Hardoi: पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण, स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित हुए विशेष क्लिनिक

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के क्रियान्वयन के 10 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद के सामुदायिक

Jun 9, 2026 - 20:01
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Hardoi: पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण, स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित हुए विशेष क्लिनिक
पीएम सुरक्षित मातृत्व अभियान के 10 वर्ष पूर्ण, स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित हुए विशेष क्लिनिक

हरदोई: प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) के क्रियान्वयन के 10 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर विशेष पीएमएसएमए क्लिनिक आयोजित किए गए। इन क्लिनिकों में गर्भवती महिलाओं को प्रसवपूर्व जांच, आवश्यक परामर्श एवं विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भवनाथ पांडे ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) की शुरुआत वर्ष 2016 में गर्भवती महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण एवं सम्मानजनक प्रसवपूर्व स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। अभियान के तहत गर्भावस्था की दूसरी एवं तीसरी तिमाही की महिलाओं की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा नियमित जांच की जाती है। साथ ही एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की समय रहते पहचान कर उनका समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है।

उन्होंने बताया कि प्रारंभ में यह अभियान प्रत्येक माह की 9 तारीख को आयोजित किया जाता था, लेकिन गर्भवती महिलाओं को अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अब 1, 9, 16 और 24 तारीख को भी विशेष जांच दिवस आयोजित किए जाते हैं।

इस वर्ष अभियान की थीम ‘पीएमएसएमए के 10 वर्ष : सुरक्षित गर्भावस्था, स्वस्थ माताएं एवं सशक्त भारत’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि अभियान ने बीते एक दशक में सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने, जोखिम वाली गर्भावस्थाओं के बेहतर प्रबंधन तथा गर्भवती महिलाओं को समयबद्ध जांच एवं परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि अभियान के तहत पिछले 10 वर्षों के दौरान जनपद में लगभग 3.54 लाख गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) की गई, जिनमें 31,829 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान कर उनका समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। यह अभियान गर्भावस्था के दौरान संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने बताया कि मंगलवार को आयोजित विशेष पीएमएसएमए क्लिनिकों में कुल 4,214 गर्भवती महिलाओं की प्रसवपूर्व जांच (एएनसी) की गई। जांच के दौरान 564 उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं (एचआरपी) की पहचान की गई, जिनका समयबद्ध एवं समुचित प्रबंधन सुनिश्चित किया गया। अभियान के अंतर्गत 1,387 गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड भी कराया गया, जिससे गर्भावस्था संबंधी संभावित जटिलताओं की समय रहते पहचान कर आवश्यक उपचार एवं रेफरल सेवाएं सुनिश्चित की जा सकीं।

जांच के दौरान चिन्हित सभी एचआरपी गर्भवतियों का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर नियमित अनुश्रवण एवं चिकित्सकीय प्रबंधन किया गया। आवश्यकता के अनुसार एनीमिया से प्रभावित महिलाओं को आयरन सुक्रोज थेरेपी उपलब्ध कराई गई, जबकि गंभीर मामलों में प्रथम रेफरल इकाइयों (एफआरयू) पर फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन लगाए गए।

उन्होंने सभी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों से नियमित प्रसवपूर्व जांच कराने, चिकित्सकीय सलाह का पालन करने तथा संस्थागत प्रसव को प्राथमिकता देने की अपील की, ताकि सुरक्षित मातृत्व के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।

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