ललितपुर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा- इंजीनियर ने जीजा की मेडिकल डिग्री से 3.5 साल तक कार्डियोलॉजिस्ट बनकर मरीजों का इलाज किया, जांच तेज।
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक इंजीनियर ने अपने जीजा की मेडिकल डिग्री का
उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां एक इंजीनियर ने अपने जीजा की मेडिकल डिग्री का दुरुपयोग कर खुद को इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट बताकर जिला अस्पताल में लगभग 3.5 वर्षों तक मरीजों का इलाज किया। आरोपी अभिनव सिंह ने डॉ. राजीव गुप्ता की डिग्री और पहचान का उपयोग कर नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत नॉन कम्युनिकेबल डिजीज (एनसीडी) सेल में नियुक्ति प्राप्त की थी। शिकायत मिलने के बाद अभिनव सिंह ने इस्तीफा दे दिया और फरार हो गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू कर दी है, जिसमें आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तीन साल का पूरा वेतन वसूलने की प्रक्रिया शामिल है। घटना का खुलासा 10 दिसंबर 2025 को तब हुआ जब अमेरिका में रह रहीं डॉ. सोनाली सिंह ने ललितपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मयंक शुक्ला को एक शिकायत पत्र लिखा। डॉ. सोनाली सिंह, जो अभिनव सिंह की बहन हैं, ने बताया कि उनका भाई अभिनव सिंह, जो मूल रूप से आईआईटी पास आउट इंजीनियर है, ने उनके पति डॉ. राजीव गुप्ता की एमबीबीएस और एमडी कार्डियोलॉजी डिग्री का उपयोग कर फर्जी तरीके से नौकरी हासिल की। डॉ. राजीव गुप्ता अमेरिका में प्रैक्टिस कर रहे हैं और उनकी डिग्री का दुरुपयोग कर अभिनव सिंह ने खुद को डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से पेश किया। शिकायत में कहा गया कि अभिनव सिंह ने 2022 में एनएचएम के तहत जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट के पद पर जॉइन किया और तब से लगातार मरीजों को दवाएं लिखीं, जांच कराईं और उपचार किया।
अभिनव सिंह की नियुक्ति की प्रक्रिया में 2013 से शुरू हुए कागजी कारनामों का खुलासा हुआ है। जांच के अनुसार, अभिनव सिंह ने 2013 में ही डॉ. राजीव गुप्ता के दस्तावेजों का उपयोग कर मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराने का प्रयास किया था। एनएचएम के एनसीडी सेल में जॉइनिंग के समय उसने फर्जी सर्टिफिकेट और आईडी कार्ड प्रस्तुत किए, जिनमें डॉ. राजीव गुप्ता का नाम और फोटो अभिनव सिंह का था। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग में तैनाती के बाद अभिनव सिंह ने हृदय रोगियों का इलाज किया, जिसमें ईसीजी, इकोकार्डियोग्राफी जैसी जांचें और दवाओं का प्रिस्क्रिप्शन शामिल था। मरीजों को वह खुद को इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट बताता रहा, जिससे कई मरीजों का उपचार प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शिकायत मिलते ही अभिनव सिंह को नोटिस जारी किया, लेकिन वह 11 दिसंबर 2025 को इस्तीफा देकर गायब हो गया। सीएमओ डॉ. आर.के. दीक्षित ने बताया कि अभिनव सिंह ने जॉइनिंग से लेकर इस्तीफा तक लगभग 3.5 वर्ष कार्य किया, जिसमें उसका वेतन सरकारी खजाने से वितरित हुआ। अब वेतन वसूली के लिए विभागीय कार्रवाई शुरू हो गई है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 419 (धोखाधड़ी से व्यक्ति का प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी) और 468 (जालसाजी का दुरुपयोग) के तहत एफआईआर दर्ज की है। आरोपी की तलाश में टीमें गठित की गई हैं, और उसके मूल निवास स्थान लखनऊ व अन्य संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। इस फर्जीवाड़े में अभिनव सिंह ने न केवल डिग्री का दुरुपयोग किया, बल्कि फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र भी जमा किए। जांच में पता चला कि उसने अमेरिका में रह रहे जीजा डॉ. राजीव गुप्ता के दस्तावेजों को स्कैन कर अपनी फोटो चस्पा दी और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के समकक्ष उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण कराया। एनएचएम के एनसीडी प्रोग्राम के तहत कार्डियोलॉजिस्ट की कमी के कारण सत्यापन प्रक्रिया में ढील बरती गई, जिसका फायदा अभिनव सिंह ने उठाया। जिला अस्पताल में उसके दौरान सैकड़ों मरीजों का इलाज हुआ, लेकिन किसी बड़े हादसे की रिपोर्ट नहीं मिली। फिर भी, स्वास्थ्य विभाग ने सभी मरीजों के रिकॉर्ड की समीक्षा का आदेश दिया है।
ललितपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मयंक शुक्ला ने कहा कि शिकायत मिलते ही अभिनव सिंह के दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें फर्जीवाड़ा सिद्ध हो गया। कॉलेज प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को पूरा विवरण सौंप दिया है, और अब राज्य स्तर पर जांच समिति गठित की जा रही है। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि आरोपी ने जॉइनिंग के समय आधार कार्ड और अन्य आईडी में भी हेरफेर किया था। अभिनव सिंह मूल रूप से लखनऊ का निवासी है और आईआईटी कानपुर से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की है। उसके इंजीनियरिंग बैकग्राउंड का कोई स्वास्थ्य से संबंध नहीं था, फिर भी उसने कार्डियोलॉजी विभाग में दावे किए। इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। एनएचएम के तहत एनसीडी सेल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से बनी हुई है, जिसके कारण सत्यापन में लापरवाही हुई। विभाग ने अब सभी जिलों में डॉक्टरों के दस्तावेजों के दोबारा सत्यापन का आदेश जारी किया है। ललितपुर जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग अब वैध डॉक्टरों से संचालित हो रहा है, लेकिन मरीजों में भय का माहौल है। कुछ मरीजों ने बताया कि अभिनव सिंह ने सामान्य हृदय जांचें कीं, लेकिन विशेषज्ञता की कमी से जटिल मामलों को रेफर किया। पुलिस जांच में अभिनव सिंह के फरार होने के बाद उसके फोन और बैंक खातों की निगरानी शुरू हो गई है। उसके परिवार से पूछताछ की जा रही है, जिसमें बहन डॉ. सोनाली सिंह ने पूर्ण सहयोग का वादा किया है। डॉ. राजीव गुप्ता ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने डिग्री के दुरुपयोग की पुष्टि की। स्वास्थ्य विभाग ने आरोपी के खिलाफ मेडिकल काउंसिल एक्ट के तहत भी कार्रवाई की योजना बनाई है, जिसमें आजीवन पंजीकरण रद्द करने का प्रावधान है। वेतन वसूली के लिए वित्त विभाग से संपर्क किया गया है।
यह फर्जीवाड़ा ललितपुर मेडिकल कॉलेज के एनसीडी सेल तक सीमित नहीं था। अभिनव सिंह ने जिला अस्पताल के अलावा कुछ प्राइवेट क्लीनिकों में भी सलाह दी, जहां उसने डॉ. राजीव गुप्ता के नाम से प्रिस्क्रिप्शन जारी किए। जांच में 2013 से 2025 तक के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जिसमें लगभग 500 से अधिक मरीजों के कागजात प्रभावित पाए गए। विभाग ने इन मरीजों को वैकल्पिक जांच और उपचार की सलाह दी है। सीएमओ ने कहा कि भविष्य में भर्ती के समय डिजिटल सत्यापन अनिवार्य किया जाएगा। ललितपुर जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पहले से ही चिंताजनक रही है। एनएचएम के तहत एनसीडी प्रोग्राम हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसी बीमारियों पर फोकस करता है, लेकिन विशेषज्ञों की कमी से ग्रामीण क्षेत्र प्रभावित हैं। इस घटना के बाद जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग की बैठक बुलाई है, जिसमें सत्यापन प्रक्रिया को मजबूत करने पर चर्चा हुई। पुलिस ने अभिनव सिंह की तस्वीरें जारी की हैं और जनता से सूचना देने की अपील की है। आरोपी के फरार होने से जांच में जटिलता आई है, लेकिन विशेष टीम गठित की गई है। इस मामले का असर पूरे उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ेगा। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने अन्य जिलों में समान जांच के आदेश दिए हैं, ताकि फर्जी डॉक्टरों का पता लगाया जा सके। ललितपुर मेडिकल कॉलेज ने एनसीडी सेल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जब तक नया विशेषज्ञ नियुक्त न हो। मरीजों के रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा रहा है। अभिनव सिंह के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है, जिसमें धोखाधड़ी के अलावा स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा डालने का आरोप भी शामिल होगा।
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