Hapur: गढ़मुक्तेश्वर में अवैध कॉलोनियों का जाल: भूमाफिया सक्रिय, प्रशासन पर उठे सवाल। 

हापुड़ जनपद की तहसील गढ़मुक्तेश्वर में अवैध कॉलोनियों का विस्तार अब एक गंभीर प्रशासनिक और आर्थिक समस्या का रूप ले

May 1, 2026 - 21:20
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Hapur: गढ़मुक्तेश्वर में अवैध कॉलोनियों का जाल: भूमाफिया सक्रिय, प्रशासन पर उठे सवाल। 
गढ़मुक्तेश्वर में अवैध कॉलोनियों का जाल: भूमाफिया सक्रिय, प्रशासन पर उठे सवाल। 

हापुड़ जनपद की तहसील गढ़मुक्तेश्वर में अवैध कॉलोनियों का विस्तार अब एक गंभीर प्रशासनिक और आर्थिक समस्या का रूप ले चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि भूमि को तेजी से छोटे-छोटे प्लॉटों में तब्दील किया जा रहा है, जिसमें भूमाफिया और प्रॉपर्टी दलालों की सक्रिय भूमिका सामने आ रही है। किसानों से कम कीमत पर जमीन खरीदकर उसे कई गुना अधिक दरों पर बेचने का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे न केवल राजस्व को नुकसान हो रहा है बल्कि आम नागरिक भी ठगी का शिकार बन रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र में लगभग 50 बीघा भूमि पर एक अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक उक्त कॉलोनी हापुड़ निवासी हाजी राशिद की बताई जा रही है। इस कॉलोनी के लिए न तो किसी प्रकार की वैधानिक स्वीकृति ली गई है और न ही बुनियादी सुविधाओं के लिए आवश्यक मानकों का पालन किया जा रहा है। इसके बावजूद प्लॉटों की बिक्री खुलेआम जारी है। यह स्थिति हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है, जो नियमानुसार ऐसी गतिविधियों की निगरानी और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार है।

बिजली विभाग की भूमिका भी इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। बिना स्वीकृत लेआउट वाली कॉलोनियों में बिजली के खंभे लगाए जा रहे हैं और कनेक्शन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जबकि नियमानुसार ऐसा करना अवैध है। इससे यह आशंका बलवती होती है कि विभागीय स्तर पर या तो लापरवाही बरती जा रही है या फिर नियमों की अनदेखी कर इन अवैध गतिविधियों को अप्रत्यक्ष समर्थन दिया जा रहा है।
अवैध प्लाटिंग का सबसे गंभीर प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ता है। लोग अपनी जीवनभर की बचत लगाकर इन कॉलोनियों में प्लॉट खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में जब प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जाती है और बुलडोजर चलता है, तो वे असहाय होकर सड़कों पर आ जाते हैं। दूसरी ओर, इस पूरे खेल के मुख्य संचालक भूमाफिया और दलाल पहले ही भारी मुनाफा कमाकर बाहर निकल जाते हैं, जिससे पीड़ितों को न्याय मिलना और भी कठिन हो जाता है।
यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है कि इस प्रकार की अवैध प्लाटिंग से सरकार को मिलने वाला राजस्व प्रभावित होता है। स्टांप शुल्क और अन्य करों की चोरी के माध्यम से लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई का अभाव चिंताजनक है। प्रशासनिक तंत्र की यह निष्क्रियता कहीं न कहीं इन अवैध गतिविधियों को बढ़ावा देती प्रतीत होती है।

अब सभी की निगाहें नवनियुक्त जिलाधिकारी कविता मीणा पर टिकी हैं। यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेते हुए सख्त और प्रभावी कदम उठाएंगी। यदि समय रहते अवैध कॉलोनियों पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह समस्या और विकराल रूप धारण कर सकती है। आवश्यक है कि विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि आम जनता के हितों की रक्षा हो सके और कानून का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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