यूपी एटीएस का बड़ा खुलासा: नोएडा से गिरफ्तार संदिग्धों के पाकिस्तान कनेक्शन ने मचाई हलचल, RSS दफ्तरों पर हमले की थी तैयारी।
उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर आतंक के जाल को ध्वस्त करते हुए उस गहरी साजिश पर प्रहार किया है, जो राज्य की शांति
- आतंकी साजिश का सनसनीखेज खुलासा: हिजबुल्लाह अली खान और समीर खान ने ISI को भेजी संवेदनशील ठिकानों की लोकेशन
- लखनऊ से नोएडा तक एटीएस की छापेमारी, ग्रेनेड हमले और व्यक्तिगत धमकियों के जरिए दहशत फैलाने का खतरनाक मंसूबा नाकाम
उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बार फिर आतंक के जाल को ध्वस्त करते हुए उस गहरी साजिश पर प्रहार किया है, जो राज्य की शांति और सद्भाव को भंग करने के इरादे से बुनी जा रही थी। लखनऊ एटीएस की सतर्कता और नोएडा से हुई महत्वपूर्ण गिरफ्तारियों के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने सुरक्षा तंत्र के भीतर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पकड़े गए संदिग्ध न केवल महत्वपूर्ण संस्थानों की रेकी कर रहे थे, बल्कि वे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के सीधे संपर्क में थे। नोएडा से पकड़े गए इन आरोपियों से हुई लंबी पूछताछ में यह भी पता चला है कि इस बार साजिश का केंद्र केवल सरकारी इमारतें नहीं थीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थानों को भी निशाना बनाने की योजना तैयार की गई थी। एटीएस अब उन सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जो इन आरोपियों को सीमा पार बैठे आकाओं से जोड़ती हैं।
जांच की गहराई में जाने पर यह स्पष्ट हुआ है कि गिरफ्तार किए गए तुषार चौहान, जिसने अपना नाम बदलकर हिजबुल्लाह अली खान रख लिया था, और उसके साथी समीर खान ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालयों को अपना प्राथमिक लक्ष्य बनाया था। विवेचना के दौरान यह कड़वा सच सामने आया है कि इन लोगों ने लखनऊ और नोएडा सहित प्रदेश के कई हिस्सों में स्थित संघ के दफ्तरों की सटीक भौगोलिक स्थिति और वहां की सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ब्यौरा एकत्रित किया था। यह जानकारी डिजिटल माध्यमों का उपयोग करते हुए ISI को भेजी गई थी। पाकिस्तान से मिले निर्देशों में स्पष्ट रूप से इन ठिकानों पर ग्रेनेड से हमला करने और भारी जनहानि पहुंचाने की बात कही गई थी। एटीएस ने इन संदिग्धों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कई ऐसे नक्शे और वीडियो बरामद किए हैं जो इनके खतरनाक मंसूबों की पुष्टि करते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि इस साजिश का दायरा केवल विस्फोटों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें व्यक्तिगत स्तर पर भय पैदा करने की रणनीति भी शामिल थी। पूछताछ के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि इन संदिग्धों के पास उन व्यक्तियों की एक सूची थी, जिन्होंने अपनी मूल धार्मिक पहचान छोड़कर दूसरा धर्म अपना लिया था। इन लोगों को डराने-धमकाने और उन पर हमला करने की योजना इसलिए बनाई गई थी ताकि समाज में धार्मिक ध्रुवीकरण और अविश्वास की स्थिति पैदा की जा सके। यह पहली बार देखा गया है कि कोई आतंकी सेल व्यक्तिगत स्तर पर धर्मांतरण करने वाले लोगों को चिह्नित कर उन्हें आतंकित करने की योजना बना रहा था। नोएडा से मिली इन जानकारियों ने जांच को पूरी तरह से नई दिशा दे दी है, जिसमें अब सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले कोण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
डिजिटल फुटप्रिंट्स और फंडिंग
