Ayodhya: अयोध्या में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर में स्वर्ण-जड़ित श्री राम यंत्र स्थापित किया, विधि विधान से पूजन अर्चन किया।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की धर्म नगरी अयोध्या में भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर में स्वर्ण-जड़ित श्री राम
- अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया, राम मंदिर का निर्माण भारत की समृद्ध विरासत का प्रतीक बताया
देव बक्श वर्मा
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की धर्म नगरी अयोध्या में भारत के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राम मंदिर में स्वर्ण-जड़ित श्री राम यंत्र स्थापित किया और इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद राम मंदिर का निर्माण हुआ, जो भारत की समृद्ध विरासत का प्रतीक है और यह अब एक 'राष्ट्र मंदिर' बन चुका है।
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन मे कहा की 'घट-घटवासी राम' का संदेश देते हुए राम मंदिर से सामाजिक एकता और आध्यात्मिक भाव को मजबूत करने की अपील की।भगवान श्री राम को नमन करना भारत माता की सेवा करने के समान है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को भारतीय इतिहास का एक 'स्वर्णिम अध्याय' और राष्ट्र के पुनरुत्थान की शुरुआत बताया।
चैत्र नवरात्रि और आने वाली राम नवमी के पावन अवसर पर सभी को बधाई दी। राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना की और देश की समृद्धि व शांति के लिए कामना की। राम मंदिर में राम यंत्र की स्थापना की और कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया। उनका यह कार्यक्रम बेहद खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है। राष्ट्रपति का विशेष विमान महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरा, जिसके बाद वे सड़क मार्ग से राम मंदिर पहुंच। उत्सव जैसा माहौल बना और सुरक्षा के साथ-साथ स्वागत किया गया। श्रीराम यंत्र की स्थापना विधि-विधान से पूजा-अर्चना किया। साथ ही वे रामलला के दर्शन किया। यह धार्मिक कार्यक्रम पूरे देश के लिए खास महत्व रखता है और इसे ऐतिहासिक पल के रूप में देखा जा रहा है।
- श्रमिकों का सम्मान
इस दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उन श्रमिकों का सम्मान है, जिन्होंने राम मंदिर निर्माण में अपना योगदान दिया। राष्ट्रपति उनके कार्य की सराहना और उन्हें सम्मानित किया । यह कदम मंदिर निर्माण में लगे श्रमिकों के योगदान को पहचान देने के रूप में देखा जा रहा है। देशभर से 6000 से अधिक मेहमान अयोध्या पहुंच । पूरे शहर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। राष्ट्रपति का स्वागत आनंदीबेन पटेल और योगी आदित्यनाथ सहित राज्य सरकार के कई मंत्री और अधिकारी ने किया। जगह-जगह सांस्कृतिक मंच बनाए गए जहां लोक कलाकार अपने गीत और नृत्य के माध्यम से राष्ट्रपति का स्वागत किया।
- धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
राष्ट्रपति का यह दौरा धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जो देश की आस्था और संस्कृति को दर्शाता है। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन गुरुवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु रामनगरी पहुंचीं उनका भव्य स्वागत किया महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुष्पगुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।
महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने राष्ट्रपति का अभिवादन करते हुए उन्हें ‘नगर की चाबी’ भेंट की। यह सम्मान अतिथि को नगर की ओर से दिया जाने वाला सर्वोच्च प्रतीकात्मक सम्मान माना जाता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का अयोध्या का यह दूसरा दौरा है।सड़क के दोनों ओर करीब 20 सांस्कृतिक मंच सजाए गए थे, जहां लगभग 250 कलाकारों ने रामायण आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भारतीय वेशभूषा में कलाकारों ने स्वागत गीत, भजन, अवधी-भोजपुरी लोकगायन-लोकनृत्य समेत भारतीय संस्कृति से ओतप्रोत कार्यक्रमों के जरिए मन मोह लिया। राष्ट्रपति ने भी अयोध्यावासियों का अभिवादन किया। कार्यक्रम को और भव्य बनाने के लिए रामलीला के अंश, झांकियां, ढोल-नगाड़ा, शंखनाद, वेदपाठ और भजन-कीर्तन जैसी पारंपरिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं, जिससे अयोध्या की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली।
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