प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज हादसा: पूर्व मंत्री अंसार अहमद समेत 3 गिरफ्तार, लापरवाही और हत्या की धाराओं में भेजे गए जेल। 

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के फाफामऊ थाना क्षेत्र के चंदापुर गांव में हुए भीषण कोल्ड स्टोरेज हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख

Mar 25, 2026 - 16:13
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प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज हादसा: पूर्व मंत्री अंसार अहमद समेत 3 गिरफ्तार, लापरवाही और हत्या की धाराओं में भेजे गए जेल। 
प्रयागराज कोल्ड स्टोरेज हादसा: पूर्व मंत्री अंसार अहमद समेत 3 गिरफ्तार, लापरवाही और हत्या की धाराओं में भेजे गए जेल। 
  • प्रशासन का कड़ा प्रहार: जिला उद्यान अधिकारी निलंबित, असुरक्षित इमारत को लाइसेंस देने वाले इंजीनियर पर भी गाज
  • भ्रष्टाचार और अनदेखी की भेंट चढ़ी चार मजदूरों की जान; 25 साल पुराने जर्जर कोल्ड स्टोर में क्षमता से अधिक भंडारण बना काल

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के फाफामऊ थाना क्षेत्र के चंदापुर गांव में हुए भीषण कोल्ड स्टोरेज हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। सोमवार की दोपहर हुए इस दर्दनाक हादसे में चार मजदूरों की मलबे में दबने और अमोनिया गैस के रिसाव के कारण मौत हो गई, जबकि 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख के बाद पुलिस और प्रशासन ने बिजली की तेजी से कार्रवाई की है। मंगलवार की देर रात पुलिस ने समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री और 'आदर्श कोल्ड स्टोरेज' के मालिक हाजी अंसार अहमद, उनके बेटे मंजूर अहमद और भतीजे अलाउद्दीन को गिरफ्तार कर लिया। इन तीनों आरोपियों को बुधवार को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या (धारा 103) और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस वक्त कोल्ड स्टोरेज की छत और दीवारें गिरीं, वहां अमोनिया गैस का तीव्र रिसाव शुरू हो गया, जिससे बचाव कार्य में जुटे एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सरकार ने इस मामले में प्रशासनिक लापरवाही को भी गंभीरता से लिया है। प्रदेश के उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर जिला उद्यान अधिकारी सौरभ श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने बिना भौतिक सत्यापन और सुरक्षा मानकों की जांच किए ही इस जर्जर हो चुके कोल्ड स्टोरेज के लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया था। इसके साथ ही, उस निजी इंजीनियर के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसकी गलत रिपोर्ट के आधार पर इस खतरनाक ढांचे को संचालन के योग्य बताया गया था।

पुलिस की तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। बताया जा रहा है कि यह कोल्ड स्टोरेज लगभग 25 साल पुराना था और पिछले 10 वर्षों से आंतरिक विवादों के कारण बंद पड़ा था। साल 2023 में इसे अचानक फिर से शुरू किया गया, लेकिन इसकी मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। जांच दल ने पाया कि कोल्ड स्टोरेज के भीतर क्षमता से काफी अधिक आलू की बोरियां ठूंस-ठूंस कर भरी गई थीं। अधिक मुनाफे के लालच में मालिक और मैनेजर ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया था। चेंबर के भीतर अमोनिया गैस का दबाव भी निर्धारित सीमा से कहीं ज्यादा था, जिसके चलते एक जोरदार धमाके के साथ पूरा ढांचा भरभरा कर गिर गया। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस के चेंबर में हुए रिसाव और दबाव ने जर्जर दीवारों को ढहाने में उत्प्रेरक का काम किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख प्रकट किया है। केंद्र सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। राज्य सरकार की ओर से भी समान राशि का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है ताकि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत मिल सके।

प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) विनीता सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति को 48 घंटों के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट और एक सप्ताह में पूर्ण विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। प्रशासन अब जिले के अन्य सभी कोल्ड स्टोरेज की सुरक्षा ऑडिट कराने की भी तैयारी कर रहा है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि अंसार अहमद के इस कोल्ड स्टोरेज में तकनीकी रूप से कुशल किसी भी कर्मचारी या इंजीनियर की नियुक्ति नहीं की गई थी। स्थानीय मजदूरों से ही खतरनाक मशीनों और गैस चेंबर का संचालन कराया जा रहा था, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है। पुलिस अब फरार चल रहे अन्य आरोपियों, जिनमें मैनेजर उस्मान और कुछ अन्य सहयोगी शामिल हैं, की तलाश में छापेमारी कर रही है।

हादसे के बाद चंदापुर गांव और आसपास के इलाकों में अभी भी दहशत का माहौल है। अमोनिया गैस के प्रभाव को कम करने के लिए प्रशासन ने फायर टेंडर और विशेष दवाओं का छिड़काव करवाया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार कोल्ड स्टोरेज की जर्जर हालत को लेकर शिकायत की थी, लेकिन राजनीतिक रसूख के कारण कभी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अंसार अहमद, जिन्हें स्थानीय स्तर पर उनके दबदबे के कारण भी जाना जाता है, पर पूर्व में भी कई विवादों के आरोप लगते रहे हैं। इस बार पुलिस ने जिस तरह से 'हत्या' की धारा में एफआईआर दर्ज की है, वह स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस मामले को एक सामान्य दुर्घटना के बजाय जानबूझकर की गई लापरवाही के रूप में देख रही है।

घायलों का उपचार प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल में चल रहा है, जहां कुछ मजदूरों की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। प्रशासन ने डॉक्टरों की एक विशेष टीम को घायलों की निगरानी के लिए तैनात किया है। इस बीच, विपक्षी दलों ने भी सरकार से मांग की है कि दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में भ्रष्टाचार के कारण ऐसे जर्जर ढांचों को संचालन की अनुमति न मिले। उद्यान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, क्योंकि लाइसेंस नवीनीकरण की फाइलें जिस गति से आगे बढ़ीं, वे संदेह के घेरे में हैं। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी छोटे या बड़े कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।

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