एटीएस की जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों को इन गतिविधियों के लिए संदिग्ध बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए धन उपलब्ध कराया जा रहा था। टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग कर सीमा पार से निर्देश दिए जा रहे थे ताकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की पकड़ से बचा जा सके।
गिरफ्तार आरोपी तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्लाह अली खान की भूमिका इस पूरे नेटवर्क में सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है। एटीएस के अधिकारियों को पता चला है कि वह काफी समय से कट्टरपंथी विचारधारा की ओर झुक रहा था और उसने स्वेच्छा से अपना नाम बदलकर आतंकी संगठन की तर्ज पर रख लिया था। समीर खान के साथ मिलकर उसने नोएडा के एक किराए के कमरे को अपना ठिकाना बनाया और वहीं से रेकी की गतिविधियों को अंजाम देने लगा। इन लोगों ने न केवल कार्यालयों की बाहरी सुरक्षा की फोटो खींची, बल्कि वहां आने-जाने वाले महत्वपूर्ण व्यक्तियों के समय और वाहन नंबरों का भी रिकॉर्ड रखना शुरू कर दिया था। एटीएस अब यह पता लगा रही है कि क्या इनके साथ कोई और स्थानीय व्यक्ति भी शामिल था जो इन्हें रसद या अन्य सुविधाएं प्रदान कर रहा था। लखनऊ एटीएस की टीम ने नोएडा के अलावा भी कई अन्य शहरों में छापेमारी की है, क्योंकि आरोपियों के बयानों में कुछ अन्य सहयोगियों के नाम भी सामने आए हैं। यह नेटवर्क जिस तरह से संगठित था, वह यह संकेत देता है कि यह किसी बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की रिहर्सल कर रहे थे। ग्रेनेड हमले के निर्देश मिलने का मतलब था कि ये लोग साजो-सामान जुटाने की प्रक्रिया में थे। पुलिस अब उस चैनल का पता लगा रही है जिसके जरिए इन्हें हथियार और विस्फोटक उपलब्ध कराए जाने थे। नोएडा में इनकी गिरफ्तारी ने एक संभावित आपदा को टाल दिया है, क्योंकि अगर ये अपने मंसूबों में सफल हो जाते, तो प्रदेश की राजधानी और एनसीआर क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती थी।
साजिश का एक और पहलू जो बेहद डरावना है, वह है दहशत फैलाने के लिए प्रतीकों का चयन। RSS के कार्यालयों को चुनना और व्यक्तिगत रूप से लोगों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि इनका उद्देश्य केवल हिंसा नहीं, बल्कि देश के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करना था। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने इंटरनेट के जरिए विस्फोटक बनाने की विधियां भी सीखी थीं। एटीएस अब इन आरोपियों को रिमांड पर लेकर उनके 'स्लीपर सेल' नेटवर्क का पर्दाफाश करने की कोशिश कर रही है। सीमा पार से मिल रहे निर्देशों की भाषा और तकनीक यह साबित करती है कि ISI भारत के भीतर नए चेहरों के माध्यम से अशांति फैलाने की कोशिश कर रही है, जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड न हो। फिलहाल, नोएडा से पकड़े गए इन संदिग्धों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल भेज दिया गया है और एटीएस की विवेचना जारी है। लखनऊ स्थित मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारी इस मामले की प्रगति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। यह मामला केवल दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक इकोसिस्टम की ओर इशारा करता है जो युवाओं को बरगलाकर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में धकेल रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब हाई अलर्ट पर हैं और सभी संवेदनशील ठिकानों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता कर दिया गया है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना है जो इस आतंकी साजिश की पूरी तस्वीर साफ कर देंगी।
Also Read- बंगाल में गरजे योगी आदित्यनाथ, ममता पर तीखा वार—‘4 मई के बाद नहीं बचेगी छिपने की जगह’।
What's Your Reaction?









