ग्वालियर फैमिली कोर्ट में बड़ा फर्जीवाड़ा: ननद को 'सौतन' बताकर महिला ने हासिल किया एकतरफा तलाक।
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक ऐसा कानूनी मामला सामने आया है जिसने न्याय प्रणाली और पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा पर गंभीर
- पति की बहन की फोटो दिखाकर अदालत को किया गुमराह, सच्चाई सामने आने पर अब हाईकोर्ट पहुंची कानूनी लड़ाई
- रिश्तों का अनोखा जाल: पत्नी ने ननद को बताया पति की दूसरी पत्नी, बिना गवाही और जांच के टूटा सात जन्मों का बंधन
मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से एक ऐसा कानूनी मामला सामने आया है जिसने न्याय प्रणाली और पारिवारिक रिश्तों की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ के फैमिली कोर्ट में एक महिला ने अपने पति से तलाक पाने के लिए धोखाधड़ी का सहारा लेते हुए अपनी ही ननद को अपनी 'सौतन' बताकर पेश कर दिया। महिला ने अदालत में ननद की तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है और वह उसी महिला के साथ रह रहा है। इस आधार पर अदालत ने पति का पक्ष सुने बिना ही महिला के पक्ष में एकतरफा तलाक का फैसला सुना दिया। यह मामला अब न केवल चर्चा का विषय बना हुआ है बल्कि अदालती प्रक्रियाओं में होने वाली चूक की ओर भी इशारा कर रहा है। ग्वालियर के इस विचित्र मामले ने कानूनी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। घटना की शुरुआत तब हुई जब पति-पत्नी के बीच अनबन के चलते मामला फैमिली कोर्ट तक पहुँचा। महिला ने तलाक की अर्जी दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि उसका पति उसके साथ क्रूरता करता है और उसने उसे छोड़कर दूसरी महिला से विवाह कर लिया है। अपने दावों को पुख्ता करने के लिए महिला ने सबूत के तौर पर कुछ तस्वीरें अदालत के समक्ष प्रस्तुत कीं। इन तस्वीरों में उसका पति अपनी बहन के साथ खड़ा था, लेकिन महिला ने चतुराई से जज को यह विश्वास दिला दिया कि फोटो में दिख रही महिला उसकी ननद नहीं बल्कि उसके पति की दूसरी पत्नी यानी उसकी सौतन है।
अदालती कार्यवाही के दौरान अक्सर जब एक पक्ष बार-बार बुलाने पर भी उपस्थित नहीं होता, तो अदालत एकतरफा फैसला सुनाने की प्रक्रिया अपनाती है। इस मामले में भी महिला ने दावा किया कि उसने पति को नोटिस भेजे थे, लेकिन वह जानबूझकर कोर्ट नहीं आ रहा है। चूंकि महिला ने दूसरी शादी का 'ठोस' सबूत (तस्वीर के रूप में) पेश किया था, इसलिए अदालत ने तथ्यों की गहराई से भौतिक जांच किए बिना ही इसे सही मान लिया। पति की अनुपस्थिति में कोर्ट ने माना कि पति ने वास्तव में दूसरी शादी कर ली है और पत्नी का साथ रहना अब संभव नहीं है। इसी के आधार पर महिला को एकतरफा तलाक की डिक्री दे दी गई, जिससे वह कानूनी रूप से स्वतंत्र हो गई। जब इस एकतरफा फैसले की जानकारी पति को हुई, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। पति का दावा है कि उसे इस पूरी कानूनी प्रक्रिया और कोर्ट के नोटिस के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। उसे तब पता चला जब तलाक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। जब उसने अदालत के दस्तावेजों और महिला द्वारा पेश किए गए सबूतों को देखा, तो वह दंग रह गया। जिस महिला को उसकी दूसरी पत्नी बताकर तलाक लिया गया था, वह वास्तव में उसकी अपनी सगी बहन थी। पति ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ तुरंत कानूनी कदम उठाने का निर्णय लिया और फैमिली कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
क्या होती है एकतरफा तलाक की प्रक्रिया?
कानून में इसे 'एक्स-पार्टी डिवोर्स' कहा जाता है। यदि एक पक्ष अर्जी देता है और दूसरा पक्ष बार-बार समन भेजने के बाद भी अदालत में हाजिर नहीं होता, तो जज उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुना देते हैं। हालांकि, इस मामले में साक्ष्यों के साथ की गई छेड़छाड़ ने इस प्रक्रिया की संवेदनशीलता को बढ़ा दिया है।
पति द्वारा हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि उसकी पत्नी ने केवल तलाक पाने और उसे बदनाम करने के उद्देश्य से उसकी बहन की पहचान का गलत इस्तेमाल किया है। याचिका में उन सभी दस्तावेजी सबूतों को संलग्न किया गया है जो यह प्रमाणित करते हैं कि फोटो में दिख रही महिला उसकी बहन है। पति ने अदालत से मांग की है कि इस फर्जीवाड़े की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और जिस महिला ने न्यायपालिका की आंखों में धूल झोंकी है, उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाए। मामला अब सुनवाई के अधीन है और हाईकोर्ट ने इस पर जवाब तलब किया है।
इस घटना ने अदालतों में साक्ष्यों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी ध्यान आकर्षित किया है। आमतौर पर वैवाहिक विवादों में तस्वीरों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जाता है, लेकिन वर्तमान तकनीक के युग में तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ या गलत संदर्भ में पेश करना आसान हो गया है। इस मामले में भी अगर महिला की ननद या पति को अपनी बात रखने का मौका मिलता, तो शायद यह नौबत नहीं आती। अब कानूनी बहस इस बात पर टिकी है कि क्या केवल फोटो के आधार पर किसी को 'दूसरी पत्नी' मान लेना उचित था, जबकि इसके लिए कोई आधिकारिक विवाह प्रमाणपत्र या ठोस गवाही मौजूद नहीं थी। पारिवारिक रिश्तों के लिहाज से यह मामला काफी दुखद माना जा रहा है। एक पवित्र रिश्ते को खत्म करने के लिए दूसरे पवित्र रिश्ते यानी भाई-बहन के संबंध को कलंकित करने की कोशिश की गई। इस धोखाधड़ी का असर न केवल पति-पत्नी के जीवन पर पड़ा है, बल्कि उस ननद की प्रतिष्ठा पर भी आंच आई है जिसे बिना किसी कसूर के इस विवाद में घसीटा गया। सामाजिक रूप से भी इस मामले की काफी निंदा हो रही है। लोग इस बात से हैरान हैं कि कोई महिला कानून का इस हद तक गलत इस्तेमाल कैसे कर सकती है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट के आगामी रुख पर टिकी हैं। यदि यह साबित हो जाता है कि महिला ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर तलाक हासिल किया है, तो न केवल उसका तलाक रद्द हो सकता है, बल्कि उस पर जालसाजी और न्यायालय की अवमानना का मुकदमा भी चल सकता है। यह मामला भविष्य के लिए एक उदाहरण बनेगा कि पारिवारिक विवादों में सत्यता की जांच कितनी अनिवार्य है। ग्वालियर का यह 'सौतन' वाला ड्रामा अब पूरी तरह से एक गंभीर कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है, जिसका फैसला रिश्तों और कानून की गरिमा तय करेगा।
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