Sambhal: 600 साल पुरानी दरगाह पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, उर्स-ए-पाक में गूंज रही कव्वालियां

सम्भल के चौधरी सराय स्थित हजरत दादा फखरुद्दीन शाह चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की करीब 600 साल पुरानी दरगाह पर

Jun 10, 2026 - 18:51
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Sambhal: 600 साल पुरानी दरगाह पर उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब, उर्स-ए-पाक में गूंज रही कव्वालियां
मौहम्मद शाहिद, मस्जिद इमाम

उवैस दानिश, सम्भल

सम्भल के चौधरी सराय स्थित हजरत दादा फखरुद्दीन शाह चिश्ती रहमतुल्ला अलैह की करीब 600 साल पुरानी दरगाह पर इन दिनों उर्स-ए-पाक पूरे अकीदत और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। उर्स के मौके पर दूर-दराज़ इलाकों से बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह पहुंच रहे हैं और दरबार में हाज़िरी लगाकर अपनी मुरादों के लिए दुआएं कर रहे हैं।

उर्स की रस्मों के तहत 9 जून को लंगर का आयोजन किया गया, जबकि 10 जून की रात से कव्वाली कार्यक्रमों का सिलसिला शुरू हो गया है। आयोजकों के मुताबिक 11 जून से लेकर 15 जून तक लगातार कव्वाली महफिलें सजेंगी, जिनमें मशहूर कव्वाल सूफियाना कलाम पेश करेंगे। वहीं 15 जून को नमाज़-ए-फज्र के बाद कुल शरीफ की रस्म अदा कर उर्स का समापन किया जाएगा। दरगाह कमेटी के लोगों का कहना है कि उर्स के दौरान आने वाले जायरीन के लिए खाने-पीने और ठहरने की विशेष व्यवस्था की गई है। हर साल जून महीने में आयोजित होने वाला यह उर्स क्षेत्र की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं में शामिल है। अकीदतमंदों का मानना है कि हजरत दादा फखरुद्दीन शाह चिश्ती के दरबार से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई दुआएं कबूल होती हैं और मुरादें पूरी होती हैं। यही वजह है कि सम्भल ही नहीं बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में दरगाह पर पहुंचकर अपनी अकीदत पेश करते हैं। उर्स-ए-पाक के दौरान दरगाह परिसर में आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है और कव्वालियों की गूंज से पूरा इलाका सूफियाना रंग में रंगा नजर आ रहा है।

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