अजब- गजब: महिलाओं ने BJP नेता गुड्डू खान को कीचड़ से नहलाया, कजरी गीतों के साथ इंद्रदेव से की प्रार्थना, बारिश के लिए अनोखी परंपरा। 

उत्तर प्रदेश के महांराजगंज जिले में भीषण गर्मी और बारिश की कमी ने लोगों को परेशान कर रखा है। इस संकट से निपटने के लिए नौतनवा कस्बे की महिलाओं ने ...

Jun 30, 2025 - 16:57
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अजब- गजब: महिलाओं ने BJP नेता गुड्डू खान को कीचड़ से नहलाया, कजरी गीतों के साथ इंद्रदेव से की प्रार्थना, बारिश के लिए अनोखी परंपरा। 

उत्तर प्रदेश के महांराजगंज जिले में भीषण गर्मी और बारिश की कमी ने लोगों को परेशान कर रखा है। इस संकट से निपटने के लिए नौतनवा कस्बे की महिलाओं ने 29 जून 2025 को एक प्राचीन परंपरा को जीवंत किया, जिसमें उन्होंने बारिश के देवता इंद्रदेव को प्रसन्न करने के लिए स्थानीय भाजपा नेता और पूर्व नगर पालिका चेयरमैन गुड्डू खान को कीचड़ से नहलाया। इस अनोखे अनुष्ठान में महिलाओं ने कजरी गीत गाए और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ इंद्रदेव से बारिश की प्रार्थना की। 29 जून 2025 की सुबह, महांराजगंज जिले के नौतनवा कस्बे में महिलाओं का एक समूह पूर्व चेयरमैन गुड्डू खान के आवास पर पहुंचा। दैनिक भास्कर और टीवी9 भारतवर्ष की रिपोर्ट्स के अनुसार, भीषण गर्मी और बारिश की कमी से परेशान ये महिलाएं एक प्राचीन परंपरा को निभाने आई थीं, जिसे स्थानीय लोग 'काल कालौटी' के नाम से जानते हैं। इस परंपरा में यह मान्यता है कि किसी सम्मानित व्यक्ति को कीचड़ से नहलाने से इंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और क्षेत्र में बारिश होती है।

महिलाओं ने गुड्डू खान के हाथ-पैर बांधे और उन्हें कीचड़ से नहलाया। इस दौरान, उन्होंने कजरी गीत गाए, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश के मौसम में गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत हैं। यह दृश्य न केवल आकर्षक था, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण था। गुड्डू खान ने इस अनुष्ठान में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और कहा, "यह हमारी पुरानी परंपरा है। मैं चाहता हूं कि लोगों की प्रार्थनाएं सुनी जाएं और जल्द ही बारिश हो।" इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें महिलाओं को कजरी गीत गाते और गुड्डू खान को कीचड़ से नहलाते देखा जा सकता है।

महांराजगंज और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यह परंपरा दशकों पुरानी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इंद्रदेव, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्षा के देवता हैं, किसी सम्मानित व्यक्ति को कीचड़ से नहलाने से प्रसन्न होते हैं। इस अनुष्ठान को 'काल कालौटी' कहा जाता है, और यह विशेष रूप से सूखे या बारिश की कमी के समय किया जाता है।

यह परंपरा केवल महांराजगंज तक सीमित नहीं है। 2022 में, महांराजगंज के पिपरदेउरा क्षेत्र में महिलाओं ने स्थानीय भाजपा विधायक जय मंगल कनौजिया और नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल को कीचड़ से नहलाया था, ताकि बारिश के लिए प्रार्थना की जाए। उस समय भी यह अनुष्ठान सुर्खियों में आया था। टाइम्स ऑफ इंडिया और इंडिया टुडे की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह परंपरा पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आम है, जहां लोग सूखे की स्थिति में इस तरह के रीति-रिवाजों का सहारा लेते हैं।

कजरी गीत, जो इस अनुष्ठान का हिस्सा थे, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति का प्रतीक हैं। ये गीत सावन और भादो के महीनों में गाए जाते हैं और अक्सर प्रकृति, प्रेम, और वर्षा से जुड़े होते हैं। इस परंपरा में महिलाएं सामूहिक रूप से गीत गाती हैं और इंद्रदेव से बारिश की प्रार्थना करती हैं, जिससे यह अनुष्ठान और भी जीवंत हो जाता है।

इस अनोखी परंपरा ने न केवल स्थानीय समुदाय की आस्था को उजागर किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक युग में भी लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों से कितने गहरे जुड़े हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं। कुछ यूजर्स ने इसे "सेक्युलर परंपरा" कहकर तारीफ की, क्योंकि इसमें एक मुस्लिम नेता, गुड्डू खान, ने हिंदू रीति-रिवाज में हिस्सा लिया। एक यूजर ने लिखा, "इसका मतलब है कि इंद्रदेव बहुत सेक्युलर भगवान हैं।" दूसरी ओर, कुछ लोगों ने इसे अंधविश्वास करार दिया और सवाल उठाया कि क्या ऐसी परंपराएं 21वीं सदी में प्रासंगिक हैं।

इस अनुष्ठान ने सामुदायिक एकता को भी प्रदर्शित किया। गुड्डू खान, जो एक भाजपा नेता और पूर्व चेयरमैन हैं, ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस परंपरा में हिस्सा लिया, जिससे यह संदेश गया कि सामाजिक और धार्मिक एकता अभी भी ग्रामीण भारत में जीवित है। यह घटना उस सामाजिक ताने-बाने को भी दर्शाती है, जहां विभिन्न समुदाय मिलकर अपनी साझा समस्याओं का समाधान खोजते हैं।

महांराजगंज में इस साल मॉनसून की देरी और भीषण गर्मी ने किसानों और स्थानीय लोगों को परेशान कर रखा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में भी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात बने थे, जिसमें महांराजगंज भी शामिल था। 2025 में, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जून में उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी की थी, जिसने किसानों की चिंता बढ़ा दी। धान की फसल, जो इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का आधार है, को पर्याप्त बारिश की जरूरत होती है, और इसकी कमी ने लोगों को परंपरागत उपायों की ओर मोड़ दिया।

इस तरह की परंपराएं, हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विवादास्पद हो सकती हैं, ग्रामीण समुदायों की पर्यावरण के प्रति चिंता को दर्शाती हैं। ये अनुष्ठान न केवल आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सामुदायिक एकजुटता और प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव को भी दर्शाते हैं।

इस घटना ने न केवल सांस्कृतिक, बल्कि राजनीतिक चर्चा को भी जन्म दिया। गुड्डू खान, जो एक भाजपा नेता हैं, ने इस अनुष्ठान में हिस्सा लेकर अपनी जनता के बीच अपनी स्वीकार्यता को और मजबूत किया। यह घटना 2022 की एक अन्य घटना की याद दिलाती है, जब महांराजगंज के विधायक जय मंगल कनौजिया और नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल ने भी इसी तरह की परंपरा में हिस्सा लिया था। महांराजगंज की इस घटना में हालांकि कोई बड़ा राजनीतिक विवाद नहीं हुआ, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या ऐसी परंपराएं आधुनिक भारत में प्रासंगिक हैं।

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