Special Article: भाजपा समग्र हिंदुत्व पर ही लड़ेगी उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई। 

पश्चिम बंगाल की विजय से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारियां प्रांरभ कर दी हैं। बंगाल

By INA News Desk
May 15, 2026 - 18:49
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Special Article: भाजपा समग्र हिंदुत्व पर ही लड़ेगी उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई। 
भाजपा समग्र हिंदुत्व पर ही लड़ेगी उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई। 

लेखक: मृत्युंजय दीक्षित 

पश्चिम बंगाल की विजय से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारियां प्रांरभ कर दी हैं। बंगाल से स्पष्ट  जनादेश आ जाने के बाद भाजपा की स्थिति मजबूत हो गई है। समाजवादी पार्टी एसआईआर, चुनाव आयोग व ईवीएम के खिलाफ वातावरण बनाने में लग गई है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि बंगाल में टीएमसी की हार के बाद यूपी में विरोधी दल अभी से  पराजय का बहाना खेाज रहे हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी फ्रंटफुट पर आकर बल्लेबाजी कर रही है। भाजपा  ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ही चुनाव मैदान में उतरने का निर्णय किया है और संगठन को उसी के अनुसार तैयार  किया जा रहा है।  बंगाल की की ही तरह भाजपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी रणनीति को धार देना आरम्भ कर दिया है। 

बंगाल के चुनाव प्रचार में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री येागी आदित्यनाथ की जनसभाओं में भारी भीड़ आ रही थी तथा उनका स्ट्राइक रेट 90 प्रतिशत रहा है। यही कारण है कि भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन्हें आगामी विधान सभा चुनावों  के लिए भाजपा का चेहरा घोषित कर दिया है। 
बंगाल में नयी सरकार के शपथ ग्रहण के बाद ही प्रदेश में बहुप्रतिक्षित मंत्रिपिरिषद का विस्तार हो गया है। भाजपा ने इस मंत्रिमंडल विस्तार के सहारे जातीय व क्षेत्रीय संतुलन साधने का प्रयास किया है। सपा की पीडीए की धार को कुंद करने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार में पिछड़े और दलित समाज के प्रतिनिधियों को कहीं अधिक प्रतिनिधित्व दिया है। भाजपा ने ओबीसी समाज से तीन और मंत्री बनाने के साथ ही दो को प्रोन्नत भी किया गया है। दलित समाज से भी दो मंत्री बनाए गए हैं। पूरब से पश्चिम तक को साधा गया है। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित 60 मंत्री हो गए हैं। जिसमें 60 प्रतिशत ओबीसी व दलित समाज है। क्षत्रिय व वैश्य समाज की भगीदारी  यथावत है । यूजीसी के कारण सवर्ण समाज की नाराजगी को दूर करने के लिए मनोज पांडेय  को मंत्री बनाया है वह सपा से भाजपा में आए थे।  मंत्रिपरिषद मे पहली बार वाल्मीकि और पासी समाज के सदस्यों को प्रतिनिधित्व दिया गया है, सपा और बसपा दोनो की ही नजर इस वोट बैंक पर रहती है। 

भाजपा ने इस मंत्रिपरिषद विस्तार के माध्यम से समग्र हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने का प्रयास किया है। बिना कोई बड़ा बदलाव किए जिस प्रकार मंत्रिमंडल विस्तार हुआ है और जिन चेहरों को शामिल किया गया है वह बताता है कि भाजपा ने  विधानसभा चुनाव में  भरोसे और एकजुटता के संदेश के साथ आगे बढ़ने का निर्णय कर लिया है। मंत्रिमंडल विस्वार में निष्ठा को पुरस्कार व हिंदू एकता का फार्मूला दिखाई पड़ रहा है। भाजपा ने यह संदेश देने का स्पष्ट प्रयास किया है कि भाजपा ही पूरे हिंदू समाज का प्रतिनिधित्व करती है। लोकसभा चुनाव मे विपक्ष ने भले ही संविधान बदलने और आरक्षण पर भ्रम फैलाकर बढ़त बना ली हो किंतु अब भजपा खुद को ऐसी पार्टी  के रूप मे प्रस्तुत कर रही है जो विभिन्न जातियों की भागीदारी के साथ व्यापक हिंदू एकता के भाव से आगे बढ़ रही है। 

मंत्री परिषद व संगठन विस्तार के साथ ही अब प्रदेश सरकार अनेक योजनाओं के  शिलान्यास व लोकार्पण व्यापक सिलसिला आरम्भ करने जा रही है, जिनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर अनेक केंद्रीय मंत्री तक शामिल होंगे। अगर बंगाल की ही तरह यूपी का हिंदू एकजूट हो गया तो सपा का पीडीए ध्वस्त हो जाएगा अतः आने वाले समय में सपा हिन्दू समाज को तोड़ने वाले मसले उभार सकती है। 

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