महाराष्ट्र के वसई में एटीएम मशीन में अचानक आई बड़ी तकनीकी खराबी, 100 रुपये की जगह हाथ में आने लगे 500 के नोट।

महाराष्ट्र के पालघर जिले के अंतर्गत आने वाले वसई उपनगर से एक बेहद ही हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने

May 18, 2026 - 14:08
May 18, 2026 - 14:08
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महाराष्ट्र के वसई में एटीएम मशीन में अचानक आई बड़ी तकनीकी खराबी, 100 रुपये की जगह हाथ में आने लगे 500 के नोट।
महाराष्ट्र के वसई में एटीएम मशीन में अचानक आई बड़ी तकनीकी खराबी, 100 रुपये की जगह हाथ में आने लगे 500 के नोट।
  • मशीन से अतिरिक्त पैसे निकलने की खबर फैलते ही नकदी निकालने के लिए उमड़ी लोगों की भारी भीड़, सूचना मिलते ही सुरक्षाकर्मियों ने शटर गिराकर बंद कराई सेवा
  • संबंधित बैंक प्रबंधन और तकनीकी विभाग ने शुरू की गड़बड़ी के कारणों की विस्तृत जांच, पूरे वाकये का वित्तीय ऑडिट होने के बाद ही दोबारा बहाल होगी एटीएम सेवा

महाराष्ट्र के पालघर जिले के अंतर्गत आने वाले वसई उपनगर से एक बेहद ही हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और बैंकिंग क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। वसई के एक बेहद व्यस्त रिहायशी और व्यावसायिक इलाके में स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक के ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एटीएम) में अचानक एक ऐसी गंभीर तकनीकी खराबी आ गई, जिसके बाद मशीन ने तय नियमों के विपरीत काम करना शुरू कर दिया। इस खराबी के कारण जब कोई खाताधारक मशीन से सौ रुपये निकालने की कमान दे रहा था, तो मशीन से सौ रुपये के बजाय पांच सौ रुपये के नोट बाहर आ रहे थे। इस बात की जानकारी जैसे ही आस-पास के लोगों को हुई, वहां अप्रत्याशित रूप से नकदी निकालने वालों का तांता लग गया, जिससे बैंकिंग सुरक्षा और सॉफ्टवेयर प्रणालियों की विश्वसनीयता पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।

इस पूरी घटना की पृष्ठभूमि और शुरुआती घटनाक्रम को यदि विस्तार से देखें तो यह वाकया सुबह के समय शुरू हुआ जब एक आम नागरिक अपनी जरूरत के लिए पैसे निकालने इस एटीएम बूथ के भीतर दाखिल हुआ। उसने मशीन के कीपैड पर सौ रुपये की राशि दर्ज की और अपनी प्रक्रिया पूरी की। नियमानुसार मशीन से सौ रुपये का एक नोट बाहर आना चाहिए था, लेकिन जैसे ही कैश डिस्पेंसर स्लॉट खुला, उसमें से पांच सौ रुपये का कड़कड़ाता हुआ नोट बाहर आया। शुरुआत में उस ग्राहक को लगा कि शायद उसने गलती से अधिक राशि दर्ज कर दी होगी, लेकिन जब उसने अपने मोबाइल पर आए बैंक के संदेश और रसीद की जांच की, तो उसमें केवल सौ रुपये कटने की ही पुष्टि की गई थी। इस अनोखी बात से हैरान होकर उसने दोबारा प्रयास किया और हर बार मशीन से तय राशि से पांच गुना अधिक पैसे बाहर आने लगे।

इस चमत्कारी और अप्रत्याशित घटना की भनक जैसे ही उस व्यक्ति के माध्यम से आस-पास के दुकानदारों, ऑटोरिक्शा चालकों और राहगीरों को लगी, यह खबर पूरे वसई इलाके में जंगल की आग की तरह फैल गई। कुछ ही मिनटों के भीतर उस छोटे से एटीएम के बाहर लोगों की एक बहुत लंबी कतार लग गई, जो आम दिनों में बेहद कम दिखाई देती थी। लोग अपने डेबिट कार्ड लेकर जल्द से जल्द मशीन के भीतर घुसने की जद्दोजहद करने लगे ताकि वे भी इस तकनीकी खराबी का फायदा उठाकर अतिरिक्त पैसे हासिल कर सकें। इस दौरान सोशल मीडिया और स्थानीय मैसेजिंग ऐप्स के जरिए भी यह संदेश तेजी से प्रसारित होने लगा कि उक्त स्थान पर स्थित एटीएम मुफ्त में पांच गुना पैसे बांट रहा है, जिससे वहां कानून व्यवस्था और भीड़ को नियंत्रित करने की गंभीर चुनौती पैदा हो गई।

