राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधों की बाढ़: 2021 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हुए धोखाधड़ी के मामले, गृह मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े। 

देश की राजधानी दिल्ली, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत और प्रशासनिक महत्व के लिए जानी जाती है, अब दुर्भाग्यवश साइबर अपराधियों के

Mar 25, 2026 - 16:19
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राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधों की बाढ़: 2021 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हुए धोखाधड़ी के मामले, गृह मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े। 
राजधानी दिल्ली में साइबर अपराधों की बाढ़: 2021 के मुकाबले दोगुने से ज्यादा हुए धोखाधड़ी के मामले, गृह मंत्रालय ने जारी किए आंकड़े। 
  • लोकसभा में गूंजा दिल्ली के बढ़ते साइबर क्राइम का मुद्दा; जालसाजों का नया ठिकाना बना नेशनल कैपिटल रीजन, वित्तीय नुकसान में भारी बढ़ोतरी
  • डिजिटल इंडिया के दौर में सुरक्षा पर बड़ा सवाल: दिल्ली में साइबर वारदातों की संख्या ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, सरकार ने रोकथाम के लिए कसी कमर

देश की राजधानी दिल्ली, जो अपनी ऐतिहासिक विरासत और प्रशासनिक महत्व के लिए जानी जाती है, अब दुर्भाग्यवश साइबर अपराधियों के सबसे पसंदीदा ठिकाने के रूप में अपनी पहचान बना रही है। मंगलवार, 24 मार्च 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में गृह मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों ने सुरक्षा एजेंसियों और आम नागरिकों की नींद उड़ा दी है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने सदन को सूचित किया कि दिल्ली में साइबर अपराधों और साइबर सुरक्षा उल्लंघनों की संख्या में 2021 की तुलना में दोगुनी से भी अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। जहां साल 2021 में देश भर में लगभग 14 लाख साइबर सुरक्षा घटनाएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2025 के अंत तक यह आंकड़ा बढ़कर 29.44 लाख से अधिक हो गया है। इसमें दिल्ली का हिस्सा सबसे अधिक है, जो इसे देश का 'साइबर धोखाधड़ी का गढ़' घोषित करने के लिए पर्याप्त है।

डिजिटल क्रांति और तेजी से बढ़ते इंटरनेट प्रसार के साथ-साथ दिल्ली में साइबर ठगों ने अपने पैर पसार लिए हैं। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली न केवल राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक रिपोर्ट की गई घटनाओं का केंद्र है, बल्कि यहां होने वाली धोखाधड़ी की प्रकृति भी बेहद जटिल और संगठित हो गई है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि 'इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम' (CERT-In) द्वारा ट्रैक की गई इन घटनाओं में वेबसाइट घुसपैठ, मैलवेयर प्रसार, फिशिंग अटैक और डेटा चोरी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। दिल्ली के निवासियों की उच्च क्रय शक्ति और तकनीकी निर्भरता को साइबर अपराधी एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। 2021 के बाद से मामलों में आई यह अचानक तेजी बताती है कि अपराधी अब पारंपरिक अपराधों को छोड़कर डिजिटल माध्यमों से लोगों की गाढ़ी कमाई लूटने पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

दिल्ली में साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते ग्राफ के पीछे 'डिजिटल अरेस्ट' और 'इन्वेस्टमेंट फ्रॉड' जैसे नए तरीके सबसे प्रमुख हैं। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों से पता चलता है कि अकेले 2025 में दिल्ली में 50 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी के लगभग 376 उच्च-मूल्य वाले मामले दर्ज किए गए। जालसाज अब केवल छोटे-मोटे ओटीपी फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED), सीबीआई या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से डराते हैं और उनसे लाखों रुपये ऐंठ लेते हैं। इसके अलावा, निवेश के नाम पर किए जा रहे घोटाले भी दिल्ली में चरम पर हैं, जहां पीड़ितों को शेयर बाजार या क्रिप्टो-करेंसी में भारी मुनाफे का लालच देकर उनके बैंक खाते खाली कर दिए जाते हैं। आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में होने वाले कुल साइबर अपराधों में यूपीआई (UPI) से जुड़े घोटालों की हिस्सेदारी लगभग 40 से 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 2015 में दिल्ली में साइबर धोखाधड़ी से होने वाला कुल नुकसान मात्र 6.3 करोड़ रुपये था, जो 2025 के अंत तक बढ़कर 1,271 करोड़ रुपये के चौंकाने वाले आंकड़े पर पहुंच गया है। यह 10 वर्षों में लगभग 190 गुना की वृद्धि है, जो राजधानी में साइबर सुरक्षा की गंभीर स्थिति को दर्शाती है।

लोकसभा में जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। गृह मंत्रालय के तहत स्थापित 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) अब राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर रियल-टाइम में काम कर रहा है। 'सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (CFCFRMS) के माध्यम से अब तक देश भर में पीड़ितों के लगभग 8,690 करोड़ रुपये डूबने से बचाए गए हैं। दिल्ली में भी एक विशेष 'ई-एफआईआर' (e-FIR) प्रणाली लागू की गई है, जिससे पीड़ित बिना थाने जाए तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि अब तक लाखों संदिग्ध सिम कार्डों को ब्लॉक किया गया है और हजारों मोबाइल उपकरणों के आईएमईआई (IMEI) नंबरों को ब्लैकलिस्ट किया गया है ताकि अपराधी फिर से सक्रिय न हो सकें।

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली के साइबर धोखाधड़ी का केंद्र बनने का एक बड़ा कारण यहां की उच्च जनसंख्या घनत्व और डिजिटल लेनदेन की व्यापकता है। जैसे-जैसे लोग अपनी बैंकिंग और खरीदारी के लिए मोबाइल एप्स पर निर्भर हो रहे हैं, वे अनजाने में साइबर अपराधियों के लिए आसान लक्ष्य बन जाते हैं। सरकार ने स्वीकार किया है कि अब साइबर अपराध व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि 'संस्थागत' तरीके से किए जा रहे हैं, जहां बड़े-बड़े गिरोह कॉल सेंटर चलाकर लोगों को ठग रहे हैं। इसके जवाब में, आई4सी (I4C) ने 'प्रतिबिंब' (Pratibimb) नाम का एक मॉड्यूल लॉन्च किया है, जो अपराधियों के ठिकानों और उनके बुनियादी ढांचे का डिजिटल मानचित्र तैयार करता है। इस तकनीक की मदद से दिल्ली और आसपास के इलाकों से हजारों साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी संभव हो पाई है।

सदन में इस बात पर भी चर्चा हुई कि केवल तकनीक और गिरफ्तारी ही इस समस्या का समाधान नहीं है; जन-जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। सरकार ने 'साइबर दोस्त' (CyberDost) जैसे सोशल मीडिया अभियानों और एसएमएस अलर्ट्स के जरिए नागरिकों को शिक्षित करने का प्रयास तेज कर दिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक राष्ट्रीय सम्मेलन में जोर दिया था कि साइबर सुरक्षा अब केवल आर्थिक सुरक्षा का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों में लोगों को 'साइबर हाइजीन' अपनाने की सलाह दी जा रही है, जिसमें अज्ञात लिंक पर क्लिक न करना, मजबूत पासवर्ड रखना और नियमित रूप से अपने वित्तीय खातों की निगरानी करना शामिल है।

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