अयोध्या की बीकापुर सीट पर भाजपा में उबाल: संजीव सिंह, टिल्लू फैक्टर और अमित की परीक्षा।

अयोध्या जनपद की बीकापुर विधानसभा सीट पर 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन भाजपा के भीतर सियासी तापमान अभी से चढ़ने लगा है। मौजूदा विधायक

By INA News Desk
Jan 24, 2026 - 18:32
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अयोध्या की बीकापुर सीट पर भाजपा में उबाल: संजीव सिंह, टिल्लू फैक्टर और अमित की परीक्षा।
अयोध्या की बीकापुर सीट पर भाजपा में उबाल: संजीव सिंह, टिल्लू फैक्टर और अमित की परीक्षा।

अयोध्या जनपद की बीकापुर विधानसभा सीट पर 2027 का चुनाव अभी दूर है, लेकिन भाजपा के भीतर सियासी तापमान अभी से चढ़ने लगा है। मौजूदा विधायक अमित सिंह चौहान के लिए अगला चुनाव आसान नहीं दिख रहा। पार्टी के अंदरखाने से लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं तक एक सवाल गूंज रहा है—क्या भाजपा बीकापुर में नया चेहरा उतारेगी?

भाजपा सूत्रों के मुताबिक बीकापुर में इस बार मुकाबला केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि संगठन और वर्तमान विधायक के बीच संतुलन का भी है। पार्टी के भीतर यह धारणा मजबूत हो रही है कि संगठनात्मक पकड़ वाले नेता 2027 में भारी पड़ सकते हैं। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव सिंह को अमित सिंह चौहान के संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। संजीव सिंह दो बार से निर्विवादित जिला अध्यक्ष हैं। संगठन, बूथ स्तर और कार्यकर्ताओं में उनकी गहरी पैठ मानी जाती है। युवा मोर्चा से लेकर जिला महामंत्री तक की भूमिका निभा चुके संजीव सिंह का पारिवारिक आधार भी मजबूत है—उनकी पत्नी बीकापुर से ब्लॉक प्रमुख रह चुकी हैं। यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनकी दावेदारी को सबसे मजबूत माना जा रहा है।

  • ‘टिल्लू फैक्टर’ और लल्लू सिंह का असर

दूसरा बड़ा नाम है धर्मेंद्र प्रताप सिंह ‘टिल्लू’। भाजपा की शुरुआती पीढ़ी के नेता और पूर्व सांसद लल्लू सिंह के भतीजे माने जाने वाले टिल्लू दो बार से जिला सहकारी बैंक (अयोध्या–अम्बेडकर नगर) के सभापति हैं। संगठन में युवा मोर्चा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विधानसभा व जनपद प्रभारी जैसे पदों पर काम कर चुके टिल्लू की पहचान एक मजबूत संगठनात्मक चेहरे की है। हालांकि, पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि पूर्व में जिला अध्यक्ष पद की दौड़ में रामचंदर यादव के समर्थन के बावजूद लल्लू सिंह के विरोध के कारण वे आगे नहीं बढ़ सके। सवाल यह है कि 2027 में क्या वही समीकरण फिर उभरेंगे या पार्टी नई रणनीति अपनाएगी?

बीकापुर की राजनीति में निषाद वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। बसपा के पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह ‘बब्लू’ निषाद एक बार फिर मैदान में उतरने के संकेत दे रहे हैं। चर्चा है कि यदि निषाद पार्टी भाजपा गठबंधन में इस सीट की मांग करती है, तो बब्लू निषाद को मौका मिल सकता है। निषाद पार्टी अध्यक्ष संजय निषाद की भूमिका यहां अहम मानी जा रही है। बीकापुर में सामाजिक संतुलन के साथ व्यापारी वर्ग भी प्रभावशाली है। इसी समीकरण के तहत राकेश जायसवाल का नाम उभर रहा है। वे भाजपा जिला मंत्री सरोज जायसवाल के छोटे भाई हैं और उनकी पत्नी रश्मि जायसवाल दो बार से जिला पंचायत सदस्य हैं। लगातार सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में सक्रियता उनकी दावेदारी को मजबूती देती है। इसके अलावा सुनील शास्त्री और कृष्ण कुमार पांडेय ‘खुन्नू’ भी टिकट की दौड़ में बताए जा रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि भाजपा के भीतर विकल्पों की कमी नहीं है।

  • क्या अमित सिंह चौहान के लिए कठिन होगी राह?

इन तमाम नामों और समीकरणों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या मौजूदा विधायक अमित सिंह चौहान 2027 में टिकट बचा पाएंगे? पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के शब्दों में, “इस बार चेहरा नहीं, संगठन और जातीय-सामाजिक संतुलन निर्णायक होगा। बीकापुर में भाजपा की असली परीक्षा 2027 से पहले ही शुरू हो चुकी है। यह सीट अब सिर्फ चुनावी नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन की प्रयोगशाला बनती जा रही है।

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