हवा में बिजली के तारों में उलझकर क्रैश हुआ हेलीकॉप्टर, सवार सभी श्रद्धालु और पायलट सुरक्षित, श्रद्धालुओं ने जताया दिव्य शक्ति का आभार।
उत्तराखंड के देवभूमि स्वरूप को एक बार फिर से साक्षात प्रमाण मिला है, जब टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां
- मां सुरकंडा देवी का साक्षात चमत्कार, टिहरी गढ़वाल की पहाड़ियों में टला बड़ा हादसा, हादसे के बाद क्षेत्र में गूंज उठा मां का जयकारा
उत्तराखंड के देवभूमि स्वरूप को एक बार फिर से साक्षात प्रमाण मिला है, जब टिहरी गढ़वाल जिले में स्थित प्रसिद्ध सिद्धपीठ मां सुरकंडा देवी मंदिर के समीप एक बहुत बड़ा हवाई हादसा होते-होते रह गया। पहाड़ी क्षेत्र में अचानक मौसम बदलने और दृश्यता कम होने के कारण श्रद्धालुओं को ले जा रहा एक हेलीकॉप्टर हवा में झूल रहे बिजली के भारी-भरकम तारों की चपेट में आ गया। तारों से टकराने के बाद हेलीकॉप्टर का संतुलन पूरी तरह से बिगड़ गया और वह तेज आवाज के साथ अनियंत्रित होकर सीधे जमीन की तरफ गिर गया। इस भयानक दृश्य को देखकर जमीन पर मौजूद स्थानीय लोग और अन्य श्रद्धालु डर के मारे चीखने लगे, लेकिन जैसे ही हेलीकॉप्टर जमीन से टकराया, वहां एक ऐसा चमत्कार देखने को मिला जिसने विज्ञान और इंसानी सोच को हैरान कर दिया। दुर्घटना की विभीषिका को देखते हुए जहां मलबे और भारी नुकसान की आशंका थी, वहीं हेलीकॉप्टर में सवार एक भी व्यक्ति को खरोंच तक नहीं आई।
हेलीकॉप्टर ने सुबह के समय अपनी नियमित उड़ान भरी थी और इसमें सवार सभी यात्री मां सुरकंडा देवी के दर्शन करने के उद्देश्य से मंदिर परिसर की ओर बढ़ रहे थे। सुरकंडा देवी का यह पावन धाम अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित है, जहां पहुंचने के लिए हाल के वर्षों में हेलीकॉप्टर सेवा एक बेहद लोकप्रिय माध्यम बन चुकी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब हेलीकॉप्टर अपने निर्धारित लैंडिंग पैड से कुछ ही दूरी पर था, तभी अचानक हवा के तेज झोंके और पहाड़ियों के बीच फैले तारों के जाल के कारण पायलट का नियंत्रण विमान पर से कम हो गया। मुख्य रोटर ब्लेड बिजली के हाई-टेंशन तारों में पूरी तरह से उलझ गए, जिससे तेज चिंगारियां उठीं और हेलीकॉप्टर का इंजन पूरी तरह से ठप हो गया। इसके बाद हेलीकॉप्टर सीधे नीचे खाई की तरफ न जाकर एक समतल ढलान पर क्रैश-लैंड हो गया, जिसे देखकर लोग इसे मां सुरकंडा देवी की असीम अनुकंपा मान रहे हैं।
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस बल और मंदिर प्रबंधन की रेस्क्यू टीमें तुरंत घटना स्थल की ओर दौड़ पड़ीं। पहाड़ी रास्ता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियां होने के बावजूद राहत कर्मियों ने रिकॉर्ड समय में मलबे के पास पहुंचकर राहत कार्य शुरू कर दिया। जब बचाव दल हेलीकॉप्टर के पास पहुंचा, तो वे यह देखकर दंग रह गए कि केबिन के परखच्चे उड़ने और रोटर ब्लेड के पूरी तरह टूट जाने के बाद भी अंदर बैठे यात्री पूरी तरह शांत और सुरक्षित थे। आपातकालीन द्वारों को खोलकर सभी यात्रियों और पायलट को एक-एक करके सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान चिकित्सा टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया था, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य जांच में पाया गया कि किसी भी यात्री को कोई गंभीर अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं आई है, जिसके बाद सभी ने राहत की सांस ली। बिजली के तारों में उलझने के तुरंत बाद हेलीकॉप्टर का ऑटो-रोटेशन सिस्टम सक्रिय हो गया था, जिसने जमीन पर गिरने की गति को काफी हद तक धीमा कर दिया। पहाड़ी ढलान पर मौजूद घनी झाड़ियों और देवदार के पेड़ों ने भी हेलीकॉप्टर को सीधे पत्थरों से टकराने से बचाया, जिससे एक बड़ा विस्फोट होने से टल गया।
इस अद्भुत घटना के बाद पूरे सुरकंडा देवी मंदिर परिसर और आस-पास के गांवों में भक्ति का माहौल और गहरा हो गया है। मंदिर में मौजूद पुजारियों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह क्षेत्र मां सती के पावन अंगों के गिरने से बना एक जागृत सिद्धपीठ है, जहां भक्तों की रक्षा स्वयं देवी मां करती हैं। दुर्घटना का शिकार हुए यात्रियों ने बाहर आते ही सबसे पहले मंदिर की दिशा में हाथ जोड़कर शीश नवाया और मां के जयकारे लगाने शुरू कर दिए। वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में आंसू थे और वे इस बात को स्वीकार कर रहे थे कि आज अगर कोई दैवीय शक्ति उनके साथ नहीं होती, तो इस तरह के क्रैश में जीवित बचना नामुमकिन था। इस घटना ने लोगों के मन में उत्तराखंड के पहाड़ी तीर्थस्थलों और वहां की आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रति विश्वास को और ज्यादा सुदृढ़ कर दिया है।
दुर्घटना के तकनीकी कारणों को समझने के लिए नागरिक उड्डयन विभाग और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि पहाड़ी क्षेत्रों में उड्डयन के लिए तय किए गए मानकों और तारों की मैपिंग में कुछ विसंगतियां थीं, जिसके कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। जांच दल ने घटना स्थल से डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर को अपने कब्जे में ले लिया है ताकि हादसे के ठीक पहले के पलों का सटीक विश्लेषण किया जा सके। इसके साथ ही, इस रूट पर चलने वाली सभी अस्थाई हेलीकॉप्टर सेवाओं को जांच पूरी होने तक के लिए रोक दिया गया है। प्रशासन का मुख्य ध्यान अब इस बात पर है कि भविष्य में चारधाम यात्रा और अन्य पर्वतीय धार्मिक यात्राओं के दौरान इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जा सके। इस क्रैश के बाद उत्तराखंड सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में संचालित होने वाले सभी हेलीपैड्स और उनके आस-पास फैले बिजली व संचार के तारों की सुरक्षा समीक्षा करने का एक बड़ा निर्णय लिया है। मुख्य उड्डयन मार्गों के आस-पास मौजूद सभी हाई-टेंशन लाइनों को भूमिगत करने या उनकी ऊंचाई को और बढ़ाने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पायलटों के लिए भी एक नई गाइडलाइन जारी की जा रही है, जिसके तहत खराब मौसम या कम दृश्यता की स्थिति में तुरंत उड़ान रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, सभी ऑपरेटरों को अपने विमानों की तकनीकी फिटनेस का हर उड़ान से पहले दोबारा कड़ा परीक्षण करने को कहा गया है, ताकि यांत्रिक खराबी की गुंजाइश को शून्य किया जा सके।
What's Your Reaction?




