Ajab Ghazab: 800 साल पुरानी ममी का रहस्यमयी टैटू: स्याही की खोज में जुटे वैज्ञानिक।
दक्षिण अमेरिका में एक पुरातात्विक खोज ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। एक 800 साल पुरानी ममी के गाल पर मिला टैटू न केवल अपनी सलामती के कारण चर्चा...
Ajab Ghazab: दक्षिण अमेरिका में एक पुरातात्विक खोज ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। एक 800 साल पुरानी ममी के गाल पर मिला टैटू न केवल अपनी सलामती के कारण चर्चा में है, बल्कि यह प्राचीन सभ्यताओं की कला और तकनीक के बारे में नए सवाल भी खड़े कर रहा है। इटली के ट्यूरिन विश्वविद्यालय के नेतृत्व में मानवविज्ञानी और पुरातत्वविदों की एक टीम ने इस ममी का विश्लेषण किया, जिसमें गाल पर अनोखे डिज़ाइन वाले टैटू पाए गए। यह खोज वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य बन गई है, क्योंकि आमतौर पर चेहरे पर बने टैटू समय के साथ मिट जाते हैं, लेकिन इस ममी के टैटू 800 साल बाद भी बरकरार हैं। वैज्ञानिक अब इस स्याही की रासायनिक संरचना और इसके पीछे की तकनीक को समझने में जुट गए हैं।
- ममी की खोज और टैटू का रहस्य
यह ममी दक्षिण अमेरिका के एक पुरातात्विक स्थल पर खोजी गई, जिसे काजामारकिला के नाम से जाना जाता है। यह स्थल पेरू की राजधानी लीमा से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ट्यूरिन विश्वविद्यालय के जियानलुइगी मंगियापेन की अगुआई में शोधकर्ताओं ने इस ममी का अध्ययन शुरू किया। प्रारंभिक विश्लेषण के दौरान, ममी के गाल पर काले रंग के अनोखे डिज़ाइन देखे गए, जो टैटू के रूप में पहचाने गए। इन डिज़ाइनों को देखना आसान नहीं था, क्योंकि समय के साथ त्वचा का रंग और बनावट बदल चुकी थी, लेकिन विशेष तकनीकों जैसे इन्फ्रारेड इमेजिंग और माइक्रोस्कोपिक विश्लेषण के जरिए इन टैटू की स्पष्ट छवि प्राप्त की गई।
टैटू की सलामती ने वैज्ञानिकों को चौंका दिया। आमतौर पर, चेहरे की त्वचा पर बने टैटू कुछ वर्षों में ही फीके पड़ जाते हैं, क्योंकि चेहरा सूर्य की किरणों और पर्यावरणीय कारकों के संपर्क में रहता है। लेकिन इस ममी के मामले में, टैटू न केवल बरकरार थे, बल्कि उनके डिज़ाइन भी स्पष्ट थे। यह खोज इस बात की ओर इशारा करती है कि प्राचीन सभ्यता ने ऐसी स्याही और तकनीक का उपयोग किया होगा, जो आधुनिक टैटू तकनीकों से कहीं अधिक उन्नत थी।
- टैटू की स्याही: एक प्राचीन तकनीक
टैटू बनाने की कला हजारों साल पुरानी है। पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि 1000 साल पहले भी लोग स्याही का उपयोग कर टैटू बनाते थे। उदाहरण के लिए, 5000 साल पुरानी ममी ‘Ötzi the Iceman’ पर टैटू पाए गए हैं, जो एक्यूपंक्चर पॉइंट्स से जुड़े थे। लेकिन इस 800 साल पुरानी ममी के टैटू का मामला अनोखा है, क्योंकि यह चेहरे पर बना है—एक ऐसा क्षेत्र जहाँ टैटू की सलामती बनाए रखना बेहद मुश्किल होता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस टैटू में उपयोग की गई स्याही में प्राकृतिक सामग्री, जैसे कि पौधों का रस, खनिज, या कार्बन-आधारित पदार्थ, शामिल हो सकते हैं।
भारत के उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में, प्राचीन काल में स्याही बनाने के लिए अनार, अखरोट की छाल, और बुरांश के फूलों का रस जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाता था। इनमें फिटकरी और गोंद मिलाकर स्याही को टिकाऊ बनाया जाता था। संभव है कि दक्षिण अमेरिका की इस प्राचीन सभ्यता ने भी ऐसी ही उन्नत तकनीकों का उपयोग किया हो। वैज्ञानिक अब इस स्याही की रासायनिक संरचना का विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि यह 800 साल तक कैसे बरकरार रही।
इस खोज ने वैज्ञानिकों के अनुसंधान की दिशा को बदल दिया है। पहले ममी का अध्ययन मुख्य रूप से उसकी उम्र, मृत्यु के कारण, और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर केंद्रित था। लेकिन अब वैज्ञानिक इस टैटू की स्याही और इसके निर्माण की प्रक्रिया पर ध्यान दे रहे हैं। इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी और मास स्पेक्ट्रोमेट्री जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर स्याही के घटकों की पहचान की जा रही है। शोधकर्ता यह भी जानना चाहते हैं कि क्या यह स्याही केवल सजावटी थी, या इसका कोई औषधीय, धार्मिक, या सामाजिक महत्व था।
टैटू की डिज़ाइन भी वैज्ञानिकों के लिए एक पहेली बनी हुई है। ये डिज़ाइन ज्यामितीय आकृतियों और प्रतीकों का मिश्रण हैं, जो उस समय की सभ्यता की कला और विश्वासों को दर्शाते हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये टैटू सामाजिक स्थिति, धार्मिक अनुष्ठानों, या चिकित्सीय उद्देश्यों से जुड़े हो सकते हैं, जैसा कि अन्य प्राचीन सभ्यताओं में देखा गया है।
यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उस प्राचीन सभ्यता की संस्कृति और जीवनशैली को समझने में भी मदद करती है। दक्षिण अमेरिका की प्री-इंका सभ्यताएँ, जैसे कि काजामारकिला क्षेत्र की सभ्यताएँ, अपनी जटिल कला और तकनीकों के लिए जानी जाती हैं। इस ममी का टैटू इस बात का प्रमाण है कि उस समय के लोग न केवल कला में निपुण थे, बल्कि उनके पास रासायनिक और तकनीकी ज्ञान भी था।
टैटू का चेहरे पर होना भी सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है। चेहरे पर टैटू बनवाना एक साहसी और स्थायी निर्णय होता है, जो संभवतः सामाजिक या धार्मिक महत्व को दर्शाता है। यह ममी संभवतः किसी उच्च सामाजिक स्थिति वाली महिला की हो सकती है, जिसके टैटू उसकी पहचान या विशेष भूमिका को दर्शाते हों।
इस खोज ने न केवल वैज्ञानिक समुदाय, बल्कि आम जनता में भी उत्साह पैदा किया है। सोशल मीडिया पर, विशेष रूप से X पर, लोग इस ममी और इसके टैटू की चर्चा कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “800 साल पुराना टैटू अभी भी बरकरार है! यह प्राचीन लोगों की कला का कमाल है।” यह खोज पुरातत्व और विज्ञान के क्षेत्र में नए शोध को प्रेरित कर रही है।
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस स्याही का विश्लेषण आधुनिक टैटू उद्योग के लिए भी प्रेरणा दे सकता है। यदि प्राचीन स्याही की संरचना को समझ लिया जाए, तो इससे टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल स्याही विकसित की जा सकती है। साथ ही, यह खोज प्राचीन सभ्यताओं की तकनीकी उन्नति को समझने में भी मदद करेगी।
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