देश की राजधानी में भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को CBI ने रंगे हाथों दबोचा
देश की राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया गया है, जिसने दिल्ली
- पुडुचेरी के एक रसूखदार दवा कारोबारी के खिलाफ चल रही जांच को रफा-दफा करने के एवज में मांगी थी तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत
- भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत CBI की दिल्ली इकाई ने जाल बिछाकर इंस्पेक्टर को रिश्वत की पहली किस्त लेते वक्त किया गिरफ्तार
देश की राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया गया है, जिसने दिल्ली पुलिस के शीर्ष महकमे में हड़कंप मचा दिया है। CBI (सीबीआई) की एंटी करप्शन विंग ने एक बेहद गोपनीय और सुनियोजित ऑपरेशन के तहत दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा यानी क्राइम ब्रांच में तैनात इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी इंस्पेक्टर पर आरोप है कि उसने एक संगीन आपराधिक मामले की जांच को प्रभावित करने और आरोपी को बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध उगाही की मांग की थी। इस सनसनीखेज गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस के आंतरिक अनुशासन और उसकी साख पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय एजेंसी की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि कानून व्यवस्था को बनाए रखने वाले जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारी किस तरह अपने प्रभाव का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत लाभ कमाने की कोशिश कर रहे थे।
इस पूरे मामले की जड़ें दक्षिण भारत के केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी से जुड़ी हुई हैं, जहां के एक प्रतिष्ठित और बड़े दवा कारोबारी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच में एक गंभीर आपराधिक मुकदमा दर्ज था। यह मुकदमा नकली और प्रतिबंधित जीवन रक्षक दवाइयों के निर्माण और उनकी देशव्यापी अवैध तस्करी से संबंधित था। इस मामले की जांच का जिम्मा इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह के पास था, जो इस जांच के मुख्य जांच अधिकारी थे। दवा कारोबारी को इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई और संभावित गिरफ्तारी का डर सता रहा था, जिसका फायदा उठाते हुए इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह ने मामले को पूरी तरह से रफा-दफा करने और जांच की दिशा को कमजोर करने का सौदा तैयार किया। इस सौदे के तहत कारोबारी को राहत देने के बदले में कुल तीन करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिश्वत की मांग की गई थी, जिसे कई किस्तों में चुकाया जाना तय हुआ था।
क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर की गिरफ्तारी से जुड़ी मुख्य कड़ियां-
आरोपी इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा में लंबे समय से तैनात था।
पुडुचेरी के बिजनेसमैन से नकली दवा निर्माण मामले को दबाने के लिए ₹3 करोड़ मांगे गए थे।
पीड़ित कारोबारी ने इस भारी-भरकम मांग के बाद सीधे CBI से संपर्क साधा।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने गुप्त शिकायत दर्ज कर पूरे मामले के सत्यापन के लिए जाल बिछाया।
रिश्वत की पहली किस्त के रूप में एक बड़ी रकम लेते समय आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
रिश्वत की इस विशालकाय मांग से परेशान होकर पीड़ित बिजनेसमैन ने घुटने टेकने के बजाय देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया। उसने इस पूरी बातचीत और रिश्वत की मांग के संबंध में साक्ष्यों के साथ CBI की दिल्ली स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में एक लिखित और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद केंद्रीय एजेंसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। इस टीम ने सबसे पहले गुप्त रूप से शिकायतकर्ता और आरोपी इंस्पेक्टर के बीच हुई बातचीत और पैसों के लेन-देन की कड़ियों का सत्यापन किया। जब यह पूरी तरह से साफ हो गया कि इंस्पेक्टर वास्तव में जांच को प्रभावित करने के नाम पर करोड़ों रुपये की डील कर रहा है, तो एजेंसी ने उसे रंगे हाथों दबोचने के लिए एक बेहद सटीक और फुलप्रूफ जाल बिछाने की योजना बनाई।
तय रणनीति के अनुसार, शिकायतकर्ता कारोबारी ने इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह से संपर्क कर उसे बताया कि वह रिश्वत की पहली किस्त लेकर दिल्ली पहुंच रहा है। आरोपी इंस्पेक्टर ने उसे पैसे सौंपने के लिए दिल्ली के ही एक सुनसान और निर्धारित स्थान पर बुलाया, जहां वह अपनी निजी गाड़ी से पैसे वसूलने पहुंचा था। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी इंस्पेक्टर को केमिकल युक्त नोटों से भरी हुई पहली किस्त की राशि सौंपी, वैसे ही सादे कपड़ों में आस-पास तैनात CBI के अधिकारियों और गवाहों की टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। आरोपी को मौके से भागने या विरोध करने का कोई मौका नहीं मिला। जांच टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी इंस्पेक्टर के हाथों को धुलवाया, जिससे रिश्वत के रूप में लिए गए नोटों पर लगा रासायनिक रंग साफ तौर पर उभर आया, जो अदालत में एक पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में काम करेगा।
इस नाटकीय और बड़ी गिरफ्तारी के तुरंत बाद केंद्रीय जांच एजेंसी की कई अलग-अलग टीमों ने दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में स्थित आरोपी इंस्पेक्टर के सरकारी और निजी ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास, उनके कार्यालय के डेस्क और लॉकरों की गहन तलाशी ली गई। इस तलाशी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण और गोपनीय राजनैतिक व प्रशासनिक दस्तावेज, बेहिसाब संपत्ति के कागजात और भारी मात्रा में कीमती सामान बरामद होने की सूचना मिल रही है। इसके साथ ही क्राइम ब्रांच के उस केस से संबंधित मूल फाइलें और दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए हैं, जिसके नाम पर यह पूरी सौदेबाजी की जा रही थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी ने जांच को किस हद तक प्रभावित या कमजोर करने का प्रयास किया था।
इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस के उच्च प्रशासनिक हलकों में भारी खलबली मची हुई है और विभाग की छवि को बचाने के लिए आंतरिक स्तर पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। अपराध शाखा जैसी प्रतिष्ठित और संवेदनशील इकाई में तैनात एक इंस्पेक्टर का इस तरह करोड़ों रुपये की रिश्वतखोरी में पकड़ा जाना पूरी पुलिस प्रणाली की चयन और निगरानी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है। दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी इंस्पेक्टर प्रदीप सिंह को तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ एक उच्च स्तरीय विभागीय सतर्कता जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं। पुलिस मुख्यालय की तरफ से यह साफ संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका पद या रसूख कितना भी बड़ा क्यों न हो।
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