बंगाल के रण में पीएम मोदी की हुंकार: हल्दिया, आसनसोल और बीरभूम में रैलियों का रेला, परिवर्तन का किया दावा।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के चुनावी समर में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बंगाल
- नंदीग्राम के ऐतिहासिक मॉडल से भवानीपुर तक जीत का मंत्र, प्रधानमंत्री ने ममता सरकार के 'मजबूत किले' में लगाई सेंध
- भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था पर सीधा प्रहार, पूर्वी मेदिनीपुर से लेकर कोयलांचल तक गूंजा भाजपा का चुनावी शंखनाद
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के चुनावी समर में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बंगाल की धरती पर कदम रखते ही राज्य की सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ अपने अभियान को नई धार दी है। एक ही दिन में आयोजित की जा रही तीन ताबड़तोड़ रैलियों के जरिए प्रधानमंत्री ने न केवल भाजपा के पुराने गढ़ों को सुरक्षित करने का प्रयास किया है, बल्कि उन क्षेत्रों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है जो लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के अभेद्य दुर्ग माने जाते रहे हैं। रैलियों का यह सिलसिला पूर्वी मेदिनीपुर के हल्दिया से शुरू हुआ, जो राज्य की औद्योगिक पहचान का केंद्र है और जहां का राजनीतिक मिजाज हमेशा से ही निर्णायक रहा है। प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही इन क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक था, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि आगामी चुनाव महज एक प्रक्रिया नहीं बल्कि विचारधाराओं का एक बड़ा टकराव होने वाला है।
हल्दिया की धरती से जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सबसे पहले उन विकास परियोजनाओं का जिक्र किया जो केंद्र सरकार द्वारा इस क्षेत्र के लिए समर्पित की गई हैं। उन्होंने नंदीग्राम के पांच साल पुराने उस घटनाक्रम को याद दिलाया जिसने बंगाल की राजनीति की दिशा और दशा बदल दी थी। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताते हुए कहा कि जिस तरह नंदीग्राम ने बदलाव की राह दिखाई थी, ठीक वैसी ही लहर अब पूरे प्रदेश में महसूस की जा रही है। उन्होंने बंगाल की जनता के स्वाभिमान और साहस की सराहना करते हुए यह संदेश देने की कोशिश की कि अब वह समय आ गया है जब जनता डर और भ्रष्टाचार के साये से बाहर निकलकर विकास के नए अध्याय को लिखेगी। हल्दिया में उनकी रैली का उद्देश्य उस औद्योगिक बेल्ट को साधना था जहां रोजगार और बुनियादी ढांचा प्रमुख चुनावी मुद्दे बनकर उभरे हैं।
दोपहर होते-होते प्रधानमंत्री का काफिला आसनसोल की ओर बढ़ा, जो बंगाल का प्रमुख औद्योगिक और कोयला क्षेत्र माना जाता है। आसनसोल की रैली में उमड़ी भीड़ ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस बार का मुकाबला बेहद कड़ा होने जा रहा है। यहां प्रधानमंत्री ने कोयला बेल्ट के श्रमिकों और उनके परिवारों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने स्थानीय सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर राज्य सरकार को घेरे में लिया। आसनसोल, जो कभी भाजपा का मजबूत आधार रहा है, वहां प्रधानमंत्री ने फिर से अपना दबदबा कायम करने के लिए भावनात्मक और आर्थिक दोनों ही स्तरों पर जनता से संवाद किया। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल के उज्ज्वल भविष्य के लिए औद्योगिक पुनरुद्धार आवश्यक है, जिसे वर्तमान सरकार करने में विफल रही है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण रैली बीरभूम जिले में आयोजित की गई, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सबसे मजबूत किला माना जाता है। बीरभूम में प्रधानमंत्री के तेवर सबसे अधिक आक्रामक नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को निशाने पर लेते हुए कहा कि जो हाल पांच साल पहले नंदीग्राम में हुआ था, वही स्थिति इस बार भवानीपुर समेत पूरे बंगाल में होने जा रही है। बीरभूम में भाजपा की बढ़ती सक्रियता और प्रधानमंत्री की यह रैली सत्ताधारी दल के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है। यहां प्रधानमंत्री ने कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाते हुए जनता से अपील की कि वे इस बार निर्भीक होकर अपने मत का प्रयोग करें। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की अपनी नीति को दोहराया और बीरभूम की धरती से परिवर्तन का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने अपने भाषणों के दौरान भवानीपुर का विशेष उल्लेख किया, जो मुख्यमंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि परिवर्तन की जो बयार उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल तक बह रही है, उससे कोई भी कोना अछूता नहीं रहेगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, बंगाल की जनता अब यह समझ चुकी है कि तुष्टिकरण की राजनीति ने राज्य का कितना नुकसान किया है। उन्होंने सांस्कृतिक गौरव और बंगाली अस्मिता का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार बंगाल के पुनरुत्थान के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन इसके लिए राज्य में एक ऐसी सरकार की आवश्यकता है जो केंद्र के साथ मिलकर काम कर सके। उनका इशारा साफ था कि 'डबल इंजन' की सरकार ही बंगाल की खोई हुई गरिमा को वापस ला सकती है। पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले इस चुनाव में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होना निर्धारित है, जबकि परिणाम 4 मई को आएंगे। प्रधानमंत्री की आज की तीन रैलियों को उन क्षेत्रों पर केंद्रित किया गया है जो भौगोलिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत विविधतापूर्ण हैं। हल्दिया और आसनसोल जहां भाजपा को मजबूती देने वाले क्षेत्र हैं, वहीं बीरभूम में रैली करना इस बात का प्रतीक है कि भाजपा अब विपक्षी गढ़ों में सीधे मुकाबले के लिए तैयार है। चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री का 'नंदीग्राम मॉडल' का बार-बार जिक्र करना मतदाताओं को उस जीत की याद दिलाने का प्रयास है जिसने बंगाल में सत्ता परिवर्तन की नींव रखी थी। प्रधानमंत्री ने अपनी रैलियों में स्थानीय मुद्दों जैसे कि चक्रवात राहत कार्यों में अनियमितताएं, शिक्षा भर्ती घोटाला और केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई सहायता के बंदरबांट का आरोप लगाते हुए कहा कि बंगाल का हक कुछ मुट्ठी भर लोगों की जेबों में जा रहा है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं का लाभ बंगाल के गरीब लोगों को नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि राज्य सरकार इसे लागू करने में राजनीतिक बाधाएं उत्पन्न कर रही है। इन तर्कों के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण मतदाताओं को यह समझाने का प्रयास किया कि कैसे एक राजनीतिक अवरोध उनके व्यक्तिगत विकास में बाधक बन रहा है।।
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