Sitapur : सोलह वर्षों से ब्लॉक मुख्यालय बनने की आस में रामकोट, शासन स्तर पर लंबित है प्रस्ताव

यदि क्षेत्र के अर्थाना, ढलिया, गौरा, लिलसी, चेना और कैमहरा समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल या पेंशन जैसी ब्लॉक से जुड़ी सेवाओं की जरूरत होती है, तो उन्हें पैंतीस किलोमीटर दूर पिसावां जाना पड़ता है, जबकि रामकोट कस्बा उनके बेहद नजदीक है

By INA News Desk
May 24, 2026 - 22:16
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Sitapur : सोलह वर्षों से ब्लॉक मुख्यालय बनने की आस में रामकोट, शासन स्तर पर लंबित है प्रस्ताव
Sitapur : सोलह वर्षों से ब्लॉक मुख्यालय बनने की आस में रामकोट, शासन स्तर पर लंबित है प्रस्ताव
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सीतापुर जिला मुख्यालय से सिर्फ बारह किलोमीटर दूर बसे रामकोट कस्बे को विकासखंड (ब्लॉक) का दर्जा मिलने की उम्मीद पिछले सोलह वर्षों से लगी हुई है। खैराबाद विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने के साथ-साथ औद्योगिक रूप से भी रामकोट काफी मजबूत है, क्योंकि यहां से महज तीन किलोमीटर दूर जवाहरपुर में डालमिया चीनी मिल की इकाई स्थापित है, जिससे सैकड़ों मजदूरों को रोजगार मिला हुआ है। इसके अलावा कस्बे में रेलवे स्टेशन, बैंक, थाना, गैस एजेंसी और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जैसी सभी जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं।

यदि क्षेत्र के अर्थाना, ढलिया, गौरा, लिलसी, चेना और कैमहरा समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल या पेंशन जैसी ब्लॉक से जुड़ी सेवाओं की जरूरत होती है, तो उन्हें पैंतीस किलोमीटर दूर पिसावां जाना पड़ता है, जबकि रामकोट कस्बा उनके बेहद नजदीक है। वर्ष 2008 में राज्य सरकार के सर्वे के बाद जिला प्रशासन ने रामकोट को नया ब्लॉक बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जो डेढ़ दशक बीतने के बाद भी लंबित है। गन्ना समिति के चेयरमैन भंवर सिंह के अनुसार, वर्ष 2008 के सर्वे में महोली का बड़ागाँव, खैराबाद का रामकोट और शाहपुर नए ब्लॉक बनने की दौड़ में शामिल थे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों को इसकी बड़ी उम्मीद है और वे जल्द ही इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे।

क्षेत्र पंचायत सदस्य देव शंकर बाजपेई का कहना है कि वर्तमान ब्लॉक खैराबाद यहां से सत्रह किलोमीटर दूर होने के कारण ग्रामीणों को भारी परेशानी होती है। रामकोट में ब्लॉक मुख्यालय बन जाने से जनता को भटकना नहीं पड़ेगा। इस मांग को लेकर वे तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी निधि बंसल और जिलाधिकारी को कई बार ज्ञापन भी सौंप चुके हैं। कस्बे के निवासी श्याम मिश्रा और अर्थाना के जितेंद्र शुक्ला का कहना है कि रामकोट के ब्लॉक बनने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके मिलेंगे और आम जनता को पिसावां या खैराबाद की लंबी दूरी तय करने से राहत मिलेगी। वहीं, क्षेत्र के शिक्षकों का कहना है कि विभागीय कार्यों के लिए उन्हें चालिस किलोमीटर दूर पिसावां जाना पड़ता है, जबकि रामकोट ब्लॉक बनने से उनका काम पास में ही हो जाएगा। स्थानीय लोग आज भी सरकार से इस पुराने प्रस्ताव को मंजूरी देने की गुहार लगा रहे हैं।

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