क्या भाजपा राज्यसभा सांसद संजय सेठ की मुलाकात क्षेत्र प्रचारक अनिल जी से होना कोई बड़ा विषय है?
जब से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघarti के और भाजपा के कुछ पदाधिकारियों की लखनऊ की मीटिंग में यह चर्चा हुई है कि जनवरी में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान
रिपोर्ट- सौरभ सोमवंशी।
जब से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघarti के और भाजपा के कुछ पदाधिकारियों की लखनऊ की मीटिंग में यह चर्चा हुई है कि जनवरी में एक भव्य कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट करेगा। तब से बहुत सारे लोगों के पेट में दर्द शुरू हो गया है उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता में पत्रकारिता को कलंकित कर देने वाले कुछ पागल कुत्ते भी अपनी बौखलाहट नहीं छुपा पा रहे हैं। पागल कुत्ता शब्द का प्रयोग मैं इसलिए कर रहा हूं क्योंकि पागल कुत्ते की आदत होती है कि वह लगातार भौंकता रहता है।
ऐसे ही एक पत्रकार को इस बात से समस्या है कि देश के प्रतिष्ठित व्यवसायी और भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सेठ से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने मुलाकात क्यों किया।
लगातार सोशल मीडिया पर भौकते रहने वाले पत्रकार ने अपने सोशल मीडिया के पोस्ट में लिखा है कि जब संजय सेठ भाजपा के किसी सांगठनिक पद पर नहीं है तो वह पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल जी से कौन से संगठन की चर्चा कर रहे थे। क्या भारतीय जनता पार्टी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को जो लोग अपनी सेवा देना चाहते हैं या फिर उसके लिए काम करना चाहते हैं उनका संगठन में रहना या पदाधिकारी बने रहना आवश्यक है ।
अपने पोस्ट में लगातार अपने आप को सुकरात और प्लेटो से बड़ा दार्शनिक घोषित करने का प्रयास करने वाला तथाकथित पत्रकार अब अपनी बौखलाहट के अंतिम चरण में इसलिए पागल हो गया है क्योंकि उसको इतना तो पता है कि भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता को यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हिंदुत्व के चेहरे के रूप में यदि प्रोजेक्ट करने जा रही है तो उसके मायने क्या हो सकते हैं? वास्तव में उसके परिणाम से वह पत्रकार बौखलाया हुआ है।
देश के प्रतिष्ठित पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री ने एक बार कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लंबे समय से एक ऐसे नेता की तलाश थी जो मंच पर खड़ा हो और हाथ दिखा दे बस उसके इतना कर देने भर से जनता में संदेश चला जाए की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा क्या चाहती है और उसको ऐसे नेता के रूप में योगी आदित्यनाथ मिल चुके हैं।
गोविंद बल्लभ पंत से लेकर के अभी तक के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के इतिहास में सबसे ज्यादा 8 वर्ष तक मुख्यमंत्री का कार्यकाल पूरा करने के रिकार्ड के अलावा 5 साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा करने और दूसरे कार्यकाल में सफलतापूर्वक सत्ता में आने का रिकॉर्ड बनाने वाले उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही भाजपा के भविष्य है, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेंट को पूरा करने वाले चेहरे का नाम योगी आदित्यनाथ है।
सुप्रीम कोर्ट की प्रतिष्ठित अधिवक्ता योगी आदित्यनाथ लोक कल्याण के पथ पर नामक पुस्तक की लेखिका Rreena N Singh जी के अनुसार वही योगी आदित्यनाथ जिसके दादा गुरु महंत दिग्विजय नाथ ने राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के आंदोलन को न केवल एक नई दिशा दी बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त और मजबूत भी किया।
जिस राम मंदिर आंदोलन से भारतीय जनता पार्टी को ऑक्सीजन मिला उस राम मंदिर में 21 दिसंबर 1949 की रात को रामलला के प्रकटीकरण के दौरान योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु दिग्विजय नाथ उस दौरान मौजूद थे इसके अलावा आजादी के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के पहले से ही गोरखनाथ मठ के संतों ने राम मंदिर के लिए संघर्ष शुरू कर दिया था।
इसके अलावा गोरखनाथ मठ की सामाजिक समरसता
जिसका पालन करते हुए 1989 में महंत अवेद्यनाथ ने राम मंदिर शिलान्यास की पहली ईट एक दलित कामेश्वर चौपाल से रखवाई।
चांडाल कहे जाने वाले डोम राजा के घर जाकर भोजन किया।
बिहार के सैकड़ो मंदिरों में दलित पुजारी की नियुक्ति करवाई
इस तरह के गोरखनाथ मठ के तमाम इतिहास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को पता हैं ।
उसे पता है कि ऊंच नीच के भेदभाव को तोड़कर के सामाजिक समरसता के माध्यम से हिंदुत्व को मजबूत करने वाला यदि कोई है तो वह गोरखनाथ मठ के वर्तमान पीठाधीश्वर भगवा वेशधारी उत्तर प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी महाराज हैं वही योगी आदित्यनाथ जिन्होंने उत्तर प्रदेश से न केवल अपराध को समाप्त किया बल्कि अपराधियों को भी समाप्त कर दिया।
उस योगी आदित्यनाथ के खिलाफ उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ी गैंग जो सक्रिय थी और उस गैंग के कहने पर जो पत्रकार लगातार भौंकते रहते थे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बैठक मे उनका देश के हिंदू हृदय सम्राट के रूप में प्रोजेक्ट करने की चर्चा मात्र से हलचल होना स्वाभाविक ही है।
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