Pratapgarh: बेल्हा की मिट्टी का चमकता सितारा: भोजपुरी फिल्मों में खलनायक बनकर छाए प्रेम दूबे।
प्रतापगढ़ की बेल्हा धरती हमेशा से प्रतिभाओं की जननी रही है। यहां की मिट्टी ने कला, राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में कई ऐसे
प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ की बेल्हा धरती हमेशा से प्रतिभाओं की जननी रही है। यहां की मिट्टी ने कला, राजनीति और समाज सेवा के क्षेत्र में कई ऐसे नाम दिए हैं जिन्होंने देश-विदेश तक अपनी पहचान बनाई है। इसी कड़ी में भोजपुरी सिनेमा के अभिनेता प्रेम दूबे का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है, जिन्होंने अपने अभिनय और मेहनत के दम पर फिल्म जगत में खास मुकाम हासिल किया है।
प्रतापगढ़ जिले के कुंडा क्षेत्र के जगनीपुर कुंदहा गांव में ब्राह्मण परिवार में जन्मे प्रेम दूबे ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जौनपुर के विवेकानंद इंटर कॉलेज, बेलवार से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। बचपन से ही उन्हें गायकी और अभिनय का शौक था। स्कूल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों, नाटक मंचन और रामलीला में वे बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे, जिससे उनके भीतर अभिनय की रुचि लगातार मजबूत होती गई।
अपने सपनों को साकार करने के लिए वर्ष 2003 में प्रेम दूबे मुंबई पहुंचे। वहां कई वर्षों तक संघर्ष, मेहनत और धैर्य के साथ काम करते हुए उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनानी शुरू की। उन्हें पहला बड़ा मौका 2005 में भोजपुरी फिल्म “नचनिया” से मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे फिल्मों की दुनिया में अपनी मजबूत जगह बना ली।
प्रेम दूबे ने अपने करियर में अब तक करीब 250 से अधिक फिल्मों में काम किया है। फिल्म “लहू के दो रंग” में निभाया गया उनका “हसुआ” किरदार काफी लोकप्रिय हुआ। फिल्म का संवाद “हसुआ हंसे ला त मुंडी कटे ला” दर्शकों के बीच काफी चर्चित रहा और इसी भूमिका ने उन्हें भोजपुरी सिनेमा में खलनायक के रूप में खास पहचान दिलाई।
उन्होंने कई चर्चित फिल्मों जैसे नचनिया, दक्षिण भारतीय बहू, पति दंग बीबी दबंग और मुनिया में अपने अभिनय का प्रभाव छोड़ा। इसके अलावा टीवी धारावाहिक झांसी की रानी और मुमताज में भी उन्होंने अभिनय किया है। अपने करियर में प्रेम दूबे ने अभिनेता रवि किशन, राजपाल यादव, यशपाल शर्मा, सुधा चंद्रन, अभिमन्यु सिंह, दिनेश लाल ‘निरहुआ’, पवन कुमार और खेसारी लाल यादव जैसे कई दिग्गज कलाकारों के साथ काम किया है।
प्रेम दूबे बताते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें आगे बढ़ने का मार्गदर्शन प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक मंजुल ठाकुर से मिला। उन्होंने मंजुल ठाकुर को अपना गुरु मानते हुए उनके साथ सहायक निर्देशक के रूप में भी काम किया। वर्ष 2011 में मंजुल ठाकुर के निर्देशन में बनी फिल्म “लहू के दो रंग” से उन्हें खलनायक के रूप में खास पहचान मिली।
प्रेम दूबे का कहना है कि लगन, मेहनत और धैर्य से ही सफलता हासिल की जा सकती है। उनका मानना है कि लक्ष्य जितना बड़ा होता है, संघर्ष भी उतना ही कठिन होता है। समय के साथ तालमेल बैठाकर लगातार प्रयास किया जाए तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है।
आज प्रेम दूबे भोजपुरी सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बना चुके हैं और अपने अभिनय से प्रतापगढ़ की बेल्हा धरती का नाम रोशन कर रहे हैं।
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