Saharanpur: सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस- गर्दन का दर्द जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए- डॉ, अमिताभ

आज के समय में लगभग हर व्यक्ति ने कभी न कभी लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने या गलत तरीके से सोने के बाद गर्दन में अकड़न महसूस

Nov 14, 2025 - 20:30
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Saharanpur: सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस- गर्दन का दर्द जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए- डॉ, अमिताभ
सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस- गर्दन का दर्द जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए- डॉ, अमिताभ

सहारनपुर: आज के समय में लगभग हर व्यक्ति ने कभी न कभी लंबे समय तक कंप्यूटर पर काम करने या गलत तरीके से सोने के बाद गर्दन में अकड़न महसूस की होगी। लेकिन जब यह दर्द बार-बार लौटकर आए या हाथों में झनझनाहट और कमजोरी महसूस होने लगे, तो यह सिर्फ सामान्य अकड़न नहीं बल्कि सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस हो सकता है, जिसे आमतौर पर गर्दन की रीढ़ की “वियर एंड टियर” स्थिति कहा जाता है।

उम्र बढ़ने के साथ, हमारी रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क (जो कुशन की तरह काम करती हैं) में पानी और लचीलापन कम हो जाता है। इसके कारण हड्डियों के किनारों पर छोटे-छोटे उभार (बोन स्पर) बनने लगते हैं। यह बदलाव नसों के लिए जगह कम कर सकते हैं या रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) पर दबाव डाल सकते हैं। इसी वजह से यह बीमारी केवल गर्दन के दर्द तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हाथों में दर्द या चलने में दिक्कत जैसे लक्षण भी पैदा कर सकती है।

मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. अमिताभ गोयल ने बताया कि “40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह समस्या अधिक पाई जाती है। लंबे समय तक डेस्क पर बैठकर काम करने वाले, गलत पॉश्चर रखने वाले, पहले से किसी गर्दन की चोट झेल चुके या जो लोग ऊपरी शरीर का व्यायाम नहीं करते इन सभी में इसका खतरा अधिक होता है। लगातार गर्दन में दर्द और अकड़न, कंधे या हाथ तक फैलता हुआ दर्द, हाथों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी ये सभी चेतावनी के संकेत हैं। गंभीर मामलों में संतुलन बिगड़ना, चीज़ें गिरा देना या पेशाब पर नियंत्रण खो देना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, जो स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव (मायलोपैथी) के संकेत हैं और तुरंत चिकित्सकीय जांच की आवश्यकता होती है।“

डॉ. अमिताभ ने आगे बताया कि “सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस का इलाज ज़्यादातर मामलों में जीवनशैली में बदलाव से शुरू होता है जैसे एर्गोनोमिक वर्क सेटअप, सहायक तकिया, और स्क्रीन से नियमित अंतराल पर ब्रेक लेना। फिजियोथेरेपी के ज़रिए गर्दन और कंधे के स्ट्रेचेज़, पॉश्चर करेक्शन और मांसपेशियों को मज़बूत करने वाले एक्सरसाइज़ मददगार होते हैं। दर्द या सूजन कम करने के लिए साधारण पेनकिलर या एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाइयां दी जाती हैं। कभी-कभी गंभीर दर्द में थोड़े समय के लिए सॉफ्ट नेक कॉलर का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक इसका इस्तेमाल हानिकारक हो सकता है। जब स्पाइनल कॉर्ड पर अत्यधिक दबाव हो या महीनों की थेरेपी के बाद भी सुधार न दिखे, तब न्यूरो-स्पाइनल सर्जन द्वारा सर्जरी पर विचार किया जाता है।“

कंप्यूटर स्क्रीन हमेशा आंखों के स्तर पर रखें, फोन को कंधे और कान के बीच दबाकर बात करने से बचें, सोते समय ऐसा तकिया चुनें जो गर्दन की नैचुरल कर्व को सपोर्ट करे। नियमित शारीरिक गतिविधि करें मजबूत पीठ और कंधे की मांसपेशियां गर्दन पर तनाव को कम करती हैं। सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस आम है और अक्सर नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन नसों या रीढ़ से जुड़े चेतावनी संकेतों को कभी नज़रअंदाज़ न करें। समय रहते न्यूरो-स्पाइनल सर्जन से जांच, सही डायग्नोसिस और कुछ सरल दैनिक आदतों में बदलाव से आप अपनी गर्दन और जीवन दोनों को स्वस्थ रख सकते हैं।

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