बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, पूर्व मुख्यमंत्री के भतीजे अभिषेक बनर्जी की 'जेड प्लस' सुरक्षा पूरी तरह वापस
अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा के इतिहास पर नजर डालें तो उन्हें साल 2015 के आसपास एक सार्वजनिक सभा के दौरान हुए हमले के बाद 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें 50 से अधिक सुरक्षाकर्मियों, बुलेटप्रूफ वाहनों और आधुनिक संचार उ
- सत्ता परिवर्तन के साथ ही सुरक्षा कवच में बड़ी कटौती, अब साधारण सांसद की तरह सुरक्षा घेरे में रहेंगे टीएमसी महासचिव
- मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नबन्ना में बुलाई उच्चस्तरीय बैठक, प्रशासनिक आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी की पायलट कार सुविधा भी खत्म
पश्चिम बंगाल की राजनीति में हालिया सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर बड़े और कड़े फैसलों का सिलसिला शुरू हो गया है। इसी कड़ी में राज्य की नई सरकार ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए उनकी 'जेड प्लस' (Z+) श्रेणी की सुरक्षा को पूरी तरह से वापस लेने का निर्णय लिया है। सोमवार को राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय 'नबन्ना' में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद यह आधिकारिक आदेश जारी किया गया। इस फैसले के बाद अब अभिषेक बनर्जी को मिलने वाला वह विशेष सुरक्षा कवच और प्रोटोकॉल पूरी तरह समाप्त हो गया है, जो पिछले एक दशक से अधिक समय से उनके साथ साये की तरह रहता था।
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी को अब केवल वही सुरक्षा प्रदान की जाएगी जो नियमों के मुताबिक एक साधारण सांसद को मिलनी चाहिए। सरकार के इस फैसले का सीधा असर उनकी सुरक्षा में तैनात रहने वाले जवानों की संख्या और उनके काफिले पर पड़ेगा। पिछले कई वर्षों से उनके साथ चलने वाली विशेष 'पायलट कार' की सुविधा भी अब तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई है। गौरतलब है कि राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा समीक्षा के बाद यह कदम उठाया गया है, जिसे सत्ता के गलियारों में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब उन्हें राज्य पुलिस की ओर से मिलने वाली अतिरिक्त सुरक्षा लेयर्स का लाभ नहीं मिलेगा। सोमवार का दिन पश्चिम बंगाल की नई सरकार के लिए काफी व्यस्तताओं भरा रहा, जिसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नबन्ना में कई महत्वपूर्ण दौर की बैठकें कीं। सबसे पहले उन्होंने एक व्यापक प्रशासनिक समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें राज्य की वर्तमान कानून-व्यवस्था और विभिन्न विभागों के कामकाज का जायजा लिया गया। इसके तुरंत बाद, मुख्यमंत्री ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ एक विस्तृत चर्चा की। बताया जा रहा है कि इसी बैठक के दौरान सुरक्षा प्राप्त व्यक्तियों (Protectees) की सूची पर मंथन हुआ और अंततः अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में कटौती करने के प्रस्ताव पर मुहर लगा दी गई।
अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा के इतिहास पर नजर डालें तो उन्हें साल 2015 के आसपास एक सार्वजनिक सभा के दौरान हुए हमले के बाद 'जेड प्लस' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई थी। उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें 50 से अधिक सुरक्षाकर्मियों, बुलेटप्रूफ वाहनों और आधुनिक संचार उपकरणों से लैस एक मजबूत सुरक्षा घेरा दिया गया था। हालांकि, अब नई सरकार का तर्क है कि सुरक्षा व्यवस्था का निर्धारण व्यक्तिगत राजनीतिक पद के बजाय वास्तविक खतरे के आकलन के आधार पर किया जाना चाहिए। समीक्षा बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि एक सांसद के नाते उन्हें मिलने वाली मानक सुरक्षा पर्याप्त है और अतिरिक्त राज्य संसाधनों का बोझ कम किया जाना चाहिए। सोमवार दोपहर जारी किए गए आदेश के तहत, अभिषेक बनर्जी के घर और दफ्तर के बाहर तैनात रहने वाले अतिरिक्त पुलिस पिकेट और बैरिकेड्स को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उनके काफिले में शामिल रहने वाली अत्याधुनिक तकनीकी गाड़ियाँ और पायलट वाहन अब पुलिस मुख्यालय में रिपोर्ट करेंगे। इसके अलावा, उनके निजी आवास पर तैनात रहने वाले विशेष कमांडो दस्ते को भी वापस बुला लिया गया है।
इस सुरक्षा कटौती के पीछे केवल प्रशासनिक कारण ही नहीं, बल्कि राज्य के खजाने पर पड़ने वाले बोझ को भी आधार बनाया गया है। नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री ने संकेत दिए थे कि वीआईपी कल्चर को कम किया जाएगा और पुलिस बल का अधिकतम उपयोग आम जनता की सुरक्षा के लिए होगा। इसी नीति के तहत, डायमंड हार्बर के सांसद को मिलने वाली विशेष सुविधाओं को कम किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि अब उनकी सुरक्षा व्यवस्था 'जेड प्लस' से घटाकर साधारण श्रेणी में ला दी गई है, जिसमें पुलिसकर्मियों की संख्या काफी सीमित होगी। यह घटनाक्रम राज्य में हो रहे व्यापक बदलावों का एक हिस्सा मात्र है। इससे पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके करीबियों की सुरक्षा की परिधि में कुछ बदलाव किए गए थे, लेकिन अभिषेक बनर्जी की 'जेड प्लस' सुरक्षा पूरी तरह हटाना अब तक का सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है। विपक्षी दलों के कार्यालयों और उनके नेताओं के आवासों के बाहर से पुलिस कियोस्क और स्कैनिंग मशीनें हटाने का काम पहले ही शुरू हो चुका था। अब प्रशासनिक आदेश के जरिए इसे आधिकारिक रूप दे दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले दिनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल में और भी कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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