Ayodhya: ट्रांसफर आदेश धरा-धर, कंप्यूटर ऑपरेटरों के इशारे पर चल रहा अयोध्या नगर निगम। 

अयोध्या नगर निगम इन दिनों प्रशासन नहीं, बल्कि आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटरों के इशारों पर चलता नजर आ रहा है। नगर आयुक्त

Jan 24, 2026 - 18:40
 0  10
Ayodhya: ट्रांसफर आदेश धरा-धर, कंप्यूटर ऑपरेटरों के इशारे पर चल रहा अयोध्या नगर निगम। 
ट्रांसफर आदेश धरा-धर, कंप्यूटर ऑपरेटरों के इशारे पर चल रहा अयोध्या नगर निगम। 

अयोध्या: अयोध्या नगर निगम इन दिनों प्रशासन नहीं, बल्कि आउटसोर्सिंग कंप्यूटर ऑपरेटरों के इशारों पर चलता नजर आ रहा है। नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार द्वारा 12 दिसंबर 2025 को जारी किए गए ट्रांसफर आदेश—जो टैक्स और निर्माण विभाग से जुड़े कई लिपिकों व कंप्यूटर ऑपरेटरों पर लागू थे—कागजों में सख्त, मगर ज़मीनी हकीकत में दम तोड़ते दिख रहे हैं। आदेश के महीनों बाद भी कर्मचारी “चार्ज लेकर” पुराने विभागों में जमे हुए हैं और वही काम कर रहे हैं मानो ट्रांसफर एक औपचारिक नोटिस भर हो।

सूत्रों के मुताबिक, यह ट्रांसफर आदेश नगर निगम की लीक हुई ऑडिट रिपोर्ट से जुड़ा था। मकसद साफ था—विभागीय जकड़न तोड़ना। लेकिन हुआ उलटा। आउटसोर्सिंग ऑपरेटरों की धौंस के आगे नगर आयुक्त का आदेश बौना पड़ गया। चर्चा है कि इन ऑपरेटरों को सत्ता पक्ष के पार्षदों का खुला संरक्षण हासिल है, जिससे आदेशों की धज्जियां उड़ना ‘सिस्टम’ का हिस्सा बन चुका है। नगर निगम के एक जिम्मेदार अभियंता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया—“जिस विभाग में ट्रांसफर हुआ, वहां सिर्फ हस्ताक्षर कर दिए जाते हैं। असली काम आज भी पुराने विभाग में ही हो रहा है। विभागाध्यक्ष जानते हैं, फिर भी आंख मूंदे बैठे हैं।”

  • अपर नगर आयुक्त बेबस, सिस्टम बेकाबू

अधिष्ठान प्रभारी अपर नगर आयुक्त सुमित कुमार की स्थिति भी दयनीय बताई जा रही है। आदेश लागू कराने की कोशिशें ‘ऑपरेटर नेटवर्क’ के सामने बेअसर साबित हो रही हैं। यह वही नेटवर्क है जिसने वर्षों से कर विभाग को अपनी पकड़ में ले रखा है।

कर विभाग में 7 से 10 वर्षों से राजस्व निरीक्षकों के जोन तक नहीं बदले गए। इसके पीछे सत्ता पक्ष के पार्षदों की लामबंदी की चर्चा है। सूत्र कहते हैं—इनका जोन बदलना नगर आयुक्त के लिए “बिना दूध के दही जमाने” जैसा है। निरीक्षक वार्डों में अपनी पैठ बना चुके हैं और प्रशासनिक फेरबदल को मज़ाक समझते हैं। अयोध्या जोन में विस्तारित क्षेत्रों में टैक्स बढ़ोतरी के नाम पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप हैं। नामांतरण और टैक्स से जुड़े प्रार्थना पत्र महीनों तक लंबित पड़े रहते हैं। एक शिकायतकर्ता के अनुसार, अगस्त में दिया गया प्रार्थना पत्र चार महीने बाद भी जस का तस है—जबकि नियम 45 दिन का है।

  • कर्मचारी नहीं सुन रहे, क्या करूं?

मामले पर सहायक नगर आयुक्त अशोक कुमार गुप्ता का कथन सिस्टम की सड़ांध उजागर करता है “कर्मचारी नहीं सुन रहे, क्या करूं… नगर निगम के कर्मचारी नहीं सुधर सकते।” यह बयान अपने आप में बहुत कुछ कह देता है जब अधिकारी ही अपने निर्देश लागू कराने में राजस्व निरीक्षकों के आगे बेबस हों, तो व्यवस्था किसके हाथ में है? अयोध्या नगर निगम में प्रशासनिक आदेशों का हाल यह है कि वे कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखते हैं, ज़मीन पर नहीं। जब आउटसोर्सिंग ऑपरेटर सत्ता संरक्षण में आदेशों को ठेंगा दिखाएं, अधिकारी बेबस हों और फाइलें धूल फांकें तो सवाल सीधा है: नगर निगम चला कौन रहा है आयुक्त या ‘ऑपरेटर राज’?

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।