'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद बौखलाए इस्लामाबाद ने भारत के जिन दो एयरबेस को तबाह करने का ढोंग रचा, वे नक्शे पर हैं ही नहीं।
पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे दुष्प्रचार और झूठे बयानों का एक ऐसा हास्यास्पद मामला
- झूठे और मनगढ़ंत दावों की खुली पोल, पाकिस्तान के सैन्य दावों की वैश्विक स्तर पर उड़ी धज्जियां
- राजौरी और मामून में भारतीय वायुसेना का कोई अड्डा न होने के बावजूद सैन्य अधिकारी ने टीवी पर उगला झूठ
पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे दुष्प्रचार और झूठे बयानों का एक ऐसा हास्यास्पद मामला सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी सैन्य समझ और खुफिया तंत्र का पूरी तरह से तमाशा बना दिया है। पिछले साल अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले के बाद, भारतीय सेनाओं ने सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम से एक बेहद आक्रामक और निर्णायक सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इस जवाबी कार्रवाई में भारतीय वायुसेना और मिसाइल रेजीमेंट ने पाकिस्तान के भीतर घुसकर आतंकी ठिकानों को जमींदोज कर दिया था, जिससे बौखलाकर पाकिस्तान ने भी भारत की तरफ कई मिसाइलें और ड्रोन दागे थे। अब इस पूरे घटनाक्रम के एक साल बीत जाने के बाद, पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने एक स्थानीय टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में दावा किया है कि उनकी सेना ने भारत के दो बेहद महत्वपूर्ण एयरबेस को पूरी तरह तबाह कर दिया था, लेकिन हकीकत यह है कि भारत में उस नाम के कोई एयरबेस अस्तित्व में ही नहीं हैं।
पाकिस्तान ने भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के जवाब में अपने रक्षात्मक और आक्रामक अभियान को 'ऑपरेशन बुनयान उल मरसूस' का नाम दिया था। इसी तथाकथित ऑपरेशन की सफलता की कहानियां गढ़ते हुए पाकिस्तानी सेना के कप्तान मुनीब जमाल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे खुलेआम सफेद झूठ बोलते नजर आ रहे हैं। पाकिस्तानी टीवी एंकर के साथ बातचीत के दौरान जब उनसे भारतीय ठिकानों पर की गई मिसाइल कार्रवाई की जमीनी हकीकत पूछी गई, तो उन्होंने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा कि उनकी यूनिट को भारत के 'राजौरी एयरबेस' और 'मामून एयरबेस' को निशाना बनाने की जिम्मेदारी मिली थी, जिसे उन्होंने पूरी तरह सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस बयान के सामने आते ही भारतीय रक्षा विश्लेषकों और रक्षा प्रेमियों ने पाकिस्तान के भौगोलिक ज्ञान का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया है, क्योंकि भारत की सामरिक सीमाओं के भीतर इस नाम का कोई भी ऑपरेशनल एयरबेस कभी रहा ही नहीं है।
भौगोलिक और सामरिक दृष्टिकोण से यदि इन दोनों स्थानों की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण किया जाए, तो पाकिस्तान के दावों का खोखलापन तुरंत साफ हो जाता है। राजौरी जिला केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के बिल्कुल पास स्थित एक बेहद संवेदनशील और भारी सैन्य तैनाती वाला इलाका जरूर है, जहां भारतीय थल सेना की मजबूत कोर और छावनी मौजूद है, लेकिन वहां भारतीय वायुसेना का कोई भी लड़ाकू हवाई अड्डा या रनवे मौजूद नहीं है। इसी प्रकार, मामून नामक स्थान पंजाब के पठानकोट जिले में स्थित भारतीय सेना का एक बहुत बड़ा मिलिट्री केंटोनमेंट (सैन्य छावनी) क्षेत्र है, न कि कोई वायुसेना का एयरबेस। हालांकि पठानकोट में भारतीय वायुसेना का एक बेहद रणनीतिक और बड़ा एयरबेस पहले से संचालित है, जिसका नाम पठानकोट एयरबेस है, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने अपने कागजी दावों में अपनी नाकामी को छिपाने के लिए मनगढ़ंत रूप से 'मामून एयरबेस' नाम का एक नया काल्पनिक अड्डा ही खोज निकाला, जिससे उनके झूठे दावों की पोल खुद-ब-खुद खुल गई।
सामरिक विफलता और जमीनी हकीकत:
