Prayagraj : इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राजा भैया और धनंजय सिंह सहित पचास बाहुबलियों के आपराधिक रिकॉर्ड और गन लाइसेंस की जांच के आदेश

यह पूरा मामला संत कबीर नगर के रहने वाले जयशंकर उर्फ बैरिस्टर की एक याचिका से जुड़ा है। उन्होंने सरकारी गन लाइसेंस देने में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने यह

By INA News Desk
May 22, 2026 - 23:43
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Prayagraj : इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राजा भैया और धनंजय सिंह सहित पचास बाहुबलियों के आपराधिक रिकॉर्ड और गन लाइसेंस की जांच के आदेश
Prayagraj : इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, राजा भैया और धनंजय सिंह सहित पचास बाहुबलियों के आपराधिक रिकॉर्ड और गन लाइसेंस की जांच के आदेश
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), बृजभूषण सिंह और धनंजय सिंह समेत पचास से ज्यादा रसूखदार लोगों के आपराधिक मुकदमों का पूरा ब्यौरा उत्तर प्रदेश सरकार से मांगा है। इसके साथ ही अदालत ने इन लोगों के पास मौजूद हथियारों के लाइसेंस और उन्हें मिली सरकारी सुरक्षा की भी नए सिरे से जांच करने के सख्त निर्देश दिए हैं। गृह विभाग के आला अधिकारियों के काम पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने छब्बीस मई तक इस मामले की पूरी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करने को कहा है। इसके अलावा गृह विभाग के संयुक्त सचिव को एक शपथ पत्र के साथ सभी संबंधित जिलों के पुलिस कप्तानों और कमिश्नरों की लिखित जिम्मेदारी भी सौंपनी होगी।

यह पूरा मामला संत कबीर नगर के रहने वाले जयशंकर उर्फ बैरिस्टर की एक याचिका से जुड़ा है। उन्होंने सरकारी गन लाइसेंस देने में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ ने यह बड़ा आदेश दिया है। सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट को देखकर अदालत हैरान रह गई। गृह विभाग ने अपने जवाब में बताया था कि इस समय उत्तर प्रदेश में करीब दस लाख से ज्यादा हथियारों के लाइसेंस जारी हैं। इसके अलावा अभी भी तेईस हजार से ज्यादा आवेदन कतार में हैं।

सरकारी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि छह हजार से ज्यादा ऐसे लोगों को भी गन लाइसेंस दिए गए हैं, जिन पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले चल रहे हैं। प्रदेश के करीब इक्कीस हजार परिवार ऐसे हैं, जिनके घरों में एक से ज्यादा हथियार रखने के लाइसेंस मौजूद हैं। वहीं पुलिस और जिलाधिकारियों के फैसलों के खिलाफ दी गई एक हजार सात सौ अड़तीस अपीलें अब भी कमिश्नरों के पास अटकी हुई हैं। इस पूरी स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने साफ किया है कि छब्बीस मई तक हर जोन, जिले और थाने के हिसाब से ऐसे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की सूची दी जाए, जिन्हें हथियार और सुरक्षा मिली हुई है।

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