महाराष्ट्र के रायगढ़ में भीषण सड़क हादसा, अम्बेनाली घाट की गहरी खाई में स्कॉर्पियो गिरने से आठ लोगों की दर्दनाक मौत।
महाराष्ट्र के पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बेहद गंभीर चिंताजनक स्थिति बन गई है। राज्य के रायगढ़ जिले
- महाबलेश्वर-पोलादपुर मार्ग पर प्रकृति के सौंदर्य के बीच पसरा सन्नाटा, अनियंत्रित होकर सैकड़ों फीट नीचे गिरा वाहन
- दुर्गम पहाड़ियों में देर रात तक चला बचाव अभियान, स्थानीय ट्रेकर्स और रेस्क्यू टीमों ने मशक्कत के बाद निकाले शव
महाराष्ट्र के पहाड़ी और तटीय क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बेहद गंभीर चिंताजनक स्थिति बन गई है। राज्य के रायगढ़ जिले से एक अत्यंत दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां पर्यटन के लिए प्रसिद्ध एक बेहद संकरे और खतरनाक पर्वतीय मार्ग पर एक भीषण सड़क हादसा घटित हुआ है। शुरुआती आधिकारिक जानकारियों के मुताबिक, महाबलेश्वर और पोलादपुर को जोड़ने वाले प्रसिद्ध अम्बेनाली घाट के पास एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो कार अचानक अनियंत्रित हो गई। मोड़ काटते समय संतुलन खो जाने के कारण यह वाहन सड़क किनारे बने सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए सीधे सैकड़ों फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस दर्दनाक दुर्घटना में कार के भीतर सवार सभी आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
यह भीषण दुर्घटना जिस स्थान पर हुई है, वह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ बेहद जटिल और खतरनाक मोड़ों के लिए भी जाना जाता है। महाबलेश्वर और पोलादपुर के बीच स्थित अम्बेनाली घाट का यह हिस्सा वाहन चालकों के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। चश्मदीदों और स्थानीय लोगों से मिली शुरुआती सूचनाओं के अनुसार, कार में सवार लोग संभवतः वीकेंड या छुट्टियों का आनंद लेकर लौट रहे थे या किसी निजी कार्य से इस मार्ग का उपयोग कर रहे थे। ढलान और तीखे मोड़ पर गति अधिक होने के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका। पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा के लिए लगाए गए पत्थरों और लोहे के बैरियर को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त करते हुए कार सीधे नीचे खाई की तरफ लुढ़क गई
हादसे की आवाज इतनी भयानक थी कि आसपास की पहाड़ियों में उसकी गूंज सुनाई दी, जिसके बाद पास के गांवों में रहने वाले लोग और वहां से गुजर रहे अन्य राहगीर तुरंत मदद के लिए आगे आए। चूंकि खाई बेहद गहरी और पूरी तरह से ढलान वाली थी, इसलिए सामान्य लोगों के लिए तुरंत नीचे पहुंच पाना बिल्कुल भी संभव नहीं था। स्थानीय ग्रामीणों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत पुलिस प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन टीम को इस भयावह घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पोलादपुर और महाबलेश्वर थानों की पुलिस टीमें, एम्बुलेंस और राहत कर्मियों के साथ मौके पर रवाना हो गईं। इसके साथ ही, इस तरह के पहाड़ी रेस्क्यू कार्यों में माहिर स्थानीय ट्रेकर्स और सह्याद्रि बचाव दल के सदस्यों को भी तुरंत घटनास्थल पर बुलाया गया।
गहरी खाई और घने पेड़ों के बीच राहत और बचाव कार्य शुरू करना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। शाम का समय होने और धीरे-धीरे अंधेरा बढ़ने के कारण रेस्क्यू टीमों को नीचे उतरने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। क्रेन, रस्सियों और शक्तिशाली सर्च लाइटों की मदद से बचाव कर्मी धीरे-धीरे खाई के तल तक पहुंचे। वहां का दृश्य बेहद विचलित करने वाला था, क्योंकि सैकड़ों फीट ऊपर से गिरने के कारण स्कॉर्पियो कार पूरी तरह से कबाड़ के लोहे के ढेर में तब्दील हो चुकी थी। कार के सभी हिस्से मुड़ चुके थे और उसके भीतर मौजूद सवारियां बुरी तरह से फंस चुकी थीं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने नीचे पहुंचकर खिड़कियों को काटकर जब जांच की, तो सभी आठ लोगों के प्राण पखेरू उड़ चुके थे।
कड़ी मशक्कत और घंटों चले इस जटिल अभियान के बाद सभी आठों शवों को कार के मलबे से बाहर निकाला गया और रस्सियों के सहारे ऊपर सड़क तक लाया गया। पुलिस ने सभी मृतकों के शवों को पंचनामा करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए पोलादपुर के सरकारी ग्रामीण अस्पताल में भिजवा दिया है। मृतकों की शिनाख्त करने के लिए कार के रजिस्ट्रेशन नंबर और उनके पास से मिले दस्तावेजों, मोबाइल फोन व डायरियों की मदद ली जा रही है ताकि उनके परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दी जा सके। प्राथमिक तौर पर यह माना जा रहा है कि सभी मृतक महाराष्ट्र के ही किसी नजदीकी शहर या जिले के रहने वाले थे, जो इस मार्ग से यात्रा कर रहे थे।
इस हृदयविदारक हादसे ने एक बार फिर पश्चिमी घाट के इन पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वाले वाहनों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अम्बेनाली घाट में कई ऐसे स्थान हैं जहां पर सुरक्षा दीवारें या तो बहुत कमजोर हैं या फिर वे टूट चुकी हैं। इसके अलावा, रात के समय इन मोड़ों पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था न होना और भारी कोहरा छा जाना भी हादसों का एक बहुत बड़ा कारण बनता है। इस मार्ग पर पहले भी कई बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा इंतजामों को पुख्ता करने के लिए कोई ठोस और स्थाई कदम नहीं उठाए गए हैं।
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