ट्विशा शर्मा मौत मामला-  'जो दुनिया में नहीं रहा, उसे मानसिक रोगी बताना बेहद शर्मनाक'; न्याय के लिए धरने पर बैठे माता-पिता।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में रहने वाली 33 वर्षीय पूर्व मिस पुणे कंटेस्टेंट और मॉडल ट्विशा शर्मा की

May 20, 2026 - 12:58
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ट्विशा शर्मा मौत मामला-  'जो दुनिया में नहीं रहा, उसे मानसिक रोगी बताना बेहद शर्मनाक'; न्याय के लिए धरने पर बैठे माता-पिता।
ट्विशा शर्मा मौत मामला-  'जो दुनिया में नहीं रहा, उसे मानसिक रोगी बताना बेहद शर्मनाक'; न्याय के लिए धरने पर बैठे माता-पिता।
  • ट्विशा शर्मा मौत मामले में नया मोड़, दिवंगत मॉडल के चरित्र हनन के आरोपों पर भड़के मायके वाले
  • ससुराल पक्ष के दावों को रिश्तेदारों ने बताया मनगढ़ंत कहानी, निष्पक्ष और दोबारा पोस्टमार्टम की उठाई मांग

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में रहने वाली 33 वर्षीय पूर्व मिस पुणे कंटेस्टेंट और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब बेहद गंभीर और कानूनी रूप से पेचीदा हो चुका है। नोएडा की रहने वाली ट्विशा का शव उनके भोपाल स्थित ससुराल में फंदे से लटका हुआ पाया गया था, जिसके बाद से ही मायके और ससुराल पक्ष के बीच गंभीर आरोपों का दौर शुरू हो गया है। इस पूरे दुखद घटनाक्रम में नया और विवादित मोड़ तब आया जब ससुराल पक्ष द्वारा दिवंगत ट्विशा के मानसिक स्वास्थ्य और उनकी जीवनशैली को लेकर कई तरह के गंभीर दावे किए गए। इन दावों को सुनते ही ट्विशा के माता-पिता और उनके तमाम रिश्तेदारों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। रिश्तेदारों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एक मृत इंसान को बदनाम करने और अपनी कानूनी कमियों को छिपाने की बेहद घिनौनी साजिश करार दिया है।

नोएडा से भोपाल पहुंची पीड़ित परिवार की पूरी टीम ने इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया है कि जो बेटी अब इस दुनिया में अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए मौजूद नहीं है, उसके चरित्र पर इस तरह के कीचड़ उछाले जा रहे हैं। शादी के महज पांच महीनों के भीतर ही एक हंसती-खेलती और सफल करियर वाली महिला का इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में चले जाना अपने आप में कई अनुत्तरित सवाल खड़े करता है। परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक ट्विशा जीवित थी, तब तक उसे लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और अब उसकी मौत के बाद भी उसे चैन से नहीं रहने दिया जा रहा है। ससुराल पक्ष द्वारा किए जा रहे इन हमलों ने पीड़ित परिवार के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है, जिससे समाज में इस मामले को लेकर आक्रोश और अधिक बढ़ गया है।

ससुराल पक्ष की ओर से, जो कि एक बेहद रसूखदार और कानूनी पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है, यह बात फैलाई जा रही थी कि ट्विशा गंभीर अवसाद और स्किज़ोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारियों से जूझ रही थीं। इसके साथ ही उन पर गर्भावस्था के दौरान प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के सेवन करने जैसे अत्यंत आपत्तिजनक आरोप भी मढ़े गए। इन तमाम बातों का पुरजोर खंडन करते हुए ट्विशा के पिता ने अपनी बेटी के पुराने ट्रैक रिकॉर्ड और उसकी शैक्षणिक योग्यताओं के प्रमाण पेश किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी बेटी हमेशा से बेहद मेधावी, कला जगत में सक्रिय और अपने करियर को लेकर पूरी तरह से सजग महिला थी। एक ऐसी महिला को अचानक मानसिक रूप से विक्षिप्त घोषित कर देना केवल कानूनी कार्रवाई से बचने का एक बेहद कमजोर और मनगढ़ंत पैंतरा है। ट्विशा और भोपाल के एक नामी वकील के बीच दिसंबर 2025 में प्रेम विवाह हुआ था, जिसकी शुरुआत एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। शादी के शुरुआती दिनों के बाद से ही दोनों के बीच वैचारिक मतभेद और काम के सिलसिले को लेकर तनाव की बातें सामने आने लगी थीं, जो धीरे-धीरे इस कदर बढ़ गईं कि अंततः एक होनहार जीवन का असमय अंत हो गया।

इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत एक छह सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है जो हर छोटे-बड़े पहलू की गहराई से मॉनिटरिंग कर रही है। पुलिस द्वारा की गई शुरुआती छानबीन और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल द्वारा जारी की गई प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना और फंदे से लटकना बताया गया है। हालांकि, मृतका के शरीर पर पाए गए कुछ अन्य बाहरी चोटों के निशानों ने इस पूरी थ्योरी को संदेहास्पद बना दिया है। यही वजह है कि पीड़िता के रिश्तेदारों ने वर्तमान जांच प्रक्रिया पर अविश्वास जताते हुए स्थानीय अदालत में एक याचिका दायर की है, जिसमें शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की गुहार लगाई गई है ताकि मौत के सटीक समय और परिस्थितियों का सच सामने आ सके।

कानूनी मोर्चे पर भी इस केस में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहे हैं, जहां मृतका के पति की अग्रिम जमानत याचिका को स्थानीय सत्र न्यायालय ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा है कि शादी के महज छह महीने के भीतर एक महिला की इस प्रकार अप्राकृतिक मौत होना और शुरुआती डिजिटल साक्ष्य जैसे व्हाट्सएप चैट का मिलना, सीधे तौर पर पति की भूमिका को संदेहास्पद बनाता है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद से ही आरोपी पति लगातार फरार चल रहा है, जिसकी गिरफ्तारी पर पुलिस प्रशासन द्वारा दस हजार रुपये के नकद इनाम की घोषणा भी की जा चुकी है। वहीं दूसरी ओर, आरोपी पक्ष के रसूख को देखते हुए पीड़ित परिवार को यह डर सता रहा है कि मामले के महत्वपूर्ण साक्ष्यों और डिजिटल सबूतों के साथ किसी भी समय छेड़छाड़ की जा सकती है।

ट्विशा की मां ने भी अपनी रुलाई रोकते हुए इस बात को पूरी मजबूती के साथ सामने रखा है कि उनके परिवार पर लगाए जा रहे वित्तीय निर्भरता या लालच के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से पूरी तरह से समृद्ध है और उन्हें कभी किसी बाहरी आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं रही, बल्कि इसके विपरीत ट्विशा को ही लगातार प्रताड़ित कर तंग किया जा रहा था। अपनी बेटी को खोने के गम में डूबा यह परिवार न्याय की आस में मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी धरने पर बैठ चुका है, जहां उन्हें निष्पक्ष जांच का पूरा आश्वासन मिला है। रिश्तेदारों ने यह चेतावनी भी दी है कि यदि इस मामले में रसूखदारों को बचाने के लिए सच को दबाने का प्रयास किया गया, तो वे इस लड़ाई को देश की सबसे बड़ी अदालत तक लेकर जाएंगे।

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