नीतीश कुमार की मीटिंग में व्यस्त थे पूर्व विधायक, उधर घर से चोरों ने कैश, गहने और महत्वपूर्ण दस्तावेज उड़ा लिए
जदयू की बैठक में प्रभात रंजन सिंह की मौजूदगी राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण थी, क्योंकि नीतीश कुमार ने राज्यसभा नामांकन के बाद पार्टी नेताओं को आश्वस्त किया था कि वे बिहार पर नजर
पटना के शास्त्रीनगर थाना क्षेत्र में जदयू के पूर्व विधायक प्रभात रंजन सिंह के घर में शुक्रवार रात चोरी की घटना ने राजनीतिक और सामान्य लोगों को चौंका दिया है। पूर्व विधायक उस समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास एक अणे मार्ग पर जदयू नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल थे, जहां नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले और पार्टी की भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान उनका घर खाली था और चोरों ने सहदेव महतो मार्ग स्थित फ्लैट में घुसकर नकदी, सोने-चांदी के गहने और कई जरूरी दस्तावेजों पर हाथ साफ कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर शास्त्रीनगर थाने की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। प्रभात रंजन सिंह ने बताया कि चोरों ने करीब 50 हजार रुपये नकद, कुछ गहने और उनके बेटे की मार्कशीट तथा जमीन से जुड़े कागजात भी ले लिए। यह वारदात ऐसे समय हुई जब पूर्व विधायक पहले से ही नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से दुखी थे और पार्टी में अनिश्चितता का माहौल था। पुलिस ने ताला टूटा मिलने की पुष्टि की और फिंगरप्रिंट्स तथा अन्य सुराग जुटाने का काम शुरू किया। इलाके में चोरी की घटनाओं में वृद्धि से लोग चिंतित हैं, और यह मामला राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण ज्यादा चर्चा में आ गया।
जदयू की बैठक में प्रभात रंजन सिंह की मौजूदगी राजनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण थी, क्योंकि नीतीश कुमार ने राज्यसभा नामांकन के बाद पार्टी नेताओं को आश्वस्त किया था कि वे बिहार पर नजर रखेंगे। बैठक में संगठन विस्तार, चुनावी रणनीति और नीतीश के उत्तराधिकार जैसे मुद्दों पर बात हुई। पूर्व विधायक बैठक से लौटे तो घर में ताला टूटा मिला और सामान बिखरा हुआ था। उन्होंने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई, जिसमें चोरी की पूरी जानकारी दी गई। घटना शुक्रवार रात करीब 9 बजे के आसपास हुई, जब परिवार होली के लिए पैतृक गांव बगहा गया था और प्रभात पटना में ही थे। चोरों ने मुख्य दरवाजे का ताला तोड़ा और अंदर घुसकर अलमारी और अन्य जगहों से सामान निकाला। प्रभात ने कहा कि चोरी से उन्हें आर्थिक नुकसान के साथ-साथ भावनात्मक झटका लगा, क्योंकि बेटे की मार्कशीट और जमीन के कागजात महत्वपूर्ण थे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की और आसपास के लोगों से पूछताछ की। यह घटना पटना में बढ़ती चोरी की घटनाओं की कड़ी है, जहां त्योहारों के समय खाली घरों को निशाना बनाया जा रहा है। प्रभात रंजन सिंह जदयू के पूर्व विधायक हैं और पटना जिले से जुड़े रहे हैं। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले से पार्टी में कई नेता नाराज हैं, और यह चोरी की घटना उनके दुख को और बढ़ा देती है।
पुलिस जांच में पता चला कि चोर पेशेवर थे और घर की स्थिति का पहले से पता था। उन्होंने मुख्य रूप से कैश और गहनों पर फोकस किया, लेकिन दस्तावेज भी ले गए जो बाद में ब्लैकमेल या अन्य अपराधों में इस्तेमाल हो सकते हैं। शास्त्रीनगर थाने की टीम ने फोरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया और फिंगरप्रिंट्स, फुटप्रिंट्स तथा अन्य सबूत जुटाए। प्रभात रंजन सिंह ने पुलिस को बताया कि घर में कोई बड़ा अलमारी या सेफ नहीं था, लेकिन चोरों ने हर जगह छान मारी। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस ने आसपास के चौराहों पर नाकाबंदी की। पूर्व विधायक ने कहा कि वे बैठक में व्यस्त थे और घर पर कोई नहीं था, जिसका फायदा चोरों ने उठाया। यह मामला राजनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बना, क्योंकि नीतीश की मीटिंग के दौरान ही यह हुआ। पुलिस ने चोरों की तलाश के लिए कई टीमों का गठन किया और संभावित संदिग्धों की सूची बनाई। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई लेकिन जांच तेज है।
चोरी की इस घटना ने पटना में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर राजनीतिक हस्तियों के घरों में। प्रभात रंजन सिंह ने कहा कि वे पहले से ही पार्टी के फैसलों से परेशान थे और अब यह घटना उनके लिए दोहरा झटका है। उन्होंने पुलिस से जल्द से जल्द चोरों को पकड़ने और सामान बरामद करने की मांग की। घटना के बाद कई जदयू नेता और स्थानीय लोग उनके घर पहुंचे और समर्थन जताया। पुलिस ने प्रभात को सलाह दी कि भविष्य में घर पर सीसीटीवी और अलार्म सिस्टम लगवाएं। चोरों ने ताला तोड़कर प्रवेश किया, जो दिखाता है कि वे बेखौफ थे। जांच में पता चला कि आसपास के कुछ घरों में भी छोटी-मोटी चोरी की कोशिश हुई थी, लेकिन सफल नहीं हुई। यह घटना होली के समय हुई, जब कई लोग गांव जाते हैं और घर खाली रहते हैं। पुलिस ने त्योहारों के दौरान विशेष निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है।
प्रभात रंजन सिंह के घर से चोरी का मामला राजनीतिक और अपराध दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण है। पूर्व विधायक नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं और बैठक में उनकी मौजूदगी पार्टी की एकजुटता दिखाती थी। चोरी से न केवल आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गायब होने से भविष्य में परेशानी हो सकती है। पुलिस ने पड़ोसियों से पूछताछ की और संभावित चोरों के बारे में जानकारी जुटाई। अभी तक कोई सुराग नहीं मिला लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार है। घटना ने पटना में चोरी के बढ़ते मामलों पर ध्यान केंद्रित किया है, जहां त्योहारों का फायदा उठाकर अपराधी सक्रिय हो जाते हैं। प्रभात ने कहा कि वे पार्टी और व्यक्तिगत जीवन दोनों में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
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