यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बिछने लगी सियासी बिसात: मुस्लिम महिला वोट बैंक पर कब्जे की मची होड़।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट अभी से सुनाई देने लगी है और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को

May 1, 2026 - 16:53
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यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बिछने लगी सियासी बिसात: मुस्लिम महिला वोट बैंक पर कब्जे की मची होड़।
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए बिछने लगी सियासी बिसात: मुस्लिम महिला वोट बैंक पर कब्जे की मची होड़।
  • AIMIM का समाजवादी पार्टी पर बड़ा हमला: इसरार अहमद ने अखिलेश यादव और भाजपा के बीच 'गुप्त समझौते' का लगाया आरोप
  • आरक्षण के वादे और सियासी हकीकत: पूर्वांचल में एआईएमआईएम ने सपा की घेराबंदी कर मुस्लिम मतदाताओं को चेताया

By Saurabh Singh(News Editor & Senior Journalist)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 की आहट अभी से सुनाई देने लगी है और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में सबसे अधिक ध्यान महिला और मुस्लिम महिला वोट बैंक पर केंद्रित है, जिसे आने वाले चुनाव में निर्णायक माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी जहाँ महिला आरक्षण कानून के कार्यान्वयन और इसके प्रचार-प्रसार के जरिए आधी आबादी के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्षी खेमे में इस वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए जबरदस्त खींचतान मची है। सत्ताधारी दल का मानना है कि मुस्लिम महिलाओं के बीच केंद्र सरकार की योजनाओं और हालिया कानूनी सुधारों ने सुरक्षा का भाव पैदा किया है, जिसे अब चुनावी लाभ में बदलने की तैयारी है। इसी उद्देश्य के साथ भाजपा ने अपने महिला मोर्चा को विशेष रूप से सक्रिय रहने के निर्देश दिए हैं। इस चुनावी सुगबुगाहट के बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी आक्रामक बयानबाजी से सूबे का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। एआईएमआईएम के पूर्वांचल अध्यक्ष इसरार अहमद ने सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को अपने निशाने पर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक अदृश्य तालमेल है, जहाँ दोनों दल एक-दूसरे को लाभ पहुँचाने के लिए मिलकर काम करते हैं। इसरार अहमद ने इस मिलीभगत के दावे को पुख्ता करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन पुराने बयानों का सहारा लिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि अखिलेश यादव कई महत्वपूर्ण मौकों पर उनका सहयोग करते हैं। एआईएमआईएम नेता के अनुसार, यह सपा की दोहरी राजनीति का सबसे बड़ा प्रमाण है जो केवल भाजपा को सत्ता में बनाए रखने का मार्ग प्रशस्त करती है।

पूर्वांचल की राजनीति में प्रभाव रखने वाले एआईएमआईएम नेता ने अखिलेश यादव पर मुस्लिम समुदाय के साथ वादाखिलाफी करने का गंभीर आरोप जड़ा है। उन्होंने अतीत के पन्नों को पलटते हुए यह मुद्दा उठाया कि जब समाजवादी पार्टी की सरकार प्रदेश में बनी थी, तब उनके चुनावी घोषणापत्र में मुसलमानों को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में 18 प्रतिशत आरक्षण देने का बड़ा वादा किया गया था। इसरार अहमद ने सवाल किया कि पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बावजूद सपा ने इस दिशा में एक भी कदम क्यों नहीं उठाया। उनके अनुसार, सत्ता का स्वाद चखते ही सपा नेतृत्व ने उन मतदाताओं को हाशिए पर धकेल दिया, जिन्होंने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया था। अब जब आगामी चुनावों में पार्टी को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है, तब वे फिर से मुस्लिम महिलाओं और अल्पसंख्यकों के नाम पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।

  • मुस्लिम महिला वोट बैंक का महत्व

उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम महिला मतदाता अब एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में उभर रही हैं। ट्रिपल तलाक पर पाबंदी और उज्ज्वला जैसी योजनाओं के बाद इस वर्ग के वोटिंग पैटर्न में बदलाव के संकेत मिले हैं। यही कारण है कि भाजपा उन्हें सुरक्षा का भरोसा दे रही है, जबकि एआईएमआईएम और सपा उन्हें अपने पारंपरिक खेमे में बनाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। एआईएमआईएम का आरोप है कि समाजवादी पार्टी केवल चुनाव के समय ही मुसलमानों की हितैषी होने का ढोंग करती है। इसरार अहमद ने अपनी जनसभाओं में यह बात जोर-शोर से उठाई है कि जब भी मुस्लिम समुदाय पर कोई संकट आया या उनके अधिकारों की बात हुई, तब सपा नेतृत्व ने चुप्पी साध ली। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव अब मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण की बात केवल वोट पाने के लिए कर रहे हैं, जबकि हकीकत में उनकी पार्टी ने कभी भी इस वर्ग को नेतृत्व करने का वास्तविक अवसर प्रदान नहीं किया। एआईएमआईएम का दावा है कि सपा की इस 'छद्म धर्मनिरपेक्षता' के कारण ही प्रदेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति दयनीय बनी हुई है और अब समय आ गया है कि मतदाता सपा के 'वोट बैंक' की गुलामी से बाहर निकलकर अपना स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प चुनें।

राजनीतिक रणनीतियों की इस कड़ी में भाजपा की योजना भी काफी व्यापक है। भाजपा मुस्लिम महिलाओं के बीच उन योजनाओं का प्रचार कर रही है जिनसे उनके जीवन स्तर में सुधार आया है। महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को भाजपा एक ऐसे हथियार के रूप में देख रही है, जो उसे उन क्षेत्रों में भी वोट दिला सकता है जहाँ पारंपरिक रूप से उसकी पकड़ कमजोर रही है। भाजपा का मानना है कि मुस्लिम महिलाएं अब पुरुष प्रधान मतदान के बजाय अपनी मर्जी और हितों के आधार पर वोट डालने की ओर बढ़ रही हैं। इस वर्ग को साधने के लिए भाजपा ने 'सूफी संवाद' और अन्य आउटरीच कार्यक्रमों के जरिए अपनी पहुंच बढ़ाने का लक्ष्य रखा है, जिससे विपक्षी दलों के भीतर अपनी वोट बैंक की सुरक्षा को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी की ओर से भी इन हमलों का जवाब देने की तैयारी की जा रही है, लेकिन एआईएमआईएम की सक्रियता उनके लिए पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी में बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। अखिलेश यादव ने हाल के दिनों में अपने बयानों में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का फॉर्मूला सामने रखा है, ताकि वे सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरो सकें। हालांकि, इसरार अहमद का तर्क है कि 'पीडीए' केवल एक चुनावी नारा है जिसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा ने हमेशा ही अल्पसंख्यकों का उपयोग केवल सीढ़ी के रूप में किया है और सत्ता मिलने पर मलाईदार पदों से उन्हें दूर रखा है। यह लड़ाई अब केवल विकास की नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व और विश्वास की लड़ाई बनती जा रही है।

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