि एक संगठित सिंडिकेट था। यह सिंडिकेट देश के मेडिकल एस्पिरेंट्स की मजबूरियों का फायदा उठाकर उनसे एडवांस में मोटी रकम वसूलता था और परिणाम आने के बाद बाकी की रकम के लिए उनके मूल शैक्षणिक दस्तावेज अपने पास गिरवी रख लेता था।
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