ब्रिस्टल म्यूजियम में ब्रिटिश साम्राज्य संग्रह की बड़ी चोरी- हाथीदांत की बुद्ध मूर्ति समेत 600 से अधिक औपनिवेशिक काल के कीमती कलाकृतियां लूटी गईं
ब्रिस्टल म्यूजियम के ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल संग्रह से 600 से अधिक बेशकीमती वस्तुओं की चोरी का मामला सामने आया है, जिसमें भारत
ब्रिस्टल म्यूजियम के ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल संग्रह से 600 से अधिक बेशकीमती वस्तुओं की चोरी का मामला सामने आया है, जिसमें भारत के औपनिवेशिक काल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण कलाकृतियां शामिल हैं। यह चोरी 25 सितंबर 2025 को रात 1 बजे से 2 बजे के बीच हुई, जब चार संदिग्ध पुरुषों ने म्यूजियम से जुड़ी एक भवना में घुसकर संग्रह को निशाना बनाया। संग्रह में ब्रिटिश उपनिवेशों से प्राप्त घरेलू सामान, स्मृति चिन्ह, फोटोग्राफ, दस्तावेज और कलाकृतियां शामिल हैं, जो 19वीं शताब्दी के अंत से हाल के समय तक ब्रिटेन और उसके उपनिवेशों के बीच संबंधों को दर्शाती हैं। चोरी की सूचना दो महीने बाद सार्वजनिक की गई, जब एवॉन एंड सोमरसेट पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जारी कर जनता से सहायता की अपील की। यह घटना म्यूजियम के लिए सांस्कृतिक हानि का बड़ा झटका है, क्योंकि ये वस्तुएं ब्रिटिश साम्राज्य के जटिल इतिहास को समझने का स्रोत हैं। चोरी ब्रिस्टल आर्काइव्स में संग्रहित ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल संग्रह से हुई, जो पहले ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल म्यूजियम का हिस्सा था।
संग्रह में हजारों वस्तुएं हैं, जो ब्रिटेन और उसके उपनिवेशों के बीच संबंधों को दर्शाती हैं। चोरों ने 600 से अधिक वस्तुओं को चुराया, जिनमें सैन्य इंसिग्निया, आभूषण, सजावटी कलाकृतियां, फोटोग्राफ, फिल्में और दस्तावेज शामिल हैं। ये वस्तुएं मुख्य रूप से ब्रिटिश नागरिकों द्वारा दान की गई थीं, जो उपनिवेशों में रहते या काम करते थे। चोरी की गई वस्तुओं में भारत से जुड़ी कई दुर्लभ कलाकृतियां हैं, जैसे हाथीदांत से बनी बुद्ध की मूर्ति, जो पत्थर के आधार पर स्थापित है और सात सर्प फनों से सजाई गई है। यह मूर्ति औपनिवेशिक काल की एक महत्वपूर्ण कलाकृति है, जो ब्रिटिश शासन के दौरान भारत से प्राप्त हुई। इसके अलावा, ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी की कमर बेल्ट बकल, जो कंपनी के आदर्श वाक्य "ऑस्पिशियो रेजिस एट सेनाटस एंज्लिया" से अंकित है, भी चोरी हो गई।
चोरी की गई अन्य वस्तुओं में हाथीदांत से तराशा गया एक हाथी का सजावटी मॉडल शामिल है, जिसमें एबोनी की जड़ाई वाली आंखें हैं। यह वस्तु भारत के औपनिवेशिक काल से जुड़ी है और ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा एकत्रित स्मृति चिन्हों का हिस्सा है। संग्रह में 1838 का अमेरिकी मुक्ति टोकन भी था, जो गुलामी उन्मूलन को बढ़ावा देने के लिए जारी किया गया था। इसके साथ ही जहाज का लालटेन, सैन्य बेल्ट बकल और विभिन्न सैन्य इंसिग्निया भी चुराए गए। ये वस्तुएं ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती हैं, जिसमें भारत, अफ्रीका और अन्य उपनिवेशों से प्राप्त सामग्री शामिल है। चोरी की कुल अनुमानित कीमत का खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इनकी सांस्कृतिक महत्वता को देखते हुए इसे अपूरणीय हानि माना जा रहा है। संग्रह में उपनिवेशों में रहने वाले ब्रिटिश परिवारों के निजी सामान, जैसे पत्र, डायरी और फोटोग्राफ, भी थे, जो ऐतिहासिक दस्तावेज के रूप में मूल्यवान हैं। चोरी की घटना ब्रिस्टल की एक भवना में हुई, जहां संग्रह को स्टोर किया जा रहा था। चार संदिग्ध पुरुष, जो हूडियां और कैप पहने हुए थे, रात के समय भवना में घुसे। सीसीटीवी फुटेज में उनके धुंधले चेहरे दिखाई दे रहे हैं, लेकिन पुलिस ने इन्हें पहचानने के लिए जनता से अपील की है। एवॉन एंड सोमरसेट पुलिस के अनुसार, चोरों ने व्यवस्थित तरीके से वस्तुओं को चुना और ले जाया। जांच में फोरेंसिक विश्लेषण, सीसीटीवी समीक्षा और संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ शामिल है। पुलिस ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, जहां लोग सुरक्षित रूप से जानकारी साझा कर सकते हैं। डिटेक्टिव कांस्टेबल डैन बर्गन ने कहा कि चोरी की गई वस्तुएं सांस्कृतिक महत्व की हैं और शहर के लिए बड़ा नुकसान हैं। उन्होंने जनता से सहयोग की अपेक्षा जताई है, ताकि अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके।
