सीतापुर में छुट्टा सांडों का भीषण तांडव: बीच सड़क पर छिड़ी जंग के बीच आई कार, फिर हुआ जोरदार धमाका।
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में आवारा और छुट्टा पशुओं की समस्या अब आम जनता के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। ताजा घटनाक्रम में
- बेकाबू सांडों की लड़ाई ने हाईवे पर पैदा की दहशत, दुकान के टीन शेड उड़ाए और वाहन को पहुंचाया भारी नुकसान
- सीतापुर-लखीमपुर मार्ग पर आवारा पशुओं का कहर: प्रशासन के दावों की खुली पोल, हादसों के बीच सहमे राहगीर
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में आवारा और छुट्टा पशुओं की समस्या अब आम जनता के लिए जानलेवा साबित होने लगी है। ताजा घटनाक्रम में सीतापुर के एक व्यस्त हाईवे पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब दो सांडों ने बीच सड़क पर एक-दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह लड़ाई इतनी भीषण थी कि सांडों ने आसपास की दुकानों और वहां से गुजरने वाले वाहनों की भी परवाह नहीं की। सड़क के बीचोबीच चल रही इस जंग की वजह से दोनों तरफ का यातायात पूरी तरह से ठप हो गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए। सांडों के इस उत्पात ने न केवल राहगीरों को डराया बल्कि स्थानीय व्यापारियों के मन में भी भारी दहशत पैदा कर दी, क्योंकि वे अपनी दुकानों के बाहर होने वाले नुकसान को लाचारी से देख रहे थे।
विवाद उस समय और अधिक गंभीर हो गया जब लड़ते-लड़ते सांडों का झुंड सड़क के किनारे स्थित एक दुकान की ओर बढ़ गया। इस दौरान सांडों की आपसी टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दुकान के बाहर लगा भारी टीन शेड ताश के पत्तों की तरह उखड़कर गिर गया। इतना ही नहीं, वहां लगे साइनबोर्ड और अन्य सामान भी इस मल्ल युद्ध की भेंट चढ़ गए। सड़क पर मौजूद लोग केवल तमाशबीन बने रहे क्योंकि सांडों के इतने करीब जाना किसी के लिए भी जान जोखिम में डालने जैसा था। सांडों का यह तांडव काफी देर तक जारी रहा, जिससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और हाईवे एक युद्धक्षेत्र के रूप में परिवर्तित हो गया। इस अराजकता ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और पशु नियंत्रण के दावों पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
इसी हंगामे के बीच एक तेज रफ्तार कार वहां से गुजर रही थी, जो सांडों की इस लड़ाई की चपेट में आ गई। बताया जा रहा है कि लड़ते हुए सांड अचानक भागते हुए कार के सामने आ गए। कार चालक ने वाहन को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की, लेकिन सांडों की गति और अचानक आई परिस्थिति के कारण भीषण टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। कार के बोनट और हेडलाइट्स को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि कार के भीतर सवार यात्री बाल-बाल बच गए। हालांकि, इस दुर्घटना में सांड को भी चोटें आईं, जिसके बाद वह और अधिक आक्रामक होकर सड़क पर इधर-उधर भागने लगा। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सड़कों पर घूमते ये लावारिस पशु किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
सीतापुर में आवारा पशुओं की विकराल समस्या
सीतापुर जिले के विभिन्न मार्गों, विशेषकर हरगांव, बिसवां और लखीमपुर हाईवे पर आवारा सांडों का जमावड़ा आम बात हो गई है। हाल ही में हरगांव क्षेत्र में भी एक सांड ने किसान को उठाकर तीन बार पटका था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। प्रशासन द्वारा 'गौशाला' और 'पशु आश्रय' के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन तस्वीरों से साफ बयां होती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि रात के समय ये पशु अंधेरे में सड़क के बीच में बैठ जाते हैं, जिससे दोपहिया और चौपहिया वाहनों के टकराने की घटनाएं प्रतिदिन की बात हो गई हैं।
घटना के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई का अभाव रहता है। सीतापुर की सड़कों पर घूमते ये सांड न केवल यातायात को बाधित करते हैं, बल्कि किसानों की फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहे हैं। आज की इस घटना ने व्यापारियों में भारी रोष पैदा कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि उनकी दुकानों के सामने सांडों के बैठने और लड़ने से ग्राहकों का आना-जाना बंद हो गया है, जिससे उनके व्यापार पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है। कार और सांड के बीच हुई इस टक्कर के वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं, जिनमें सांडों के तांडव को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
सड़क सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह मामला बेहद गंभीर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाईवे पर ऐसे पशुओं की मौजूदगी को नियंत्रित नहीं किया गया, तो भविष्य में और भी घातक परिणाम सामने आ सकते हैं। कार चालक, जो इस घटना का शिकार हुआ, ने बताया कि उसे अंदाजा भी नहीं था कि सांड अचानक उसकी गाड़ी से टकरा जाएंगे। सीतापुर-लखीमपुर मार्ग पर पहले भी कई मौतें इन्हीं आवारा पशुओं के कारण हो चुकी हैं। इस बार भले ही किसी की जान नहीं गई, लेकिन वाहन के नुकसान और यात्रियों के मानसिक आघात ने प्रशासन की पोल खोल दी है। जनता अब मांग कर रही है कि आवारा पशुओं को तत्काल प्रभाव से गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाए ताकि आम आदमी सड़क पर सुरक्षित चल सके।
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