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान जब पाकिस्तान ने भारत की सीमा में घुसने और नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से अपनी फतह-1 (Fatah-1) गाइडेड आर्टिलरी रॉकेट और मिसाइलें दागी थीं, तो भारत के अभेद्य और अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने उन सभी हवाई खतरों को हवा में ही नष्ट कर दिया था। पाकिस्तानी मिसाइलों के मलबे बाद में पंजाब के जालंधर, हरियाणा के सिरसा और राजस्थान के बाड़मेर के खेतों से बरामद हुए थे, जिससे यह साबित हो गया था कि पाकिस्तान का कोई भी वार अपने सही ठिकाने पर नहीं लग पाया था।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद वैश्विक रक्षा मंचों पर पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों और उनके कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम की भयंकर कमियों को लेकर चर्चाएं गर्म हैं। पाकिस्तानी अधिकारी ने इंटरव्यू के दौरान यह भी अजीबोगरीब दावा किया कि जब वे इन मिसाइलों को लॉन्च कर रहे थे, तो वहां आस-पास मौजूद स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति से उनके सैनिकों का हौसला बढ़ रहा था, जिसे वे 'कॉन्फिडेंस-बिल्डिंग' फैक्टर मान रहे थे। इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से यह साफ हो गया है कि पाकिस्तानी सेना युद्ध जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी अपने नागरिकों की जान को जोखिम में डालकर केवल पब्लिसिटी बटोरने और अपनी घरेलू जनता के सामने खुद को मजबूत दिखाने की हताश कोशिशों में जुटी हुई थी। हकीकत यह थी कि भारत की ब्रह्मोस और स्काल्प (SCALP) मिसाइलों ने पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस और रहीम यार खान एयरबेस पर बेहद सटीक प्रहार करके उनके रडार और कमांड सेंटरों को पूरी तरह पंगु बना दिया था, जिसके बाद पाकिस्तान के पास युद्धविराम के लिए गिड़गिड़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था।
भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से अपनी रक्षा नीति में एक बहुत बड़ा और युगांतकारी बदलाव पूरी दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है, जिसके तहत अब सीमा पार से होने वाली किसी भी बड़ी आतंकी गतिविधि को सीधे युद्ध की घोषणा माना जाता है। पिछले साल मई में चले इस 88 घंटे लंबे सैन्य टकराव के दौरान भारतीय वायुसेना ने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (ईडब्ल्यू) और सुखोई-30 एमकेआई (Su-30MKI) विमानों के जरिए पाकिस्तान के चीन निर्मित एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह से जाम कर दिया था। भारतीय सेना की ओर से स्पष्ट संदेश दिया जा चुका है कि अब आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को नष्ट करने के लिए किसी भी अंतरराष्ट्रीय सीमा का बंधन भारत को नहीं रोक पाएगा। इस भीषण मार से अपनी सेना का मनोबल टूटने से बचाने के लिए ही पाकिस्तानी सैन्य जनरलों द्वारा इस तरह के काल्पनिक और हास्यास्पद वीडियो इंटरव्यू प्रायोजित किए जा रहे हैं, ताकि वे अपनी जनता को यह विश्वास दिला सकें कि उन्होंने भी भारत को भारी नुकसान पहुंचाया था।
इस हास्यास्पद दावे के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भी पाकिस्तान की जमकर खिंचाई हो रही है, जहां लोग तंज कसते हुए कह रहे हैं कि पाकिस्तानी मिसाइलों ने राजौरी और मामून पर इतना तगड़ा हमला किया कि वे दोनों एयरबेस इस धरती से ही गायब हो गए और अब उन्हें ढूंढने के लिए गूगल मैप्स की मदद लेनी पड़ रही है। इस प्रकार के झूठ पाकिस्तान की पुरानी सैन्य संस्कृति का हिस्सा रहे हैं, जहां वे 1965, 1971 और कारगिल युद्ध के दौरान भी अपनी हार को अपनी जनता के सामने जीत की तरह पेश करते आए हैं। लेकिन आज के डिजिटल और सैटेलाइट युग में, जहां हर एक मिसाइल के गिरने का स्थान और उससे हुए नुकसान की तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक हो जाती हैं, वहां इस तरह के बचकाने दावे करना पाकिस्तानी सेना के पेशेवर रवैये पर एक बहुत बड़ा तमाचा है।
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