ब्रिस्टल सिटी काउंसिल ने चोरी पर गहरा दुख व्यक्त किया है। काउंसिल के संस्कृति और रचनात्मक उद्योग विभाग के प्रमुख फिलिप वॉकर ने कहा कि ये कलाकृतियां ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल संग्रह का हिस्सा हैं, जो ब्रिटेन और उसके उपनिवेशों के बीच संबंधों को दर्शाती हैं। चोरी के बाद सुविधा की सुरक्षा को कड़ा कर दिया गया है, और म्यूजियम समुदाय के सदस्यों को सूचित किया गया है। काउंसिल ने हाथीदांत का हाथी, बुद्ध की मूर्ति, जहाज का लालटेन और मुक्ति टोकन की छवियां जारी की हैं, ताकि इनकी पहचान आसान हो। संग्रह को ब्रिस्टल आर्काइव्स में रखा जाता है, जो म्यूजियम का हिस्सा है। यह संग्रह पहले ब्रिटिश साम्राज्य और राष्ट्रमंडल म्यूजियम का था, जो 2013 में बंद हो गया था। वस्तुओं को दान के माध्यम से एकत्र किया गया था, जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद के जटिल इतिहास को उजागर करती हैं। भारत से जुड़ी चोरी की गई वस्तुएं औपनिवेशिक काल की याद दिलाती हैं। हाथीदांत की बुद्ध मूर्ति, जो सात सर्प फनों वाले पत्थर के आधार पर बनी है, ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा भारत से लाई गई थी। ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी की कमर बेल्ट बकल कंपनी के इतिहास का एक हिस्सा है, जो 1600 में स्थापित हुई थी और भारत में ब्रिटिश व्यापार और शासन का प्रतीक बनी। हाथी का हाथीदांत मॉडल भी भारत के वन्यजीव और शिल्पकला से जुड़ा है। ये वस्तुएं ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान भारत से निर्यात की गई कलाकृतियों का उदाहरण हैं। चोरी से भारत के औपनिवेशिक इतिहास से जुड़े दस्तावेज प्रभावित हुए हैं, जो ब्रिटिश-भारतीय संबंधों को समझने में सहायक थे। पुलिस ने इन वस्तुओं की वसूली पर जोर दिया है, क्योंकि इनकी बिक्री काला बाजार में संभव है।
चोरी की घटना ब्रिस्टल के इतिहास से जुड़ी है। 2020 में एंटी-रैसिज्म प्रदर्शनकारियों ने 17वीं शताब्दी के गुलाम व्यापारी एडवर्ड कोल्स्टन की मूर्ति को उखाड़ फेंका था, जिसे बाद में म्यूजियम में प्रदर्शित किया गया। यह घटना ब्रिटिश उपनिवेशवाद के विरासत पर बहस को जन्म देती है। चोरी के बाद म्यूजियम ने संग्रह की सुरक्षा बढ़ाई है, जिसमें बेहतर लॉकिंग सिस्टम और निगरानी शामिल हैं। पुलिस की जांच जारी है, और अपराधियों की पहचान के लिए जनता का सहयोग मांगा जा रहा है। चोरी की सूचना देरी से जारी करने का कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन इससे जांच प्रभावित नहीं हुई। संग्रह में चोरी की गई वस्तुएं ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न चरणों को कवर करती हैं। 19वीं शताब्दी के अंत से लेकर 20वीं शताब्दी तक के दस्तावेज उपनिवेशों में ब्रिटिश जीवन को दर्शाते हैं। भारत से प्राप्त वस्तुएं ईस्ट इंडिया कंपनी के युग से जुड़ी हैं, जब कंपनी ने व्यापार के माध्यम से राजनीतिक नियंत्रण स्थापित किया। बुद्ध मूर्ति जैसे धार्मिक कलाकृतियां ब्रिटिश संग्रहालयों में भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधित्व को दिखाती हैं। मुक्ति टोकन गुलामी उन्मूलन आंदोलन से जुड़ा है, जो साम्राज्य के नैतिक द्वंद्व को उजागर करता है। चोरी से संग्रह की पूर्णता प्रभावित हुई है, जो शोधकर्ताओं और इतिहासकारों के लिए हानि है। पुलिस ने चोरी को उच्च मूल्य की बर्बादी बताया है। संदिग्धों के वर्णन में चार सफेद पुरुष शामिल हैं, जो रात के समय सक्रिय थे। सीसीटीवी फुटेज से पता चलता है कि उन्होंने व्यवस्थित तरीके से वस्तुओं को चुना। जांच में फिंगरप्रिंट और डीएनए विश्लेषण का उपयोग हो रहा है। ब्रिस्टल सिटी काउंसिल ने कहा कि संग्रह शहर की सांस्कृतिक धरोहर है, और इसकी रक्षा प्राथमिकता है। चोरी के बाद म्यूजियम ने डिजिटल संग्रहण पर जोर दिया है, ताकि वस्तुओं की जानकारी सुरक्षित रहे। जनता से अपील है कि यदि कोई वस्तु काला बाजार में दिखे, तो सूचना दी जाए।
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