अजब गजब: नाबालिग प्रेमिका से मिलने रात के अंधेरे में आया प्रेमी, ग्रामीणों ने जबरन करा दी शादी, अब पिता बोले कि ....
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र के बरियारपुर गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग प्रेमी ...
मुजफ्फरपुर : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र के बरियारपुर गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग प्रेमी युगल को ग्रामीणों ने कथित तौर पर आपत्तिजनक हालत में पकड़कर उनकी जबरन शादी करा दी। इस घटना के बाद लड़के के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बाल विवाह और अपहरण का आरोप लगाया गया है।
- क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, वैशाली जिले के पातेपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला 17 वर्षीय राजा प्रशांत राम अपनी नाबालिग प्रेमिका से मिलने देर रात बरियारपुर गांव पहुंचा। दोनों के बीच कथित तौर पर प्रेम-प्रसंग चल रहा था। रात के अंधेरे में दोनों को संदिग्ध अवस्था में देखकर ग्रामीणों ने हंगामा शुरू कर दिया। ग्रामीणों और लड़की के परिजनों ने पहले राजा प्रशांत राम की जमकर पिटाई की और फिर बिना दोनों की सहमति के उनकी शादी करा दी।
इस घटना की जानकारी जब लड़के के पिता को हुई, तो वे तुरंत बरियारपुर थाने पहुंचे और लड़की के परिजनों सहित छह ग्रामीणों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पिता का आरोप है कि उनके नाबालिग बेटे का अपहरण कर उसकी जबरन शादी कराई गई, जो बाल विवाह अधिनियम के तहत अपराध है। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।
- बाल विवाह और कानूनी कार्रवाई
भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के और 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की की शादी गैर-कानूनी है। इस मामले में दोनों पक्ष नाबालिग होने के कारण यह शादी कानूनन अमान्य है। लड़के के पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके बेटे को जबरन बंधक बनाकर शादी कराई गई, जो गैर-कानूनी है। पुलिस ने इस मामले में बाल विवाह और अपहरण की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
इस घटना ने सामाजिक और कानूनी सवालों को जन्म दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने दोनों को "आपत्तिजनक हालत" में पकड़ा, जिसके बाद सामाजिक मान्यताओं के आधार पर उनकी शादी करा दी गई। हालांकि, यह कदम न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि नाबालिगों की सहमति और भविष्य को भी नजरअंदाज करता है। इस तरह की घटनाएं ग्रामीण इलाकों में सामाजिक दबाव और परंपरागत सोच को उजागर करती हैं, जहां प्रेम-प्रसंग को अक्सर "सामाजिक अपराध" मानकर तुरंत शादी जैसे कदम उठाए जाते हैं।
यह घटना एक बार फिर समाज में कानूनी और सामाजिक जागरूकता की कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रेम-प्रसंग को लेकर अक्सर हिंसा और जबरन शादी जैसे कदम उठाए जाते हैं, जो न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि नाबालिगों के अधिकारों का भी हनन करता है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए शिक्षा और जागरूकता अभियानों की जरूरत है।
मुजफ्फरपुर का यह मामला न केवल सामाजिक मान्यताओं और कानूनी नियमों के बीच टकराव को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि नाबालिग बच्चों के भविष्य को लेकर समाज को और संवेदनशील होने की जरूरत है। पुलिस की जांच और कानूनी कार्रवाई के बाद इस मामले में सच्चाई सामने आएगी, लेकिन यह घटना समाज के लिए एक सबक है कि प्रेम-प्रसंग को हिंसा या जबरन शादी से हल करने के बजाय संवाद और कानूनी रास्ते अपनाए जाने चाहिए।
बरियारपुर थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए हैं और यह जांच कर रही है कि शादी किस परिस्थिति में और किन लोगों की मौजूदगी में हुई। साथ ही, नाबालिग लड़की की मेडिकल जांच भी कराई जा रही है ताकि मामले की सच्चाई सामने आ सके।
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