बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार, सत्ता हस्तांतरण के बीच मांझी बोले- 'नीतीश के बिना विकास की कल्पना कठिन'

नीतीश कुमार के आवास को खाली करने की प्रक्रिया और उनके निजी सामान को 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में शिफ्ट किए जाने की खबरों ने यह तय कर दिया है कि अब वापसी का कोई रास्ता नहीं है। यह वही बंगला है जहां नी

Apr 13, 2026 - 17:35
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बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार, सत्ता हस्तांतरण के बीच मांझी बोले- 'नीतीश के बिना विकास की कल्पना कठिन'
बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस बरकरार, सत्ता हस्तांतरण के बीच मांझी बोले- 'नीतीश के बिना विकास की कल्पना कठिन'
  • बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर: नीतीश कुमार के इस्तीफे की घड़ी आई करीब, मांझी के बयान ने बढ़ाई हलचल
  • राज्यसभा सांसद बनने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगे नीतीश, जीतनराम मांझी ने भावुक अपील के साथ किया बड़ा खुलासा

बिहार की सियासत में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है, जिसका केंद्र बिंदु राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार का भविष्य है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार अब अपनी राजकीय भूमिका को बदलकर राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने और हाल ही में सांसद पद की शपथ लेने के बाद, उनके मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की अटकलें अब हकीकत में बदलती नजर आ रही हैं। इस पूरे परिदृश्य के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और एनडीए के सहयोगी जीतनराम मांझी के एक बयान ने राज्य के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। मांझी ने न केवल नीतीश कुमार के पद छोड़ने के संभावित समय की ओर संकेत किया है, बल्कि उनके योगदान की सराहना करते हुए बिहार के भविष्य को लेकर अपनी चिंताएं भी व्यक्त की हैं।

नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर में यह मोड़ तब आया जब उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया और दिल्ली की राह पकड़ने का निर्णय लिया। 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद यह संवैधानिक रूप से आवश्यक हो गया है कि वे किसी एक सदन के सदस्य बने रहें या फिर मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र दें। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार ने अपने आधिकारिक आवास से सामान शिफ्ट करना भी शुरू कर दिया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि वे मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के लिए मानसिक और प्रशासनिक रूप से तैयार हैं। जीतनराम मांझी ने इस बदलाव पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नीतीश कुमार का जाना बिहार के लिए एक युग के अंत जैसा है। उन्होंने तर्क दिया कि जिस तरह से नीतीश कुमार ने बिहार को विकास की पटरी पर लाया, उनके बिना राज्य का राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचा कुछ अधूरा सा महसूस करेगा।

जीतनराम मांझी के हालिया बयानों ने यह संकेत दिया है कि नीतीश कुमार संभवतः 13 या 14 अप्रैल 2026 तक अपने पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे सकते हैं। मांझी ने नीतीश कुमार के प्रति अपनी कृतज्ञता जताते हुए कहा कि बिहार के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही वे पद छोड़ रहे हों, लेकिन बिहार के मार्गदर्शन के लिए उनकी आवश्यकता हमेशा बनी रहेगी। मांझी का यह कहना कि 'बिहार आपके बिना अधूरा है', उनकी उस भावनात्मक और राजनीतिक निकटता को दर्शाता है जो पिछले कुछ वर्षों में एनडीए के भीतर विकसित हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मांझी का यह बयान न केवल नीतीश कुमार के सम्मान में है, बल्कि यह आने वाली नई सरकार के लिए एक संदेश भी है कि वे विकास की उन ऊंचाइयों को बनाए रखें जो नीतीश कुमार के शासनकाल में स्थापित की गई थीं।

सत्ता का नया केंद्र और उत्तराधिकार की चर्चा

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर एनडीए के भीतर गहन मंथन जारी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के सम्राट चौधरी इस रेस में सबसे आगे हैं। इसके साथ ही, चर्चा यह भी है कि जनता दल (यूनाइटेड) के कोटे से दो नए उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, जिनमें नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का नाम भी चर्चाओं में है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

सत्ता हस्तांतरण की इस प्रक्रिया में संवैधानिक प्रावधानों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है। मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के पास राज्यसभा सांसद बनने के बाद भी तकनीकी रूप से छह महीने तक पद पर बने रहने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने इसे खींचने के बजाय एक सुव्यवस्थित तरीके से पद छोड़ने का मन बनाया है। 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री आवास पर हुई घंटों लंबी बैठक में जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ इस उत्तराधिकार योजना पर विस्तृत चर्चा की गई। मांझी ने इस बैठक के बाद यह विश्वास जताया कि जो भी नया नेतृत्व आएगा, वह नीतीश कुमार के विजन को आगे ले जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह दोहराना नहीं छोड़ा कि नीतीश कुमार की कमी को भरना किसी भी नए नेता के लिए एक बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि उनकी पकड़ बिहार की सामाजिक और जातीय समीकरणों पर बहुत गहरी रही है।

बिहार के इस बदलते राजनीतिक समीकरण में विपक्षी खेमे ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। आरजेडी और अन्य दलों के नेता इस बदलाव को भाजपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं। उनका मानना है कि नीतीश कुमार को दिल्ली भेजकर भाजपा बिहार की सत्ता पर पूरी तरह से काबिज होना चाहती है। दूसरी ओर, मांझी ने इन आरोपों को दरकिनार करते हुए कहा कि यह गठबंधन के भीतर का आपसी और सहमति वाला फैसला है। मांझी ने इस बात पर जोर दिया कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना उनके व्यक्तित्व और अनुभव को राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करने की एक योजना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार में एनडीए एकजुट है और नीतीश कुमार के जाने के बाद भी सरकार अपनी स्थिरता बनाए रखेगी, बशर्ते नेतृत्व में वही परिपक्वता दिखे जो अब तक रही है।

नीतीश कुमार के आवास को खाली करने की प्रक्रिया और उनके निजी सामान को 7 सर्कुलर रोड स्थित बंगले में शिफ्ट किए जाने की खबरों ने यह तय कर दिया है कि अब वापसी का कोई रास्ता नहीं है। यह वही बंगला है जहां नीतीश कुमार पूर्व में भी संकट के समय रह चुके हैं। मांझी ने इसे उनकी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने हमेशा राज्य के हितों को सर्वोपरि रखा है और उनका यह त्याग भी बिहार की राजनीति में एक नई मिसाल पेश करेगा। मांझी ने अपने संबोधन में यह भी याद दिलाया कि कैसे नीतीश कुमार ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था, और वह अहसान वे कभी नहीं भूल सकते। उनके अनुसार, बिहार का हर कोना नीतीश कुमार की मेहनत की गवाही देता है और उनके बिना राज्य की राजनीति का रंग फीका पड़ जाएगा।

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