Sambhal: कल्कि नगरी सम्भल में होली की धूम: कहीं अनूठी परंपरा तो कहीं भक्ति के साथ उड़ा गुलाल।
कल्कि नगरी सम्भल में इस वर्ष होली का पर्व हर्षोल्लास, अटूट परंपरा और आपसी भाईचारे के साथ संपन्न हुआ। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक
उवैस दानिश, सम्भल
कल्कि नगरी सम्भल में इस वर्ष होली का पर्व हर्षोल्लास, अटूट परंपरा और आपसी भाईचारे के साथ संपन्न हुआ। नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक चहुंओर रंगों की बौछार और गुझिया की मिठास घुली नजर आई।
सम्भल की होली अपनी एक विशिष्ट पहचान रखती है। जहाँ पूरे देश में होलिका दहन रात्रि के समय किया जाता है, वहीं यहाँ धुलेंडी की सुबह होलिका दहन की परंपरा निभाई गई। बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा दशकों पुरानी है जिसे आज की युवा पीढ़ी भी पूरी श्रद्धा से जीवित रखे हुए है। वही नगर हिंदू सभा के तत्वावधान में बुधवार को नगर के मुख्य मार्गों से भव्य रंग चौपाई निकाली गई। रामलीला मैदान से शुरू होकर यह चौपाई कल्कि विष्णु मंदिर, पंजाबी मंदिर, और डाकखाना होते हुए सूर्य कुंड मंदिर पहुंची। इस दौरान डीजे की धुन पर थिरकते युवा और मनमोहक झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। जगह-जगह फूलों की वर्षा कर चौपाई का जोरदार स्वागत किया गया। अंत में कल्कि विष्णु मंदिर में भगवान को तिलक लगाने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। होली के पावन पर्व पर लोगों ने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया। सुबह से ही लोग टोली बनाकर निकले और गुलाल से एक-दूसरे का चेहरा सराबोर कर दिया। घरों में लजीज पकवानों और गुझिया का दौर चलता रहा। दोपहर के बाद पानी के रंग का समापन हुआ, जिसके बाद शाम को लोगों ने नए वस्त्र धारण कर एक-दूसरे के घर जाकर होली की शुभकामनाएं दीं। होली पर शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। चौपाई मार्ग और संवेदनशील चौराहों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिससे पूरा उत्सव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
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