मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ आशु सिंह राठौड़- सीमा सड़कों के शिल्पकार और AVSM से सम्मानित अधिकारी

तीन दशकों से अधिक की सेवा में उन्होंने लद्दाख की 12 से 18 हजार फीट ऊंची बर्फीली चोटियों, उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और भूटान जैसे कठिन इलाकों

Jan 25, 2026 - 23:49
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मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ आशु सिंह राठौड़- सीमा सड़कों के शिल्पकार और AVSM से सम्मानित अधिकारी
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ आशु सिंह राठौड़- सीमा सड़कों के शिल्पकार और AVSM से सम्मानित अधिकारी

मारवाड़ के प्रथम गांव लाछड़ी (डीडवाना जिला, लाडनूं तहसील) के निवासी मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ आशु सिंह राठौड़ ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) में तीन दशकों से अधिक समय तक देश की सामरिक आधारभूत संरचना के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने 26 जनवरी 2016 को विशिष्ट सेवा मेडल और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने 26 जनवरी 2019 को अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया।

15 जनवरी 1964 को जन्मे आशु सिंह राठौड़ ने प्रारंभिक शिक्षा गांव लाछड़ी में ली। आगे की पढ़ाई मीठड़ी मारवाड़, मौलासर और सुजानगढ़ में हुई। वर्ष 1988 में एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज जोधपुर से सिविल इंजीनियरिंग में गोल्ड मेडल के साथ डिग्री प्राप्त की। इसके बाद आईआईटी दिल्ली से एमटेक किया। 1990 में पहली बार में यूपीएससी परीक्षा पास कर उन्होंने सीमा सड़क संगठन में सेवा शुरू की। सेवा के दौरान एमबीए और पीएचडी की उच्च शिक्षा भी पूरी की।

तीन दशकों से अधिक की सेवा में उन्होंने लद्दाख की 12 से 18 हजार फीट ऊंची बर्फीली चोटियों, उत्तराखंड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, उत्तर-पूर्वी राज्यों और भूटान जैसे कठिन इलाकों में काम किया। उनके नेतृत्व में कई सामरिक सड़कें, पुल, सुरंगें और ऑल-वेदर रोड परियोजनाएं समय पर पूरी हुईं। उत्तराखंड में चीफ इंजीनियर के पद पर रहते हुए गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र में करीब 2000 करोड़ रुपये की सड़क और आधारभूत संरचना परियोजनाएं पूरी हुईं या प्रगति पर रहीं। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्य आवागमन, आपूर्ति और आपदा प्रबंधन को मजबूत करना था।

सेवा के दौरान उन्होंने एक साल में सबसे अधिक सड़कें बनाने का रिकॉर्ड बनाया जो अब तक कायम है। पांच साल तक लगातार दो बार सड़क निर्माण कंपनी के कमान अधिकारी रहे। बीआरओ के टेक्निकल परीक्षक के रूप में काम किया और भूटान में भी सेवा दी। सेवा के अंतिम चरण में बीआरओ के कार्मिक विभाग के प्रमुख रहे और जवानों के कल्याण के लिए कई नीतियां और एसओपी बनाईं जो आज भी मार्गदर्शक हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्रसेवा जारी रखते हुए वे बीआरओ के इकलौते ऐसे अधिकारी बने जिन्हें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) में सलाहकार नियुक्त किया गया। साथ ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के राष्ट्रीय गुणवत्ता मॉनिटर सलाहकार के रूप में ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और तकनीकी मूल्यांकन का कार्य कर रहे हैं।

उन्हें मिले अन्य सम्मान:

  • 1998 और 2005 में भारत सरकार द्वारा कमेंडेटरी सर्टिफिकेट
  • 15 जनवरी 2021 को थल सेनाध्यक्ष प्रशस्ति पत्र
  • उत्तराखंड मुख्यमंत्री प्रशंसा पत्र
  • महानिदेशक बीआरओ से दो बार प्रशंसा पत्र

पदक: विदेश सेवा पदक, उच्च ऊंचाई पदक, जम्मू-कश्मीर सेवा पदक, ऑपरेशन पराक्रम पदक, उत्तर-पूर्व सेवा पदक, स्वर्ण जयंती सेवा पदक, आजादी का अमृत महोत्सव सेवा पदक, दस-बीस-तीस वर्ष सेवा पदक आदि।

पारिवारिक जीवन: पत्नी मनीषा कंवर, एक पुत्र और दो पुत्रियां। छोटी पुत्री डॉ महक राठौड़ गायन, आईवीएफ में गोल्ड मेडलिस्ट और मिस राजस्थान रहीं।

सामाजिक सम्मान: राजस्थान गौरव, क्षत्रिय रत्न, मारवाड़ रत्न, समाज आईकोन, समाज रत्न, समाज गौरव, गांव गौरव, प्रख्यात इंजीनियर, ग्लोबल प्राइड अवार्ड आदि। सरल, मृदुभाषी और अनुशासित व्यक्तित्व के धनी आशु सिंह राठौड़ आज भी राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित हैं।

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