Cyber Fraud Delhi Police Action: फर्जी IPS और CBI अफसर बनकर डराने वाले तीन साइबर ठग पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने पश्चिम बंगाल से तीन साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी लोगों को फर्जी IPS और CBI अफसर बनकर वीडियो कॉल पर डराते थे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Jul 1, 2026 - 15:29
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Cyber Fraud Delhi Police Action: फर्जी IPS और CBI अफसर बनकर डराने वाले तीन साइबर ठग पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार
साइबर अपराध की जांच करते दिल्ली पुलिस के अधिकारी और तकनीकी उपकरण (सांकेतिक चित्र)
  • डिजिटल अरेस्ट का भंडाफोड़: वीडियो कॉल पर डराने वाले गिरोह के 3 शातिर ठग दिल्ली पुलिस की गिरफ्त में
  • सावधान! वीडियो कॉल पर खुद को CBI और IPS बताने वाले गिरोह का पर्दाफाश, दिल्ली पुलिस ने ऐसे दबोचा
  • क्राइम ब्रेकिंग: दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, नकली IPS-CBI अफसर बनकर ठगी करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

देश की राजधानी में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के मामलों के बीच दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। दिल्ली पुलिस की एक विशेष टीम ने तकनीकी इनपुट के आधार पर कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल से तीन कथित साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी खुद को वरिष्ठ आईपीएस (IPS) और सीबीआई (CBI) अधिकारी बताकर लोगों को व्हाट्सएप या अन्य वीडियो कॉलिंग ऐप पर डराते-धमकाते थे। कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर यह गिरोह मासूम लोगों से मोटी रकम वसूलता था। हाल ही में राजधानी में दर्ज एक शिकायत के बाद पुलिस ने जाल बिछाया और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से इन्हें दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों को दिल्ली लाकर अब उनसे गहन पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।

यह पूरा मामला डिजिटल अरेस्ट और साइबर जबरन वसूली (Cyber Extortion) से जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को पिछले कुछ समय से लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं, जिनमें पीड़ितों ने बताया कि उन्हें अनजान नंबरों से वीडियो कॉल आते हैं। कॉल करने वाले लोग पुलिस की वर्दी में या किसी आधिकारिक बैकग्राउंड वाले सेटअप के साथ बैठते हैं और खुद को सीबीआई, दिल्ली पुलिस या कस्टम विभाग का बड़ा अधिकारी बताते हैं। पुलिस के अनुसार, इस सूचना पर तकनीकी जांच शुरू की गई, जिसके तार पश्चिम बंगाल से जुड़े पाए गए। पुलिस टीम ने वहां छापेमारी कर इस रैकेट के तीन संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।

जांच से जुड़े पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम देता था। आरोपी सबसे पहले पीड़ितों का डेटा जुटाते थे और फिर उन्हें निशाना बनाते थे। कॉल करने के दौरान बैकग्राउंड में बकायदा पुलिस स्टेशन या जांच एजेंसी के दफ्तर जैसा माहौल तैयार किया जाता था, ताकि पीड़ित को जरा भी शक न हो।

हालिया मामले में, एक पीड़ित को वीडियो कॉल कर डराया गया कि उसके नाम पर अवैध पार्सल आया है, जिसमें संदिग्ध सामान या ड्रग्स हैं। खुद को सीबीआई और आईपीएस अधिकारी बताने वाले ठगों ने पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया और 'डिजिटल कस्टडी' में रहने को कहा। केस रफा-दफा करने और कोर्ट-कचहरी के चक्कर से बचाने के नाम पर उनसे बैंक ट्रांसफर के जरिए लाखों रुपए ऐंठ लिए गए। जब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ, तो उसने तुरंत दिल्ली पुलिस के साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और आईपी एड्रेस को ट्रैक करते हुए गिरोह का लोकेशन पश्चिम बंगाल में ट्रेस किया और वहां की स्थानीय पुलिस के समन्वय से तीन आरोपियों को धर दबोचा।

इस बड़ी सफलता पर दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह देश के विभिन्न राज्यों में सक्रिय था। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि कानूनन कोई भी जांच एजेंसी या पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार या कस्टडी में नहीं रख सकता। ऐसी किसी भी कॉल को 'डिजिटल अरेस्ट' का रूप मानकर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर इसकी सूचना दें।

वहीं, कानूनी प्रक्रिया के तहत गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है। आरोपियों के वकीलों या उनके पक्ष की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कानून के मुताबिक, अभी मामले की तफ्तीश जारी है और आरोपियों को अदालत में दोषी साबित होना बाकी है।

इस गिरफ्तारी के बाद देश में तेजी से पैर पसार रहे 'डिजिटल अरेस्ट' के सिंडिकेट पर चोट लगी है। हाल के दिनों में इस तरह के मामलों में काफी उछाल आया था, जिससे आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और कामकाजी पेशेवरों में एक डर का माहौल बन गया था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल अपराधियों के हौसले पस्त होंगे, बल्कि आम जनता के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी। विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां अब इस तरह के फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले फर्जी बैंक खातों और सिम कार्ड्स को ब्लॉक करने के लिए अधिक सक्रिय हो गई हैं।

दिल्ली पुलिस की साइबर टीम अब गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों के मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंक खातों के विवरण खंगाल रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इनके बैंक खातों में ठगी की कितनी रकम ट्रांसफर हुई है। इसके अलावा, पुलिस को अंदेशा है कि इस रैकेट के तार अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे होने और गिरोह के अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारी होने की पूरी संभावना है।

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