हिमंत बनाम पवन खेड़ा: असम के सियासी रण में 'पासपोर्ट विवाद' पर आर-पार, कांग्रेस नेता ने ठोंकी मेवाड़ के सिपाही होने की ताल।

असम विधानसभा चुनाव 2026 के ऐन पहले राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा

Apr 9, 2026 - 14:10
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हिमंत बनाम पवन खेड़ा: असम के सियासी रण में 'पासपोर्ट विवाद' पर आर-पार, कांग्रेस नेता ने ठोंकी मेवाड़ के सिपाही होने की ताल।
हिमंत बनाम पवन खेड़ा: असम के सियासी रण में 'पासपोर्ट विवाद' पर आर-पार, कांग्रेस नेता ने ठोंकी मेवाड़ के सिपाही होने की ताल।
  • "पाताल से भी ढूंढ लाएंगे": मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की कड़ी चेतावनी पर पवन खेड़ा का दो-टूक जवाब, झुकने से किया इनकार
  • असम विधानसभा चुनाव 2026 की दहलीज पर आरोप-प्रत्यारोप का चरम, राहुल गांधी के 'सिपाही' और असम पुलिस के बीच खिंची तलवारें

असम विधानसभा चुनाव 2026 के ऐन पहले राज्य की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी, रिनिकी भुइयां सरमा पर तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट रखने और विदेशों में बेनामी संपत्ति होने का दावा किया। इन आरोपों ने न केवल असम बल्कि पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। खेड़ा के इन हमलों के जवाब में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसके बाद दोनों नेताओं के बीच जुबानी जंग अपने चरम पर पहुंच गई है।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब पवन खेड़ा ने दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास संयुक्त अरब अमीरात, एंटीगुआ और मिस्र जैसे देशों के पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दुबई में करोड़ों की ऐसी संपत्तियां हैं जिनका उल्लेख चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया है। इन आरोपों को मुख्यमंत्री ने पूरी तरह से "फर्जी और डिजिटल हेरफेर" करार दिया है। मुख्यमंत्री ने कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि कांग्रेस हताशा में उनके परिवार को निशाना बना रही है और असम पुलिस इन झूठ फैलाने वालों को "पाताल" से भी ढूंढ निकालेगी। मुख्यमंत्री की इस "पाताल" वाली टिप्पणी ने विवाद को एक नई दिशा दे दी है, जिसे कांग्रेस ने सत्ता का दुरुपयोग और डराने-धमकाने की राजनीति बताया है।

मुख्यमंत्री की धमकियों के बीच पवन खेड़ा ने अपना पक्ष मजबूती से रखते हुए स्पष्ट किया कि वह किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या "गीदड़ भभकियों" से डरने वाले नहीं हैं। खेड़ा ने अपनी जड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वह मेवाड़ की वीर भूमि से ताल्लुक रखते हैं और एक ऐसे सिपाही हैं जो राहुल गांधी के नेतृत्व में सच की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि मेवाड़ के संस्कार उन्हें झुकना नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ना और सवाल पूछना सिखाते हैं। खेड़ा का यह बयान उनकी निडरता को प्रदर्शित करने के साथ-साथ यह भी संकेत देता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को चुनाव के अंतिम दौर तक ले जाने के लिए पूरी तरह तैयार है और वह पीछे हटने के मूड में नहीं है।

  • कानूनी शिकंजा और चुनावी तपिश

मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी, मानहानि और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि खेड़ा ने चुनाव को प्रभावित करने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया है। असम पुलिस की एक टीम पहले ही पूछताछ के लिए दिल्ली स्थित खेड़ा के आवास पर पहुंच चुकी है, लेकिन उस समय वे वहां मौजूद नहीं थे। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान से ठीक पहले इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई ने चुनाव को और भी अधिक ध्रुवीकृत कर दिया है।

विवाद के केंद्र में राहुल गांधी का नाम भी घसीटा जा रहा है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का मानना है कि पवन खेड़ा को ये कथित फर्जी दस्तावेज स्वयं राहुल गांधी ने उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस मामले की जांच राहुल गांधी तक भी पहुंच सकती है। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस चुनाव हारने के डर से अब व्यक्तिगत छवि खराब करने के निचले स्तर पर उतर आई है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इसे "विच हंट" यानी राजनीतिक उत्पीड़न करार दिया है। पार्टी के अन्य नेताओं ने कहा है कि जब सार्वजनिक हित में सवाल पूछे जाते हैं, तो सरकार पुलिस का इस्तेमाल कर आवाज को दबाने की कोशिश करती है। यह आरोप-प्रत्यारोप अब व्यक्तिगत स्तर से उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा और नैतिकता के मुद्दों तक पहुंच गया है।

पवन खेड़ा ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात को दोहराया कि उन्हें डराने की कोशिशें नाकाम रहेंगी। उन्होंने सवाल किया कि यदि आरोप गलत हैं, तो सरकार केंद्रीय एजेंसियों जैसे ईडी या सीबीआई से इसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराती? खेड़ा के अनुसार, वे केवल वे तथ्य जनता के सामने रख रहे हैं जो सार्वजनिक दस्तावेजों में मौजूद हैं। उनका कहना है कि एक मुख्यमंत्री की जवाबदेही जनता के प्रति होती है और उनके परिवार की संपत्ति की पारदर्शिता पर सवाल उठना लोकतंत्र का हिस्सा है। मेवाड़ के शौर्य और राहुल गांधी के प्रति अपनी निष्ठा का उल्लेख कर उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि वे इस कानूनी लड़ाई को सड़क से लेकर अदालत तक लड़ने के लिए तैयार हैं।

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