भीड़ और हंगामे की स्थिति को देखते हुए पास में तैनात सुरक्षा गार्ड और स्थानीय दुकानदारों को किसी अनहोनी की आशंका हुई, जिसके बाद उन्होंने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए इस बात की जानकारी संबंधित बैंक के शाखा प्रबंधक और नजदीकी पुलिस स्टेशन को दी। सूचना मिलते ही बैंक के सुरक्षा अधिकारी और पुलिस की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सुरक्षाकर्मियों ने सबसे पहले एटीएम बूथ के भीतर मौजूद लोगों को बाहर निकाला और मशीन का मुख्य बिजली संपर्क काटकर शटर को पूरी तरह से नीचे गिरा दिया। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एटीएम के बाहर जुटी उत्सुक भीड़ को वहां से खदेड़ा, तब जाकर कहीं स्थिति सामान्य हो सकी और एक बहुत बड़ी वित्तीय क्षति को समय रहते रोका जा सका।

बैंकिंग और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के दृष्टिकोण से इस तरह की गड़बड़ियों के पीछे कई तकनीकी कारण जिम्मेदार होते हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है। प्रारंभिक आकलनों के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से दो कारणों से उत्पन्न हो सकती है। पहला कारण एटीएम मशीन के भीतर नकदी रखने वाले बॉक्स, जिन्हें 'कैश कैसेट्स' कहा जाता है, की लोडिंग के समय हुई मानवीय भूल हो सकती है। अक्सर निजी कैश हैंडिंग एजेंसियां जब मशीन में पैसे लोड करती हैं, तो गलती से सौ रुपये वाले कैसेट स्लॉट में पांच सौ रुपये के नोटों का बंडल रख दिया जाता है। चूंकि मशीन का सॉफ्टवेयर केवल कमान के आधार पर नोटों की गिनती करता है, इसलिए वह सौ का नोट समझकर पांच सौ का नोट बाहर फेंकने लगता है। दूसरा कारण एटीएम के मुख्य सर्वर या उसके आंतरिक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम में आया कोई नया बग या वायरस हो सकता है, जो गणना की प्रणालियों को बाधित कर देता है। बैंकिंग लोकपाल और भारतीय रिजर्व बैंक के कड़े नियमों के अनुसार, एटीएम में आई किसी भी तकनीकी खराबी का लाभ उठाकर निकाली गई अतिरिक्त राशि पर कानूनी रूप से ग्राहक का कोई अधिकार नहीं होता है। बैंक के पास प्रत्येक लेन-देन का डिजिटल लॉग, समय और सीसीटीवी फुटेज मौजूद रहता है, जिसके आधार पर बैंक अतिरिक्त पैसे निकालने वाले खाताधारकों की पहचान कर सकता है। खाताधारकों को यह राशि हर हाल में बैंक को वापस लौटानी होगी, अन्यथा उनके खिलाफ धोखाधड़ी और अवैध रूप से धन रखने का आपराधिक मामला भी दर्ज किया जा सकता है।

इस घटना के बाद संबंधित बैंक के मुख्य कूटनीतिक और तकनीकी विभाग ने मामले को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लिया है और एक विशेष ऑडिट टीम को जांच के काम पर लगाया गया है। तकनीकी विशेषज्ञों की यह टीम मशीन के पूरे हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की सघन मैपिंग कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गड़बड़ी के दौरान कुल कितने लोगों ने पैसे निकाले और बैंक को वास्तविक रूप से कितने रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ है। बैंक के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन भी खाताधारकों के खातों से कम पैसे कटे हैं और उन्होंने अधिक नकदी प्राप्त की है, उनके विवरण निकाल लिए गए हैं और उन्हें जल्द ही नोटिस जारी कर पैसे वापस करने को कहा जाएगा। मशीन की पूरी तकनीकी ओवरहॉलिंग और सुरक्षा प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही इस एटीएम सेवा को आम जनता के लिए दोबारा बहाल किया जाएगा।

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