TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ शिक्षक भर्ती घोटाले में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर ED का शिकंजा पूरी तरह कसा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे भारी उथल-पुथल और हालिया राजनीतिक संकट के बीच TMC के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड
- कोलकाता के साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष पेश होने का नोटिस, करोड़ों रुपये के लेन-देन को लेकर पूछे जाएंगे तीखे सवाल
- 'लिप्स एंड बाउंड्स' प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के माध्यम से धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पुख्ता प्रमाण मिलने का दावा, जांच के रडार पर आए कई अन्य प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे भारी उथल-पुथल और हालिया राजनीतिक संकट के बीच TMC के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। बहुचर्चित और बहु-करोड़ों रुपये के प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने सोमवार को पूछताछ के लिए उन्हें कोलकाता के साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स कार्यालय में हाजिर होने का कड़ा नोटिस तमिल कराया है। यह घटनाक्रम ऐसे नाजुक समय पर सामने आया है जब एक तरफ पार्टी के कई सांसद दिल्ली में बगावती रुख अख्तियार किए हुए हैं, और दूसरी तरफ राज्य की खुफिया पुलिस भी विभिन्न मामलों को लेकर उन पर लगातार कानूनी शिकंजा कस रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा जारी इस नए सम्मन ने न केवल TMC के भीतर बल्कि पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से भारी हलचल और तीव्र तनाव की स्थिति पैदा कर दी है।
इस बड़े मामले की गहराई और इसके कानूनी पहलुओं को देखें तो यह पूरा विवाद साल 2022 से चल रहे पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) और प्राथमिक शिक्षा बोर्ड में हुए कैश-फॉर-जॉब यानी नौकरी के बदले मोटी रकम लेने के घोटाले से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई द्वारा दर्ज की गई मूल प्राथमिकी के आधार पर ईडी ने इस पूरे मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत वित्तीय हेराफेरी और अवैध धन के प्रवाह की जांच शुरू की थी। इस आपराधिक मामले की परतें जैसे-जैसे खुलीं, राज्य के कई कद्दावर राजनेताओं और पूर्व मंत्रियों के चेहरे बेनकाब होते चले गए, जिसमें पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी सहयोगी की गिरफ्तारी शामिल थी, जिनके पास से भारी मात्रा में बेहिसाब नकदी और आभूषण बरामद किए गए थे। अब इसी व्यापक जांच की कड़ियों को आपस में जोड़ते हुए जांचकर्ताओं का यह दृढ़ संदेह है कि इस पूरे घोटाले के वित्तीय लेन-देन का एक बहुत बड़ा हिस्सा कुछ विशिष्ट मुखौटा कंपनियों के माध्यम से ठिकाने लगाया गया है, जिसमें सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व की संलिप्तता की आशंका है।
प्रवर्तन निदेशालय के आला अधिकारियों और जांच दल के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को होने वाली इस गहन पूछताछ का मुख्य केंद्र बिंदु 'लिप्स एंड बाउंड्स प्राइवेट लिमिटेड' नामक एक कारपोरेट इकाई है, जिसमें अभिषेक बनर्जी पूर्व में एक महत्वपूर्ण और निर्णय लेने वाले पद पर सक्रिय रूप से कार्यरत रहे थे। वित्तीय ऑडिट और फॉरेंसिक जांच के दौरान केंद्रीय एजेंसी को इस विशेष कंपनी के बैंक खातों में संदिग्ध मध्यस्थों और नौकरी घोटाले के मुख्य आरोपियों द्वारा हस्तांतरित की गई भारी-भरकम रकम के पुख्ता डिजिटल और दस्तावेजी प्रमाण हाथ लगे हैं। ईडी के जांचकर्ताओं ने पहले ही इस कंपनी के विभिन्न दफ्तरों पर व्यापक छापेमारी कर कई महत्वपूर्ण हार्ड डिस्क, गुप्त डायरियां और निवेश से जुड़े दस्तावेज जब्त किए थे, और अब इन्हीं दस्तावेजों को सामने रखकर सांसद से उन पैसों के वास्तविक स्रोतों और कंपनी के साथ उनके वित्तीय संबंधों को लेकर बेहद तीखे और सिलसिलेवार सवाल पूछे जाने की तैयारी मुकम्मल कर ली गई है। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा इस प्राथमिक शिक्षक भर्ती घोटाले में अब तक लगभग 154 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्तियों को स्थाई रूप से कुर्क और जब्त किया जा चुका है, जबकि संबंधित स्कूल सेवा आयोग घोटालों को मिलाकर कुल जब्ती का आंकड़ा 641 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
अभिषेक बनर्जी के लिए यह कानूनी संकट केवल केंद्रीय एजेंसी की इस पूछताछ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वे एक साथ कई मोर्चों पर चौतरफा कानूनी और प्रशासनिक लड़ाइयों में घिरे हुए नजर आ रहे हैं। इस ईडी सम्मन से ठीक एक दिन पहले, यानी रविवार को, उन्हें राज्य की आपराधिक जांच शाखा (सीआईडी) के मुख्यालय भवानी भवन में विधायकों के हस्ताक्षरों में हुई कथित जालसाजी और 'हस्ताक्षर गेट' विवाद के सिलसिले में साढ़े पांच घंटे से अधिक समय तक बेहद कड़े सवालों का सामना करना पड़ा था। इसके अतिरिक्त, सिलीगुड़ी और बागूआटी पुलिस थानों में चुनावी रैलियों के दौरान दिए गए कुछ कथित भड़काऊ बयानों को लेकर दर्ज आपराधिक मुकदमों के सिलसिले में भी उन्हें मंगलवार को दोबारा राज्य पुलिस के समक्ष पेश होने का निर्देश प्राप्त हो चुका है। इस प्रकार, लगातार तीन दिनों तक अलग-अलग जांच एजेंसियों के सामने पेश होने की इस कानूनी विवशता ने युवा नेता की सांगठनिक और राजनीतिक गतिविधियों पर पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की इस आक्रामक कार्रवाई की पृष्ठभूमि में माननीय उच्चतम न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के वे कड़े विधिक आदेश भी शामिल हैं, जिन्होंने इस पूरे भर्ती तंत्र को जड़ से दूषित और अवैध करार दिया था। देश की शीर्ष अदालत ने पूर्व में दिए गए अपने ऐतिहासिक फैसलों में स्पष्ट रूप से कहा था कि अयोग्य और कम अंक वाले उम्मीदवारों को अनुचित लाभ देने के लिए पूरी चयन सूची और मेरिट लिस्ट के साथ व्यापक छेड़छाड़ की गई थी, जिसके कारण हजारों योग्य और वास्तविक उम्मीदवार अपने हक से वंचित रह गए। अदालतों के इसी कड़े रुख और स्पीडी इन्वेस्टिगेशन के निर्देशों के कारण ही जांच एजेंसियां अब बिना कोई समय गंवाए इस घोटाले के अंतिम लाभार्थियों और इसके पीछे की मुख्य राजनीतिक ताकतों तक पहुंचने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं, जिसके अंतर्गत इस पूरे मनी ट्रेल के मास्टरमाइंड की पहचान की जानी है।
इस बड़े राजनैतिक और कानूनी घटनाक्रम के चलते कोलकाता के साल्टलेक स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स और उसके आसपास के पूरे वीआईपी इलाके में सुरक्षा के अत्यंत कड़े और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। TMC के कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा केंद्रीय एजेंसियों के दफ्तर के बाहर संभावित विरोध प्रदर्शन, नारेबाजी और उग्र हंगामे की आशंका को देखते हुए विधाननगर पुलिस कमिश्नरेट ने पूरे इलाके में भारी संख्या में रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और दंगा नियंत्रण पुलिस बलों को तैनात कर दिया है। इसके साथ ही, सुरक्षा के दृष्टिकोण से सीजीओ कॉम्प्लेक्स की तरफ जाने वाली सभी मुख्य सड़कों पर मजबूत लोहे के बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और केवल अधिकृत अधिकारियों तथा सुरक्षा वाहनों को ही परिसर के भीतर प्रवेश करने की अनुमति दी जा रही है।
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