'बचत' की राह- उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का बड़ा फैसला- सरकारी बेड़े में 50 प्रतिशत कटौती और 'वर्क फ्रॉम होम' पर जोर

उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में भी मितव्ययिता के उपायों पर काम शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया है। दिल्ली में भी प्रशासनिक स्तर पर उन ख

May 13, 2026 - 09:01
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'बचत' की राह- उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का बड़ा फैसला- सरकारी बेड़े में 50 प्रतिशत कटौती और 'वर्क फ्रॉम होम' पर जोर
'बचत' की राह- उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का बड़ा फैसला- सरकारी बेड़े में 50 प्रतिशत कटौती और 'वर्क फ्रॉम होम' पर जोर
  • 'बचत' की राह पर देश: पीएम मोदी की अपील पर राज्यों ने कसी कमर, फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम
  • वैश्विक अनिश्चितता के बीच मितव्ययिता का नया दौर, ईंधन और बिजली बचाने के लिए अफसरों को सख्त निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के संसाधनों की बचत और मितव्ययिता (Austerity) बरतने की हालिया अपील ने पूरे भारत में एक नई प्रशासनिक हलचल पैदा कर दी है। पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक बाजार में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच, प्रधानमंत्री ने नागरिकों और राज्य सरकारों से संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का आह्वान किया था। इस अपील का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है। पीएम मोदी की इस पहल को राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। उनकी इस घोषणा के बाद से ही विभिन्न राज्यों ने अपने-अपने स्तर पर बचत के फॉर्मूले लागू करने शुरू कर दिए हैं, जिससे सरकारी कामकाज की शैली में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री की इस 'बचत' मुहिम को धरातल पर उतारने में सबसे पहले तत्परता दिखाई है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी खर्चों में तत्काल प्रभाव से कटौती की जाए। मुख्यमंत्री ने स्वयं मिसाल पेश करते हुए अपने काफिले और मंत्रियों के बेड़े में 50 प्रतिशत तक की कटौती करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, वरिष्ठ नौकरशाहों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे अनावश्यक वाहनों का उपयोग बंद करें। उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम न केवल ईंधन की बचत करेगा, बल्कि आम जनता के बीच भी मितव्ययिता का एक सकारात्मक संदेश प्रसारित करेगा। मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा है कि संसाधनों की बचत केवल एक आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों में राष्ट्र सेवा का एक रूप है। योगी सरकार ने ईंधन की खपत कम करने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) और वर्चुअल बैठकों को दोबारा प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शासन स्तर की कम से कम 50 प्रतिशत आंतरिक बैठकें अब ऑनलाइन माध्यम से ही संपन्न की जाएं। इससे न केवल अधिकारियों के आवागमन में लगने वाले ईंधन की बचत होगी, बल्कि समय का भी सदुपयोग हो सकेगा। सचिवालय और निदेशालय स्तर पर हाइब्रिड मॉडल लागू करने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें सप्ताह में दो दिन घर से काम करने की सुविधा दी जा सकती है। इसके अलावा, औद्योगिक घरानों और निजी संस्थानों से भी अपील की जा रही है कि वे अपने कर्मचारियों को डिजिटल माध्यमों से काम करने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो सके।

ऊर्जा संरक्षण के लिए नई गाइडलाइंस

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए बिजली की बचत हेतु नई नियमावली तैयार की है। इसके तहत सरकारी इमारतों में अनावश्यक लाइटिंग को बंद करने और रात 10 बजे के बाद होर्डिंग्स व सजावटी लाइटों पर रोक लगाने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' को मिशन मोड में चलाने का लक्ष्य रखा गया है।

उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में भी मितव्ययिता के उपायों पर काम शुरू हो गया है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी अपने आधिकारिक काफिले में वाहनों की संख्या सीमित करने का निर्णय लिया है। दिल्ली में भी प्रशासनिक स्तर पर उन खर्चों की समीक्षा की जा रही है जिन्हें फिलहाल टाला जा सकता है। राज्यों के बीच इस तरह की बचत की होड़ से यह स्पष्ट है कि केंद्र की इस अपील को बेहद गंभीरता से लिया गया है। प्रधानमंत्री ने स्वयं अपने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने और सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना सुरक्षा बेड़े को छोटा करने की पहल की है, जिसका अनुसरण अब देश के अन्य मुख्यमंत्री भी कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने केवल सरकारी स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से भी कुछ विशेष क्षेत्रों में बचत की अपील की है। उन्होंने विदेशी यात्राओं और विदेशों में होने वाली 'डेस्टिनेशन वेडिंग' को फिलहाल टालने का सुझाव दिया है ताकि विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को रोका जा सके। इसके विकल्प के रूप में प्रधानमंत्री ने 'वेड इन इंडिया' और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक किलों और पर्यटन स्थलों को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि स्थानीय कारीगरों, हस्तशिल्पियों और पर्यटन उद्योग को भी एक नई संजीवनी मिलेगी। आर्थिक मोर्चे पर इस 'बचत' अपील के तहत सोने की खरीदारी को कुछ समय के लिए टालने का सुझाव भी दिया गया है। भारत सोने का एक बड़ा आयातक है और इस पर बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। वैश्विक अस्थिरता के समय में इस तरह के आयात पर लगाम लगाना देश के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य माना जा रहा है। राज्य सरकारें अब अपने स्तर पर व्यापारियों और आम जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाने की योजना बना रही हैं। मुख्यमंत्री योगी ने स्वास्थ्य विभाग को भी निर्देश दिए हैं कि वे लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करें और खाद्य तेल जैसे आयातित उत्पादों के संतुलित उपयोग के लिए प्रेरित करें। प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है ताकि रसायनों और उर्वरकों पर निर्भरता कम की जा सके।

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