भ्रूण लेकर कोर्ट पहुंचा पिता, बोला- 'जज साहब अब सबूत दिखाने के लिए शायद मैं भी जिंदा न रहूं', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सनसनी।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में 9 मार्च 2026 को एक बेहद असामान्य और हृदयविदारक मामला सामने आया, जहां रीवा जिले का

Mar 10, 2026 - 14:51
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भ्रूण लेकर कोर्ट पहुंचा पिता, बोला- 'जज साहब अब सबूत दिखाने के लिए शायद मैं भी जिंदा न रहूं', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सनसनी।
भ्रूण लेकर कोर्ट पहुंचा पिता, बोला- 'जज साहब अब सबूत दिखाने के लिए शायद मैं भी जिंदा न रहूं', मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सनसनी।
  • रीवा निवासी दयाशंकर पांडे ने अजन्मे बच्चे का भ्रूण अदालत में पेश किया, पत्नी के गर्भपात पर पुलिस कार्रवाई की मांग
  • जबलपुर बेंच में हड़कंप: पॉलीथीन में भ्रूण लाकर याचिकाकर्ता ने जज से कहा, 'यह मेरे परिवार की त्रासदी का सबूत है'

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में 9 मार्च 2026 को एक बेहद असामान्य और हृदयविदारक मामला सामने आया, जहां रीवा जिले का निवासी दयाशंकर पांडे अपने अजन्मे बच्चे का भ्रूण लेकर अदालत पहुंचे। उन्होंने पॉलीथीन में लिपटा हुआ चार महीने का मृत भ्रूण कोर्ट रूम में पेश किया और जज से कहा कि पुलिस उनकी पत्नी के गर्भपात की शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है, इसलिए वे मजबूरी में यह सबूत लेकर आए हैं। दयाशंकर ने अदालत से कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो शायद वे भी जिंदा न रहें, और यह भ्रूण उनके परिवार के साथ हुई त्रासदी का सबसे बड़ा प्रमाण है। घटना न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की एकलपीठ में सुनवाई के दौरान हुई, जहां याचिकाकर्ता की सुरक्षा जांच के दौरान पॉलीथीन से भ्रूण निकला और कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत भ्रूण को कब्जे में लिया और फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया। दयाशंकर पहले जबलपुर की एक ऑटोमोबाइल कंपनी शुभ मोटर्स में अकाउंटेंट थे, लेकिन कुछ समय पहले नौकरी छूट गई थी। अपडेट्स के अनुसार, यह मामला उनकी पत्नी के साथ सड़क दुर्घटना से जुड़ा है, जिसमें गर्भपात हुआ और पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।

दयाशंकर पांडे ने अपनी याचिका में बताया कि उनकी पत्नी हाल ही में सड़क दुर्घटना का शिकार हुईं, जिसके कारण उनका चार महीने का बच्चा गर्भ में ही मर गया। उन्होंने पुलिस में शिकायत की कि दुर्घटना में लापरवाही बरती गई और आरोपी वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। दयाशंकर का कहना है कि बार-बार थाने जाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई, इसलिए वे मजबूर होकर भ्रूण लेकर हाईकोर्ट पहुंचे ताकि जज खुद सबूत देख सकें। कोर्ट में पहुंचने पर सुरक्षा जांच के दौरान बैग से पॉलीथीन निकली, जिसमें भ्रूण था। इससे कोर्ट रूम में हड़कंप मच गया और सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत कार्रवाई की। न्यायमूर्ति ने मामले को गंभीरता से लिया और पुलिस को निर्देश दिए कि शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करें। अपडेट्स से पता चलता है कि अदालत ने पुलिस को नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई में रिपोर्ट मांगी है। दयाशंकर ने कहा कि यह भ्रूण उनके परिवार की पूरी उम्मीद था, जो अब खो चुका है और वे न्याय की उम्मीद में अदालत आए हैं।

घटना ने हाईकोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता भ्रूण लेकर अंदर पहुंच गया। अपडेट्स के अनुसार, सुरक्षा कर्मियों ने पॉलीथीन को जब्त किया और फोरेंसिक लैब भेज दिया, जहां जांच से मौत का कारण पता लगेगा। दयाशंकर ने अदालत से कहा कि यदि पुलिस कार्रवाई नहीं करती तो वे खुद न्याय के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं, और शायद वे जिंदा न रहें। न्यायमूर्ति ने याचिकाकर्ता को शांत रहने की सलाह दी और कहा कि अदालत मामले की गहराई से जांच करेगी। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच में कोई गंभीर चोट नहीं मिली थी, लेकिन अब भ्रूण की फोरेंसिक रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि गर्भपात दुर्घटना से हुआ या अन्य कारण से। दयाशंकर का परिवार रीवा में रहता है और वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जिससे उनका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। अपडेट्स में पुलिस ने कहा है कि वे मामले को गंभीरता से ले रही है और जल्द एफआईआर दर्ज कर जांच करेगी।

इनसेट: घटना की मुख्य जानकारी याचिकाकर्ता: दयाशंकर पांडे (रीवा निवासी, पूर्व अकाउंटेंट) घटना स्थान: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर पीठ (न्यायमूर्ति हिमांशु जोशी की बेंच) तारीख: 9 मार्च 2026 मुख्य आरोप: पत्नी की सड़क दुर्घटना से गर्भपात, पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की सबूत: चार महीने का मृत भ्रूण पॉलीथीन में लेकर पहुंचे कोर्ट कार्रवाई: भ्रूण जब्त, फोरेंसिक जांच, पुलिस को नोटिस अगली सुनवाई: रिपोर्ट मांगने के बाद तय होगी

यह मामला अदालत में सबूत पेश करने की मजबूरी और पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है। दयाशंकर ने कहा कि वे कई बार थाने गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, इसलिए वे अदालत में भ्रूण लेकर आए। अपडेट्स के अनुसार, कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए कि वे दुर्घटना की पूरी जांच करें और यदि लापरवाही पाई गई तो कार्रवाई करें। भ्रूण की फोरेंसिक रिपोर्ट से पता चलेगा कि गर्भपात का कारण क्या था। दयाशंकर का परिवार अब आर्थिक और भावनात्मक संकट में है, और वे न्याय की उम्मीद में अदालत पर निर्भर हैं। पुलिस ने कहा है कि वे मामले को जल्द निपटाएंगे और यदि जरूरी हुआ तो एफआईआर दर्ज करेंगे।

घटना ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर चर्चा छेड़ दी है, जहां लोग पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं। अपडेट्स से पता चलता है कि कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी किया है और पुलिस को जवाब दाखिल करने को कहा है। दयाशंकर ने अदालत से कहा कि वे न्याय के लिए लड़ेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। यह मामला उन लोगों के लिए सबक है जो पुलिस की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने पर अदालत का सहारा लेते हैं। अपडेट्स में पुलिस ने कहा है कि वे दुर्घटना के आरोपी की तलाश कर रही है और जल्द प्रगति रिपोर्ट दाखिल करेगी।

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