देश की राजधानी दिल्ली में लगातार दूसरे दिन भीषण अग्निकांड से कोहराम, दम घुटने और झुलसने से 3 लोगों की दर्दनाक मौत
देश की राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी और उमस के इस दौर के बीच आग लगने की विनाशकारी घटनाएं थमने का नाम नहीं
- तुगलकाबाद में गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात बहुमंजिला इमारत में भड़की आग, दम घुटने और झुलसने से 3 लोगों की दर्दनाक मौत
- इमारत में जहरीला धुआं भरने के कारण कई निवासियों की हालत अत्यंत गंभीर, दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
देश की राजधानी दिल्ली में भीषण गर्मी और उमस के इस दौर के बीच आग लगने की विनाशकारी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं, जिससे पूरी दिल्ली में खौफ और चिंता का माहौल बना हुआ है। दक्षिण दिल्ली के अत्यधिक घनी आबादी वाले तुगलकाबाद इलाके से एक बेहद हृदयविदारक और खौफनाक हादसा सामने आया है, जहां गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात एक बहुमंजिला आवासीय इमारत में अचानक भीषण आग लग गई। रात के सन्नाटे में जब इमारत के अधिकांश निवासी गहरी नींद में सो रहे थे, तभी इस बहुमंजिला इमारत की निचली मंजिल से आग की लपटें उठनी शुरू हुईं जो देखते ही देखते पूरी इमारत में फैल गईं। इस भयानक अग्निकांड की चपेट में आने से अब तक 3 लोगों की दर्दनाक मौत होने की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आग के विकराल रूप धारण करते ही पूरी सोसाइटी और आसपास के रिहायशी इलाके में चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए छतों की तरफ भागने लगे।
यह दर्दनाक हादसा आधी रात के ठीक बाद उस समय घटित हुआ जब पूरी इमारत के भीतर सन्नाटा पसरा हुआ था और लोग अपने कमरों में सोए हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों के अनुसार, सबसे पहले इमारत के ग्राउंड फ्लोर या बेसमेंट में बने एक हिस्से से धुएं का भारी गुबार निकलता हुआ दिखाई दिया, जो कुछ ही मिनटों के भीतर पूरी तरह से आग की ऊंची लपटों में तब्दील हो गया। चूंकि इमारत में नीचे की तरफ बिजली के कई मीटर और कुछ वाहन खड़े थे, इसलिए आग ने बहुत तेजी से ईंधन पकड़ लिया और सीढ़ियों के रास्ते ऊपर की मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उसने इमारत के एकमात्र निकास द्वार यानी मुख्य सीढ़ी और गैलरी को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया, जिसके कारण ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले परिवारों के पास नीचे उतरकर सुरक्षित बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा और वे अंदर ही पूरी तरह से ट्रैप होकर रह गए।
इस अग्निकांड में सबसे दुखद और भयावह स्थिति तब पैदा हुई जब पूरी बहुमंजिला इमारत के भीतर प्लास्टिक, बिजली के तारों और अन्य घरेलू सामानों के जलने के कारण अत्यधिक जहरीला और काला धुआं भर गया। रात के समय गहरी नींद में होने के कारण बहुत से लोगों को शुरुआत में आग लगने का पता ही नहीं चला और जब तक वे जागे, तब तक कमरों और गलियारों में ऑक्सीजन का स्तर पूरी तरह गिर चुका था। इस दम घोंटू धुएं के फेफड़ों में समाने की वजह से इमारत के भीतर मौजूद कई लोग बेहोश हो गए और गंभीर रूप से अस्वस्थ हो गए। दमकल कर्मियों और स्थानीय युवाओं ने मिलकर जब तक कंक्रीट की खिड़कियों और शीशों को तोड़ा, तब तक 3 लोगों का दम पूरी तरह घुट चुका था और अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके अतिरिक्त, दर्जनों अन्य लोगों की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है क्योंकि उनके शरीर के भीतर भारी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस प्रवेश कर चुकी है।
शॉर्ट सर्किट की आशंका: शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारियों का अनुमान है कि यह भीषण आग बिजली के मीटर बोर्ड में हुए तेज शॉर्ट सर्किट या ओवरलोडिंग के कारण भड़की हो सकती है, जिसकी गहन तकनीकी जांच की जा रही है।
इस आपातकालीन घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ हरकत में आ गईं और बिना कोई समय गंवाए घटनास्थल की ओर रवाना हो गईं। तंग गलियों और चारों तरफ खड़े वाहनों के कारण दमकल की गाड़ियों को मुख्य इमारत तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद एक दर्जन से अधिक दमकल वाहनों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाने का काम युद्धस्तर पर शुरू किया। दमकल कर्मियों ने अत्याधुनिक हाइड्रोलिक लैडर और कटर का इस्तेमाल करके इमारत की ऊपरी मंजिलों की खिड़कियों को काटा और अंदर फंसे हुए बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित बाहर निकालना शुरू किया। स्थानीय पुलिस बल ने भी कानून-व्यवस्था को संभाला और झुलसे व अचेत हुए लोगों को तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से नजदीकी अस्पतालों के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की विशेष टीमें घायलों के इलाज में चौबीस घंटे जुटी हुई हैं।
तुगलकाबाद के इस हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से बनी बहुमंजिला इमारतों और उनमें सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी को पूरी तरह से सतह पर ला दिया है। इस तरह के तंग और घने इलाकों में बनी अधिकांश इमारतों के भीतर आग से बचने के लिए कोई वैकल्पिक निकास द्वार यानी फायर एग्जिट नहीं होता है, जिसके कारण ऐसे हादसों में हताहतों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसके अलावा, इन इमारतों में न तो फायर एक्सटिंग्विशर (आग बुझाने वाले यंत्र) लगे होते हैं और न ही पानी की कोई स्वचालित व्यवस्था होती है। दिल्ली विद्युत बोर्ड के नियमों को ताक पर रखकर एक ही छोटे से स्थान पर दर्जनों बिजली के कनेक्शन और मीटर लगा दिए जाते हैं, जो गर्मियों के मौसम में अत्यधिक लोड बढ़ने के कारण गर्म होकर इस तरह के बड़े और जानलेवा हादसों का मुख्य कारण बनते हैं।
इस दर्दनाक घटना के बाद दिल्ली सरकार के उच्च अधिकारियों, स्थानीय विधायकों और जिला मजिस्ट्रेट ने घटनास्थल का दौरा किया है और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिलाया है। दिल्ली पुलिस ने इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए इमारत के मालिक और बिजली के रख-रखाव के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ लापरवाही के कारण मौत होने और जीवन को संकट में डालने की गंभीर धाराओं के तहत एक आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की एक विशेष टीम को भी आज सुबह मौके पर बुलाया गया है, जो घटना स्थल से जले हुए तारों और अन्य सामग्रियों के नमूने एकत्र करेगी ताकि आग लगने के वास्तविक और सटीक कारणों का वैज्ञानिक रूप से पता लगाया जा सके। प्रशासन ने यह भी आदेश दिया है कि इस क्षेत्र की अन्य समान इमारतों की भी सुरक्षा ऑडिट की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों को दोबारा होने से पूरी तरह रोका जा सके।
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