Ayodhya: जब तक ट्रक भजन गाते थे, सब ठीक... अब लोढ़ा ग्रुप पर 1.52 करोड़ का जुर्माना।
रामनगरी अयोध्या में इन दिनों विकास का मतलब बदला-बदला सा है। यहां अब ईंट, सीमेंट और बालू को ही संस्कार कहा जा रहा है। सरयू तट के पास
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में इन दिनों विकास का मतलब बदला-बदला सा है। यहां अब ईंट, सीमेंट और बालू को ही संस्कार कहा जा रहा है। सरयू तट के पास अत्याधुनिक आवासीय परियोजना विकसित कर रहे द हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा ग्रुप को प्रशासन ने अचानक “याद” दिलाया कि विकास भी नियमों से होता है। नतीजा—ग्रुप के महाप्रबंधक ओमप्रकाश पांडेय के खिलाफ 1 करोड़ 52 लाख रुपये की रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी। आरसी कलेक्ट्रेट से चलकर सदर तहसील पहुंच चुकी है। आरोप है अवैध खनन। लेकिन सवाल यह है कि यह अवैध खनन तब अवैध क्यों नहीं था, जब ट्रक-ट्रॉली दिन-रात सरयू किनारे भजन गाते हुए दौड़ रही थीं?
बता दे कि इसी प्रोजेक्ट में अमिताभ बच्चन ने अपने पिता हरिवंश राय बच्चन की स्मृति में सांस्कृतिक केंद्र के लिए प्लॉट लिया है। साथ में पांच सितारा होटल भी आकार ले रहा है। लोकेशन—एनटीपीसी सोलर प्लांट के पास। उधर बगल में 700 एकड़ में ‘नव्य अयोध्या’ बसाई जा रही है, चौड़ी सड़कें बन रही हैं। यानी विकास ऐसा कि नियम खुद किनारे बैठकर दर्शन कर रहे हैं। खनन विभाग मानता है कि बंधे के किनारे जमीन को करीब एक मीटर ऊंचा करने के लिए बालू-मिट्टी की पटाई कराई गई। लेकिन मज़ा देखिए आज तक खनन विभाग ने एक भी नोटिस नहीं दिया। मतलब साफ है—
पटाई दिखी, ट्रक दिखे, मिट्टी दिखी, लेकिन नोटिस नहीं दिखा।
लोढ़ा ग्रुप ने बताया कि 24 दिसंबर 2025 को नोटिस मिला, जिसके बाद मंडलायुक्त के यहां अपील कर दी गई है।
सदर तहसीलदार कहते हैं—वसूली का जिम्मा संग्रह अमीन को दे दिया गया है, प्रपत्र-36 भी जारी है। यानि सिस्टम बोला अब याद आ गया है, अब वसूली होगी।”बड़ा सवाल
अगर खनन अवैध था तो पहले रोक क्यों नहीं लगी? खनन विभाग अब तक चुप क्यों है? क्या आरसी सिर्फ कागज़ी कार्रवाई है? रामनगरी में सवाल उठ रहा है क्या यहां अवैध खनन अपराध है, या सिर्फ ‘समय आने पर याद की जाने वाली औपचारिकता’?
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