टाटानगर में रेलकर्मी की सरेआम हत्या: लोको पायलट जीके गौतम को बदमाशों ने गोलियों से भूना, रेलवे क्षेत्र में सनसनी।
टाटानगर रेलवे स्टेशन के निकट बागबेड़ा थाना क्षेत्र में देर रात हुई एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे चक्रधरपुर रेल मंडल को हिलाकर
- क्रू लॉबी के पास लोको पायलट की हत्या से भड़का रेल कर्मचारियों का गुस्सा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
- टाटानगर-चक्रधरपुर रेल मंडल में शोक की लहर: ड्यूटी से लौट रहे पायलट पर घात लगाकर हमला, पुलिस जांच में जुटी
टाटानगर रेलवे स्टेशन के निकट बागबेड़ा थाना क्षेत्र में देर रात हुई एक सनसनीखेज वारदात ने पूरे चक्रधरपुर रेल मंडल को हिलाकर रख दिया है। ड्यूटी खत्म कर अपने घर लौट रहे लोको पायलट जीके गौतम की अज्ञात अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना क्रू लॉबी के पास की बताई जा रही है, जो रेलवे परिचालन का एक व्यस्त केंद्र माना जाता है। इस हत्या के बाद न केवल मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है, बल्कि रेलवे कर्मचारियों के बीच अपनी सुरक्षा को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की छानबीन शुरू कर दी है, लेकिन अपराधियों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
जमशेदपुर के टाटानगर स्टेशन से सटे बागबेड़ा इलाके में हुई इस वारदात ने कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लोको पायलट जीके गौतम अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद चक्रधरपुर रेल मंडल के टाटानगर क्रू लॉबी से बाहर निकले थे। वे अपने घर की ओर जा ही रहे थे कि पहले से घात लगाए बैठे हथियारबंद अपराधियों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली सीधे उनके शरीर के महत्वपूर्ण हिस्सों में लगी, जिससे वे मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़े। आसपास के लोगों ने जब तक कुछ समझने और उनकी मदद करने की कोशिश की, अपराधी अंधेरे का फायदा उठाकर वहां से फरार होने में सफल रहे। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया है। टाटानगर स्टेशन और आसपास के यार्डों में काम करने वाले रेलकर्मियों का कहना है कि यह इलाका अपराधियों का अड्डा बनता जा रहा है। विशेष रूप से रात के समय ड्यूटी करने वाले लोको पायलटों और गार्डों के लिए क्रू लॉबी तक आना-जाना जानलेवा साबित हो रहा है। कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया है कि बार-बार मांग करने के बावजूद रेलवे कॉलोनी और क्रू लॉबी के आसपास पुलिस गश्त नहीं बढ़ाई गई। इस हत्या के विरोध में बड़ी संख्या में रेलकर्मी एकजुट हो गए हैं और उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होती और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, वे खुद को असुरक्षित महसूस करते रहेंगे।
लोको पायलट जीके गौतम रेलवे के एक सम्मानित और अनुभवी कर्मचारी थे, जिनके असामयिक निधन ने उनके सहकर्मियों को गहरे सदमे में डाल दिया है। उनके साथ काम करने वाले लोगों का कहना है कि वे बेहद मिलनसार व्यक्ति थे और उनकी किसी से कोई व्यक्तिगत रंजिश की बात सामने नहीं आई थी। ऐसे में यह हत्या किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा है या फिर छिनतई और लूटपाट के विरोध में की गई वारदात, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि अपराधियों के भागने के रास्ते और उनकी पहचान का कोई सुराग मिल सके। टाटानगर और बागबेड़ा का सीमावर्ती इलाका लंबे समय से आपराधिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है। रेलवे ट्रैक के किनारे बनी झाड़ियों और स्ट्रीट लाइटों की कमी के कारण अपराधी अक्सर रेलकर्मियों को निशाना बनाते हैं। इससे पहले भी मोबाइल छिनतई और मारपीट की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन हत्या जैसी बड़ी वारदात ने अब बड़े आंदोलन की नींव रख दी है।
पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया और प्रदर्शन कर रहे रेल कर्मचारियों को शांत कराने की कोशिश की। अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि हमलावरों को लोको पायलट की आवाजाही के समय की पूरी जानकारी थी। पुलिस उन सभी संदिग्धों से पूछताछ कर रही है जो हाल के दिनों में जेल से छूटे हैं या फिर उस क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। रेल मंडल के अधिकारियों ने भी इस घटना को अत्यंत दुखद बताया है और मृतक के परिजनों को नियमानुसार सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है, हालांकि कर्मचारी फिलहाल केवल ठोस कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। घटना के बाद पूरे बागबेड़ा और टाटानगर क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। रेलवे की विभिन्न यूनियनें इस मुद्दे पर बैठक कर रही हैं और आगे की रणनीति तैयार की जा रही है। कर्मचारियों का तर्क है कि यदि लोको पायलट सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन कैसे सुनिश्चित किया जा सकेगा। वे मांग कर रहे हैं कि क्रू लॉबी से लेकर मुख्य सड़क तक के रास्ते को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जाए और वहां चौबीसों घंटे सशस्त्र जवानों की तैनाती की जाए। इस हत्याकांड ने टाटानगर जैसे महत्वपूर्ण जंक्शन की सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को पूरी तरह से प्रदर्शित कर दिया है, जहां हजारों रेलकर्मी दिन-रात अपनी सेवाएं देते हैं।
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